मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019

किरदार

जीवन के कुछ पड़ाव एसे होते है जहा हम हमारी ही जिन्दगी का कोई दूसरा किरदार ढूँढ रहे होते है. थके हारे मन से रोज रोज की समझाईश भरे समझौतो से उब चुके होते हैं. उस वक्त चाहते हैं कि अब ये अभिनय कोई और करे तो बेहतर हो. परंतु जिस प्रकार गधे के आगे घास लटका कर आगे बढ़ने को बांधित किया जाता है ठीक उसी प्रकार प्रकृति भी कुछ न कुछ लालच देती रहती है और हम भी आगे बढ़ते रहते हैं.

पिछले  चार पांच दिन बड़े जोर से फ़ीवर से प्रताड़ित किया हुआ था तब मेरे मन में ख्याल आता रहता कि बीमार होना जरूरी है?  अगर हैं तो लाईफ़ का पूरा सुख भरा हिस्सा एक बार और पूरा दुख भरा हिस्सा एक बार करके सिर्फ़ दो ही हिस्सों मे भी तो बाँटा जा सकता है पूरे जीवन को. थोड़े थोड़े समय में उतार चढ़ाव आना जरुरी है? इसी बीच एक मित्र की बात याद आयी कि अगर हम इतने सही मैनेजमेंट कर सकने वाले होते/ सम्भालने वाले होते तो हम बीमार ही नहीं पड़ते ना ही उतार चढ़ाव बगैरा की फ़िक्र होती और सब कुछ सुव्यवस्थित चल रहा होता .

हर रोज की तरह आज शाम को कब्रिस्तान के सामने नसीर चाचा की चाय की दुकान पर जा बैठा. गुड वाली चाय ज्यादा पसंद है सो चाचा रोज गुड वाली चाय पिलाता है. यहा रोज एक बुड्ढे को एक आठ साल के बच्चे के साथ रोज गुजरते देखता हूँ. वह उस बच्चे को पार्क लेकर जाता है या उस वक्त लौट रहा होता है.  मुझे यह जोड़ी बहुत प्यारी लगती है. पर आज वो नही दिखाई दिये मैने घड़ी मे टाइम देखा तो मै तो अपने टाइम पर था पर वो नहीं.  मैने उत्सुकता से नसीर चाचा को पूछ लिया कि आज दो नही दिखाये दिये तो जबाब मिला " जनाब जिन दो की रोज तुम बात करते हो दरअसल वो कभी थे ही नहीं.  सिर्फ़ आपको ही क्यू लगता है कि आप देखते उनको. " थोडा संकोचित भाव मेरे चेहरे पर था पर कुछेक मिनट बाद फ़िर से मै एक नया किरदार ढूँढ रहा था.

ट्रैवलर_थॉट

#ट्रैवलर_थॉट😊😊

फ़ाईनली बच्चा चुप हो गया है. रात को ठंड लग गयी थी तो जुखाम खासी से परेशान था.  बच्चो को दवाई पिलाना भी बड़ी मशक्कत का काम है जो एक मां बखूबी कर लेती है. जिस काम को देखकर ही पिता को लगता है कि यह कैसे हो पायेगा वो काम मां आसानी से सम्भाल लेती है. मां का कोई ओप्शन नही दिया इस प्रकृति ने. हो भी नही सकता.

बच्चे ने तबाही मचा रखी है जब से चढ़ा है ट्रेन में.  कभी इधर कभी उधर.  मुझे भी मजा आ रहा है इसके साथ खेलने मे.  आजाद छोटे छोटे हाथ, मासूम सा चेहरा जिस पर फ़िक्र की भनक तक नहीं , छोटे छोटे उछल कूद करते पैर , चिल्लाने की कोई मनाही नही, किल कारी जब मन किया मार दी. ना ये पता कहा जा रहे हैं , ना ये पता कब तक उतरेन्गे, ना ये पता वापस भी आना है.  हर फ़िक्र से बेख़बर बचपन. बचपन मे सब एसे ही होते है ना.

परंतु एक चीज है जो बदल गयी वक्त के साथ. जब हम बच्चे थे इतना दुलार नही करते थे मां बाप.  इसलिये नही कि प्यार कम करते थे बल्कि हमारे माता पिता का विश्वास इस बात मे ज्यादा था कि बच्चे को खुद करने दो जो भी करना है. गिर गया खुद ही सम्भल के खडा होगा , आजकल जिस तरह लाड बच्चो को लडाया जाता है वो कुछ अलग तरह का लगता है.  मै लाड लड़ाने के खिलाफ नही हू.  मुझे इस बचपन मे प्रकृति के साथ वक्त बिताने की जगह आधुनिक सुख सुबिधाओ के साथ वक्त बिताने से परहेज है. आजकल के मां बाप अपने
बच्चो के हाथ मिट्टी में गंदे नहीं होने देते उनको लगता है कि कोई इन्फ़ेक्शन हो जायेगा.  एक हम थे कि सारा दिन मिट्टी मे खेलते निकलता था और कुछ नहीं होता था.  ज्यादा स्वस्थ्य रहते थे. बच्चो को पडोसीयो के घर नहीं जाने देते हैं जबकी हम हमेशा ही साथ मे खेलते थे. ये भी बात है कि आजकल के पैरैंट्स थप्पड़ मारना नही जानते जबकी हमे दिन भर लात जूतो से प्यार मिला है बापू का जिसके चलते कभी गलत करने हिमाकत नही हूई.  आज तक दिमाग और शरीर कंट्रोल मे रहता है उन्ही जूतियो के कारण.  आजकल के लड़के कुछ भी करते नही थकते क्यूकी जूतियो का डर कभी नहीं हुआ उनको. इस तरह का बदलाब हमारे बच्चो से एक बेहतरीन बचपन छीनना है.  इस तरह के ओवर प्रोट्रेक्टिव विहेवीयर से मुझे परहेज है. ट्रेन में बच्चो के इधर उधर घूमने को लेकर भी माता पिता के मन में होता है कि उधर मत जाओ सिर्फ़ सीट पर ही रहो.  पता नहीं क्यू बच्चो से उनकी आजादी छीनी जा रही है  जिनके वो हकदार होते है.

ये ही बच्चे जब बड़े होंगे और किसी राईटर का  बचपन किसी किताब मे पढ़ेंगे तब इनके मन में ये बात जरुर आयेगी कि काश एसा बचपन हमे भी नसीब होता. और उसके जिम्मेदार हम होंगे.

देहात से

#देहात_से

पहले लोग बैलगाड़ी से चलते थे जैसे आजकल उनकी जगह ट्रैक्टर ने ले ली. मैडी गाव की तरफ़ से गाव आते टाइम देर शाम को कुतुकपुर के बाबा भौर्या ने कटकड की नदी की ढलान पर बैलगाड़ी उतारी ही थी कि एक नौजवान लिफ़्ट मांग बैठा. थोडा अधेरा हो गया पर मौसम साफ़ था बिल्कुल. ढलान के दोनो तरफ़ मैडी और कटकड दोनो गावो की ओर बड़े बड़े बीहड़ जैसे टीले है. कटकड की चढाई एकदम से सीधी पड़ती है.
"बाबा नदी पार करा दे थोडा अधेरा हो गया कटकड के अड्डा पर उतर जाउन्गा". 
"ए भैया आजा बैठ जा ". बाबा भौर्या ने कहकर बुला लिया.
वह नौजवान बैलगाड़ी मे बैठ गया पीछे की तरफ़ पैर लटका कर. उसको बैठते ही बैलो ने बिदकना चालू कर दिया हल्का हल्का परंतु नदी मे बैलो का बिदकना रोज की बात थी कारण आगे पता चल जायेगा. इसलिये बाबा ने तनिक भी ध्यान इस बात पर नही दिया . अब कटकड की चढाई चालू हुई तो बैल परेशान होने लग गये पर जैसे तैसे आधी चढाई पूरी कर ली और अब बैलो की गर्दन के नीचे वाला पट्टा उपर जाकर उनकी गर्दन पर भिचाव देने लग गया अर्थात गाड़ी उलणडने लग गयी.
 बाबा ने बिना देखे आवाज लगायी कि "भाया थोडा आगे आजा गाड़ी उलड रही है तू ज्यादा पीछे बैठा है". पर नो रेस्पोन्स .
उसने फ़िर आवाज लगायी "भैया आगे आजा नेक गाडो उलड रोय " फ़िर नो रेस्पोन्स.
छोकड का पेड़ , जो कि आधी चढाई से थोडा उपर है, आते आते बैल ज्यादा बिदकने लग गये और उनका गला उस पट्टे से भिचा जा रहा था बिल्कुल. तब बाबा ने पीछे मुड़कर उसको फ़िर से कहना चाहा कि "मेरे पास आगे आजा बैल परेशान हो जाएंगे " पर उसके मुह से इसके बजाय अनायास ही निकला " तेरी जीजीय.... म्हारे साडे अथ कर राखि है कतई बैल हाफ़ ने लगगे " बाबा ने बैल वाले चामटे से पीछे बैठे नौजवान को
 के मारा जिसके पैर पीछे नदी तक घसीडते हुये आ रहे थे. और सफ़ेद झक्क कपड़ो मे चुपचाप बैठा था.
" बाबा हफ़ा तो तेरे कू भी देतो पर संग रखवालो चल रोय तेरो " वह बोला.
वह भूत था. उनको वरदान होता है कि वो बैलगाड़ी के मांदडे   (पहिये के एक्सल) से आगे नही बढ़ सकते है.  बैलो की तरफ़ आगे. जानवर को रात मे भूत आसानी से दिख जाते है इसीलिये नदी मे  बैलो का बिदकना आम बात है . बड़े बूढे लोग भूतो से नही डरते है. और नदी मे नसीर बाबा का मंदिर है जिसकी वजह से भूत तो रोज दिखते रहते है पर नुकसान नही कर पाते ये.
एसा बहुतो ही बार हुआ है कटकड की नदी पर..

#दिल_जयपुरी

देहात से

#देहात_से

"अरी कितने के कितने दिये है दिये "
" दस के बीस है अम्मा " कुम्हारिन बोली.
" अरे हम्बे, जे माटी को भी सोना बना नाही दिये हो तुम जो इतना महंगा बेच रही हो . दस के तीस दो तो दे दो  बीस रुपैया के "
" ये  लो पूरे साठ है  "
" तुमने तो पहले से भरके रखे है इनमे टूटे दिये होंगे तो?  मै खुद छाँट कर लुन्गी. सब के सब एसे ही है.  कोई जला हुआ , कोई टूटा हुआ और सिराही कितने की दी है? "
" पांच की दो "
" बीस रुपैया के  दिये लिये है दो सिराही तो एसे ही दे देती,  कहा ले जायेगी इतना पैसा "
" अम्मा तुमको दिये है बीस मे साठ वरन हम  दस के बीस से ज्यादा किसी को नाही देते,  लेना है तो लो नही तो आगे बढ़ो " कुम्हारिन ने इस बार सख्ती दिखा दी.
" अरे!  तुम तो बिफ़र गयी. दिये बेच रही हो या जबरदस्ती वाला धंधा कर रही हो. एक तो इनमे एक भी दिया ठीक नही है उपर से एक सिराही तक ना ज्यादा दे रही और अब एसे बात कर रही हो जैसे नही खरीदे तो मार ही डालोगी. देख लो साठ दिये है पूरे गिन लो और ये लो तुम्हारे बीस रुपये. "

अम्मा ने साठ दिये थैले मे दिखा कर कुम्हारिन को पैसे देते हुये कहा जो उसने खुद चुन चुन कर लिये है दिये के ढेर से. सिराही साथ मे मुफ़्त देने से मना कर दिया तो पारा सर चढ़ गया अम्मा का. कुम्हारिन मुफ़्त मे क्यू देगी भई आखिर कितनी मेहनत लगती है मिट्टी के दिये बनाने मे. महीनो पहले से तैयारी शुरु कर दी जाती है तब जाके बनकर तैयार होते है और कल शाम को ही मंदिर के ठीक सामने वाली जगह रोकी जो अलग , खिलोने वाले से झगडा करना पड़ गया क्यूकी उसने दो दिन पहले ये जगह अपनी दुकान के लिये फ़िक्स कर दी थी पर कल शाम पहले कुम्हारिन ने आ लगायी दुकान. शहरी औरते दिनभर पैसा उड़ा सकती है पर दो दो रुपये पर गरीब आदमी से बहस करने की आदत है . जाने तो इनके कुछेक रुपयो से उनके अमीरी आ गयी तो ये खुद को माफ़ नही कर पायेंगी .

पहले ठीक था गाव मे ही गाव वाले लेने आ जाते थे कुम्हारो के घर ही... दिया,  सिराही, भोलुआ सब कुछ वो भी नये अनाज से . परंतु अब गावो मे लाइट और मोमबत्ती ने जगह ले ली... और शहरी, शहरी अब दियो को मोडर्न दीपक की नजर से देखते है ना कि परम्परा रीति रिवाज की नजर से.

#दिल_जयपुरी

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

अहसास

चाय को सुडक कर एक सेकंड मुह मे रोककर  फ़िर निगलने पर असली स्वाद आता है उसका.

किसी चीज  को  टक टकी लगाये कोई दस सेकंड बिना सोचे/observe/ मतलब के सिर्फ़ देखनेभर के पल का अहसास .

सड़क पर खाली बोटले उठाते उस छ साल के बच्चे से नजरे मिलाने से दिल मे उठने वाली अजीब सी अकारण आत्मगिलानी.

कितना कुछ है जीवन मे जो हमारे होने
का अहसास कराता है

शनिवार, 21 सितंबर 2019

बाहर अधूरा चाँद है

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

ये आँखो का रुंधन और
ठंड हवा की बेरुखी

रेगिस्तान से जीवन मे
वक्त का कालग्रह

अधूरा इतराता चाँद
और मेरे मन का रीत जाना

रामू काका की आवाज और
भूरी(बिल्ली)  का दिवार फ़ांद जाना

उसका मुस्कुराना याद आना
 मेरा फ़िर से दिल हार जाना

बालो मे महकती मेहन्दी
 किसी गुमनाम शहर की निशानी

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

कैसा होता अगर तुम होती

कैसा होता अगर तुम होती

सुबह की चाय मे मिठास ज्यादा होती?
दिन के सूरज मे तपन ज्यादा होती?
डाइनिंग टेबल पर एक प्लेट ज्यादा होती?
वो तुलसी का पेड़ मां की पसंद का है ,
इस आंगन मे एक फ़ूल मेरी पसंद का होता
कैसा होता अगर तुम होती

ये दिल घुटा घुटा सा ना रहता
ये नैन भरे भरे से ना रहते
ये हाथ बंधे बंधे से ना रहते
यू जीने की ललक खत्म ना होती
कैसा होता अगर तुम होती.

यू खुद पे इल्जाम ना लगा रहा होता
यू अपनो के बीच पराया सा ना रहता
यू बापू से हर बात पे नजरे ना चुरा रहा होता
मै तुझसे आंख मिला रहा होता
तुम मुझसे आंख मिला रही होती
कैसा होता अगर तुम होती.

तुमसे पहली मुलाकत

#तुमसे_पहली_मुलाकात

सीने से जब पहली बार तुमने लगाया, मैंने महसूस किया कि जिंदगी की सबसे महफूज़ जगह मिल गयी है।

अब सासें थम जाना चाहती है। क्युकी जिस सहूलियत की ज़रूरत थी पूरी हो चुकी।

मैं वहां हू जहां से कोई लौटना नहीं चाहता।
जिस जगह हर कोई जीवन भर रहना चाहता है।
सुकून वालीं जगह।
दिल का शांत हो जाना, मन का पूरा हो जाना, पीठ पर हथेली का सहारे जैसा सहारा, मेरे कान से होकर मेरे दिल की धड़कनों से मिलकर धड़क की रफ़्तार बढ़ा रहीं तेरी धड़कनो की आवाज़।

वो पहली दफा तेरे आंचल से लगकर मेरा सिसकना, क्युकी मै भावुक हो गया था, फ़िर मेरे  सिसकने पर तेरा मुझको सम्हालना। मन इतनी शांति मे था कि बस इस क्षण मौत भी आये तो खुशी खुशी स्वीकार कर लू।
बेफ़िक्र दुनिया से, बेफिक्री के कुछ पल साथ जीने का एहसास।
इससे ज्यादा किसी दिलेर को इश्क मे क्या चाहिये।

मेरा तुझे देखना तेरी गर्म सांसे मेरी गर्म सांसो से मिलना।
कितना कुछ था हम दोनों को एक दूसरे मे मिलने के लिये।

An Incomplete Love

- हैलो, विनय। मै कब से फोन कर रही हूं उठा क्यूँ नहीं रहे ? सुजाता ने थोड़ी सी कड़क आवाज मे कहा।
-पापा के पास था बाबा कैसे उठाता। अभी उठाया ना। बोलो क्या बात है? विनय बोला।

-मुझे तुमसे मिलना है।
-ठीक है कल तुम्हारे कॉलेज के बाद मिलते हैं।

-नहीं अभी मिलना है।
-कबीर सिंह देख ली क्या ? अभी दोपहर के तीन बजे है कैसे आऊंगा धूप मे। ओफ़िस से आए घंटा भर नहीं हुआ पापा घर पे ही है पूछेंगे कहा जा रहे हो।

-तो तुमने अभी तक घर बताया नहीं हमारे बारे मे। मैं कितने दिन से कह रही हू तुमसे कि बता दो। बाद मे क्या कहीं और शादी कर देंगे मेरी तब बतायेंगा। मैंने अपने पापा से बात कर ली है वो मान गये। तुम भी जल्दी कर लो इस दिसम्बर मे मुझे शादी करनी है तुमसे i can't wait ।
-तुम इतनी  सेंटी क्यू हो जाती हो अभी तुम्हारा ग्रेजुएशन भी नहीं हुआ पूरा...।

-  क्या एक पढ़ा लिखा आदमी काफ़ी नही है तुमको घर मे?  बाकी पढ़ने से कौन रोक रहा है मुझे।  पढ़ती रहूंगी शादी के बाद भी। और तुम पहले मिलने आओ मैं जवाहर सर्किल पर wait कर रही हूं तुम्हारा।  एक प्रोब्लम हो गयी है प्लीज।
- क्या हुआ ? विनय ने चौंकते हुये पूछा ।

- आओ उसके बाद बताती हू।
       कहते हुये सुजाता थोड़ी इमोशनल हो गयी ।
- पापा मै अंकुश के घर जा रहा हू थोडा काम है, आता हू थोड़ी देर मे।

        विनय प्रोब्लम की सुनते ही बिना एक पल गंवाये  सुजाता से मिलने को तैयार हो गया। एक झूठा बहाना बना दिया उसके बेस्ट फ़्रेन्ड के नाम। उसे भी फ़ोन करके बोल दिया कि पापा पूछे तो बोल देना यही है।
        पिछले तीन चार साल से दोनो साथ साथ है। इसी बीच विनय की जोब लगी और दोनो ही शादी से फ़्री होना चाहते है सुजाता अभी पढ़ना चाहती है पर एक दूसरे की खुशी मे खुश हैं।

-कहा आ पहुचे ?  सुजाता ने फ़िर से कॉल किया ।
- निकल गया बस दस मिनट। उड़ के नही आ रहा यार।  विनय ने जबाब दिया।

         ये दिन सुजाता कि जिन्दगी मे बड़ी प्रोब्लम लेके आयेगा या फ़िर खुशी। सब कुछ विनय की हा या ना पर निर्भर था।  क्यूकी सुजाता प्रेग्नेन्ट है। उसे विनय से बात करनी है कि हम अभी कोर्ट मैरीज कर सकते है मै घरबालो को मना लून्गी बाद मे रीती रिवाज से शादी कर लेंगे। उसे पता है कि विनय कभी ना नही करेगा ये बहुत impotant है अभी के लिये। यदी विनय ने मना कर दिया हालांकि वह नही करेगा she sure but one percent उसने मना कर दिया... ? तो abortion only एक option रह जायेगा उसके पास।  जो उसके लिये असहनीय है।  हो सकता है जी भी ना पाये। पर उसे विनय के बारे मे पूरा पता है वो मना नही करेगा चाहे उसे घर पर लडाई ही क्यू ना करनी पड़े।

तभी अचानक से उसका मोबाईल बजा। विनय का कॉल था। उसने नोटिस किया कि घंटाभर हो गया और वो पता नही किन ख्यालो मे खो गयी ।

- This Is सुजाता?  उधर से आवाज आयी पर विनय की नही।
- yes.  पर आप....?  विनय..??
- जी मै रामनगरिया hospital से बोल रहा हू इनका नन्दपुरी बाईपास के पास एक्सीडेन्ट हो गया है और इनके मोबाईल मे आपका लास्ट कॉल था. प्लीज थोडा जल्दी आ जाईये कुछ formalities पूरी करनी है. कुछ कहना मुश्किल है सर पूरी तरह फ़ट चुका है बाकी शरीर पर कोई खरोच नही है. हैलो...  हैलो  ... जी आप सुन रही है...??

सुजाता वही गिर पड़ी. ...

विनय जल्दि मे बिना हैलमेट आ गया था और बदकिस्मती से वक्त ने भी यही वक्त चुना।  क्यूकी सुजाता ने लास्ट टाईम कब कहा था कि वो प्रोब्लम मे है उसे याद नही और आज उसने कहा है That means there is some serious matter. and Indeed It was Now Very serious....!

#दिल_जयपुरी

रविवार, 1 सितंबर 2019

तुम्हारे बाद N

#ashTag_तुम्हारे_बाद
          सिगरेट का धुंआ उपर पंखे के हैंडल तक जा रहा था ।छत से टकराकर सब तरफ़ फ़ैल रहा था । हैंडल के चारो ओर हल्का धुआ । दूसरा कश पहले पेट मे फ़िर छत की तरफ़ मुह कर के छोड़ दिया । एक हाथ मे सिगरेट और दूसरे मे कोक, मेरा पसंदीदा ड्रिंक । कोक का अक्सर गोल्ड फ़्लैक के साथ कोम्बिनेशन होता है मेरे कमरे मे चाहे रात के  ग्यारह  ही क्यू ना बजे हो । इस हैंडल मे ये तार लगायी जाये जिस पर मेरी पैन्ट सूख रही है ज्यादा लम्बी है पर बंध सकती है । करीब डेढ़ से दो फ़ीट लम्बाई के बाद स्टूल से कवर हो सकती है बाकी लम्बाई । रस्सी या कपडा ठीक तरह से नही लग सकता तार की तुलना मे । गर्दन पर नील कुछ सेकंड मे ही छा सकती है । तार नही टूटेगा महज पचास पचपन किलो के वजन से । अरे मेरी आंखे गीली क्यू है ? आंखों पर ध्यान जाते ही पता नहीं क्यू खिड़की की तरफ़ मुह करके मैने सिगरेट से पर्दे मे एक छेद कर दिया । बाहर से ठन्डी हवा आ रही है । मै हॉल का दरवाजा खोलकर बाहर आया और ठन्डी हवा मे सीढीयो के उपर दिवार के सहारे खडा था । कोक पीता हुआ । सिगरेट जल चुकी थी । सिर्फ़ एक मे ही मुझे मेरी औकात पता चल जाती है । सिर घूमता है मेरा , फ़िर भी मै पीता हू खासकर रात को । खड़े खड़े सीढीयो पर बने खाँचे देख रहा था। तीन तीन लाईने । एक सीढ़ी मे छः टाईले ।  तीन मे कुल मिलाकर अठारह टाईल है । और  नौ लाईने । थोड़ी देर मे मैने खुद को पहले वाली सीढी पर बैठा पाया और पैर सबसे निचली पर रखे थे । घुटनो पर हाथ टेके हुये सिर नीचा किये । बाये हाथ की कलाई ठीक सबसे नीचली सीढी के खाँचे के उपर थी । कल मै टोपाज का ब्लेड बोक्स लेकर आया था सेविन्ग बनाने के लिये । उस पतले धागे जैसी धारदार ब्लेड से कलाई पर हल्के से स्लिप किया जाये तो सिर्फ़ बूदे गिरेन्गी या लगातार बहेगा खून । अगर लगातार बहा तो बायी तरफ़ पहले सीढी से बाहर निकलेगा उस पर बने खाँचे से बहकर,  क्यूकी मै ठीक बीच मे नही बैठा हू दायी तरफ़ ज्यादा हिस्सा है टाईल का।  शायद दायी तरफ़ खून बाहर गिरने से पहले मै ही नीचे गिर जाउ क्यूकी मुझमे पहले से ही कमजोरी है । खून उतना है ही नही जितना एक वयस्क आदमी मे होना चाहिए । मेरी नस हल्की नीली दिख रही है शायद सबकी दिखती है । ये देखो इसके उपर का उभरा हुआ हिस्सा जिससे  बचपन मे हाथ मे थप्पी देकर ये बता देते थे कि किसने कितनी रोटी खाई है ।
         कोक कब की हाथ से गिर चुकी थी ।  बारिस की बूंदे चेहरे पर आंसूओ की बूंदो को बहा लायी जो आँखो से ठीक से निकले नही थे.  झमाझम बूंदे चेहरे पर पड़ने लगी तो देखा कि रात के साढे बारह बज चुके है और कमरे से नुसरत फ़तेह अली खान साब के "मेरे बाद किसको सताओगे " लिरिक्स सुनाई दे रहे है. पहले थी पर अब मुझे तुमसे कोई उम्मीद नही है ना ही  तेरे लौटाने के इंतजार के लिये वक्त.

तुम्हारे बाद M

#ashTag_तुम्हारे_बाद 
                 कभी कभी चाहता हू कि अपने जीवन का हर पल हरेक क्षण पन्नों पर उतार दू एक फ़िल्म की स्क्रिप्ट की तरह और उसका किरदार बन जाऊ जिसमे  कई सारे सह कलाकार होंगे । और वो भी  । दरअसल जिन्दगी है ही एक लिखी हुई फ़िल्म की तरह । हम सिर्फ़ किरदार निभा रहे है अपना अपना । हर व्यक्ति उसके जीवन का मुख्य कलाकार है और उसके जानने वाले उसके जीवन की स्क्रिप्ट के सह कलाकार । इस जिंदगी की प्यारी और खूबसूरत सी कहानी मे कुछ मोड़ एसे भी आते है तब हम सोचते है कि ये तो लिखा ही नही था फ़िर कैसे हो गया या एसा ही लिखा था तो हमे पहले बताना चाहिए था हम यह रोल नही करते । कुछ इस तरह ही किरदार निभाते निभाते खुद किरदार एक दिन बूढा हो जाता है इस दुनिया की जटिल स्क्रीप्ट  मे ।

               दिल और इरादे साफ़ रखना मेरी फ़ितरत में हमेशा शामिल रहा है । पर उसका कुछ इस तरह रुखेपन से पेश आना रास नही आया था । शायद मै भी कही न कही गलत था । कुछ दिन तक एसे लग रहा था मानो सब कुछ खत्म सा हो गया है और इसीलिये कुछ दिन मै सारी दुनिया से अलग होना चाहता था बिल्कुल अकेले । कही जाना चाहता था जहा मुझे परेशान करने वाला कोई नही हो हालांकी मेरे वन बीएचके फ़्लैट मे  अकेले पड़े रहने के  अलावा मै कही जा नही पाया पर उसी मे  दुनिया से  कनेक्टिविटी तोड़कर सूकून तलाशा मैने कई दिनो तक । यार दोस्त घर परिवार  रिश्तेदार सबसे दूर एक  जीवन जीना चाहता था जिसमे मेरे और उसकी यादो के  अलावा  कोई ना हो । यहा तक की बाहर गली से आयी होर्न की आवाज भी चिड़चिडापन ला देती थी । मजाक मे कहू तो इतना अकेलापन ढूँढने वाला व्यक्ति सत्य की खोज मे निकलता है ।
                जब इंसान को कुछ सूझता नही है  या  उसे समझ नही आता जिंदगी मे  आगे  क्या करना है  या  कुछ रास्ते जो जीने के  बेहतरीन रास्ते थे  उसकी नजर मे,   जो बंद हो चुके है, एसी स्थिति मे  अक्सर इंसान या तो अकेलापन  ढूँढता है  या मौत का इंतजार करता है , हो सकता है इंतजाम भी कर ले ।  जिन लोगो के लिये यह सब असहनीय होता है वो  इंतजाम भी ढूँढ लेते है । इसका मतलब सीधा और साफ़ है कि वो जीना नही चाहते । हार मान ली है उन्होने इस ,प्रकृति  की रहस्यमय रचना मे ।  जिसमे हर आदमी संघर्ष करता है पर उन्हे लगता है  कि उनके  जैसा  संघर्ष कोई नही कर रहा या उनकी समस्याये बाकी  लोगो से अलग है । जबकी इस संसार मे  हर एक व्यक्ति की समस्याऎ हर दूसरे व्यक्ति से ज्यादा बडी है ।

तुम्हारे बाद L

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                              कम बोलने की आदत मुझमे बहुत दिनो से है।  शायद बचपन मे भी कम बोलता होउन्गा याद नही। एसे बहुत से लोग देखे है जो कम बोलते है पर ज्यादातर का कम बोलने के पीछे का कारण उनके जीवन की उथल पुथल रहता है। कुछ लोग होते है जो  समस्याओं को उतनी दृढता से फ़ेस नही कर पाते। गूढ़ व्यक्ति बन जाते है धीरे धीरे जिनके अंदर ही अंदर कुछ गलत सा चल रहा होता  है  जो मानसिक संतुलन के लिये बिल्कुल भी ठीक नही होता। फ़िर उनको अकेलापन पसंद आता है। मुझे भी बहुत पसंद है , अकेलापन। परंतु मै किसी समस्या मे या दुविधा मे फ़न्सा हुआ नही हू।  सुलझा हुआ महसूस करता हू खुद को इस उलझी हुई दुनिया में जब मै अकेला होता हू।  बाहर की झें पें मुझमे चिड़चिड़ापन लाती है। कोई बात को विस्तार से समझाये मुझे कम ही पसंद है, जो भी कहना हो फ़टाफ़ट सुना के खत्म करो एसा स्वभाव है।
              पीछे वाली गली मे अय्यर जी ने अपना पालतू कुत्ता बेच दिया था उस दिन उनकी बारह साल की बेटी बहुत रोई थी। कुत्ता रात को तीन चार बार भौंकता था क्यूकी सामने वाले फ़्लैट मे बैचलर रहते थे सो गली मे हलचल रहती थी और ये उस कुत्ते को पसंद नही था। अय्यर जी को नींद कुत्ते से ज्यादा प्यारी थी परंतु कुत्ता उनकी बेटी को उनकी नींद से ज्यादा प्यारा था। अब उनकी बेटी घर मे अकेलापन महसूस करती है और अय्यर जी चैन से सोते है।
              तुमसे झूठ बोल रहा था मै कि कम बोलने की आदत है विचक्षण हू बगैरा बगैरा जब कि सच्चाई ये है कि मुझमे अथाह अकेलापन है पिछले कई महिनो से।  किसी से जुड़ना भी नहीं चाहता। इस चुप्पी को महसूस करने मे आनंद है जिसे छोड़ना नहीं चाहता। अकेलापन जिन्दगी रोक देता है वक्त इतना धीमे गुजरता है मानो गुजर ही नही रहा। हर पल, पल नही घंटे जैसे गुजरता है।
             अकेले रहना और अकेलापन दोनो अलग अलग चीजे है। अकेला, यानि दुनिया से कोई जुड़ाव नही , रहने से जिस व्यक्ति को पीसफ़ुल महसूस होता है उसके लिये यह  माइन्ड थैरैपी की तरह काम करता है। और अकेलापन , यानी दुनिया से कोई लगाव नही , जिस व्यक्ति मे रहता है सीधे शब्दो मे वो दिमाग से बिल्कुल भी ठीक नही है।
              मै कैसा हू मुझे पता नही पर इतना पता है कि  मै हमेशा तुम्हारा इंतजार करना चाहुन्गा। हर वक्त तुम्हे महसूस करना चाहुन्गा। अकेले मे भी, अकेलेपन मे भी।

#दिल_जयपुरी

तुम्हारे बाद K

जैसा नही हू,  वैसा  बनता जा रहा हू
कुछ ऎसा,  पता नहीं कैसा बनता जा रहा हू
शायद मै,  इकतरफ़ा इश्क मे डूबा जा रहा हू

अभी झलक पाई है,  जी भर देखना चाह रहा हू
जिन्दगीभर , के साथ का ख्वाब पाले जा रहा हू
अरे...  कहा चले गये, मै कब से तुम्हे ढूँढे जा रहा हू

बड़ी देर से खिड़की से झांके जा रहा हू
मुद्दत से नही दिखे पर इंतजार किये जा रहा हू
कभी तो गुजरोगे पुरानी गली से, सोचके शराबी बनता जा रहा हू

जैसा नही हू,  वैसा बनता जा रहा हू
कुछ ऎसा,  पता नहीं कैसा बनता जा रहा हू

#दिल_जयपुरी

तुम्हारे बाद J

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                    झूठी मुस्कान , दिलफ़रेब , झूठा इश्क , झूठ को सच मे तब्दील करता जमाना  और वो....?....  उसे कुछ नही कह सकता ना मै!...  क्यू?..! मेरी मुस्कान तो झूठी है मानता हू पर इश्क तो मिथ नही । हा...  शायद इसीलिये कुछ कह ही नही पाता मै उसे और... ना उसके बारे मे ।  जिससे इश्क होता है क्या उससे नफ़रत नही हो सकती ? अगर नही हो सकती तो बेबफ़ा शब्द इजाद कैसे हुआ । पर मुझे तो नही लगता बेबफ़ा शब्द किसी इश्क की बीमारी ने पैदा किया है । ये कही मिसअंडरस्टैंड की पैदाईस तो नही ? हो सकता है । पता नहीं मुझे क्या...! 

जमाना खुदगर्ज है  फ़िर मेरी क्यू  तुमसे हमदर्दी है ।

#दिल_जयपुरी

तुम्हारे बाद I

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                    कई दिनो बाद,  नहीं ..., महीनो बाद आज उसने कॉल किया था ।  उसके हैलो मे वो वाली बात नही लगी जो अभी तक लगती थी । हमेशा की तरह अपनेपन का नशा नही हुआ । इस थोड़ी बहुत गैरजरुरी कमी के महसूस होने पर दिल किया कि कॉल कट कर दू पर नही कर पाया । लेकिन मै झूँझलापन पर नियंत्रण नही कर पाया , पूछ रही थी क्या हुआ । अब मै कैसे उसे समझाता कि " तुम अपनी आवाज का मीठापन क्यू नही परोस रही"। शायद उसी की कमी के चलते मेरी जीव्हा का बर्ताव बदल रहा था । 
                                मेरे कानो ने हमेशा से उसकी आवाज को एक सच्चे मुसलमान का  अजान सुनने की तरह सुना है । आज इस आवाज मे हर रोज की तरह सलामती कि दुआ नही सुनाई दे रही थी । एसा लग रहा था मानो जिम्मेदारी निभा रही हो । क्या जरूरत है मत निभाओ ना जिम्मेदारी,  क्यू तकलीफ़ देती हो बेबजह खुद को ।  मै खुद की देखभाल कर सकता हू। ।  इस तरह अपनी आवाज मे बोझ क्यू ला रही हो मुझे वो ही पहले वाला हैलो चाहिए जिसमे तुम "हैलो " के ऑ की मात्र का उच्चारण एक लम्बे और पैनी धुन के साथ करती थी । तुम बात नही करना चाहती हो तो छोड़ दो ना,  जाने दो ।  वक्त लगेगा पर सब ठीक हो जाएगा ।  तुम शायद बाहर आ चुकी हो उस मोहब्बत के दल दल से।

तुम्हारे बाद H

#ashtag_तुम्हारे_बाद
            उन दिनों मै हमारे कल वाले ख्यालो मे खोया रहता था  । आज भी कुछ एसा ही है पर वो आने वाला हुआ करता था और ये वो जो गुजर चुका ।  उस वाले कल मे मिलने की आरजू थी इस वाले मे तुम्हारी यादे । अब जब भी उस गुजरे हुए कल की याद आती है तब याद आता है कि वो कल नही था असल मे तुम ही थी जो मेरे जेहन मे आसन लगाये बैठी है और पता नही कब तलक रहोगी । मै तुम्हे हटाना भी नही चाहुन्गा वहा से । जिंदगी के कुछ पल  होते है जिन्हें इंसान अंतिम सांस तक नही भूलता । बेहतरीन पलो को आजीवन संजोये रखता है । एक कभी न खर्च होने वाली पूंजी की तरह । उस पूंजी को एक बडा तबका अचल सम्पति भी कहता है । पर सम्पति नही कह सकते क्युकि यह दुनिया छोड़ने के बाद विरासत बन जाती है जिसके हिस्से भी होते है । परंतु हमारी यादे हमारे साथ ही खत्म हो जाती है ।
         कल ही की तो बात है कलम और तकिये मे ठन गयी थी ।  तकिया झेंपते हुये बोला " तुम उसके साथ मत रहो करो । जब से तुम साथ आयी हो उसने मेरा सहारा लेना छोड़ दिया है जैसे कि पहले वह मुझे कसकर पकडता था और कुछ ही पलो मे उसकी आँखें मुझे गीला कर देती थी । " पर मुझे लगता है कि तकिये को आँखो से मोहब्बत हो गयी । मतलब सब इश्क मे है । तभी कलम झल्लाती हुई बोली " तुमने सहारे के नाम पे बहुत आन्सू गिरवाये है उन आँखो से । अब जब वह लिखता है तो घिसती तो मै हू पर उसकी आंखों से दर्द का दरिया नही बहता । मै तुम्हारे पास कभी नही आने दुन्गी उसे । मै उसे तुम्हारी तरह दुखी नही देख सकती । "

तुम्हारे बाद G

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                      कॉफ़ी का चौथा कप भी बिना धोये टेबल के नीचे सरका दिया (कप का तल डूबा रहे इतनी कॉफ़ी कप मे छोड़ने की आदत है) और सिगरेट के न जाने कितने कश लगा चुका हू इस बात से वाकिफ़ होते हुये भी कि यह कितनी नुकसानदेय है । जब अपनी सारी उम्मीदे और जीने की मुराद छोड़ देते है तो कोई फ़र्क नही पड़ता कि क्या गलत है और क्या सही,  एसा महसूस होता है । बाहर अधूरा चाँद है पर रात पूरी चाँदनी और आँखो को नींद की वाट तक नही ।               
                                      तुम्हारे नाक पे चिउँटी काटने की आदत कितने लोगो को बता चुका हू । उस दिन तुमने बॉल फ़ेक कर मारी थी मुझे और पीछे गमला टूट गया था , याद है ! आजकल वह  छत पर पड़ा है । टूटा गमला । टूटी हुई हर चीज एेसे ही मौसम की मार झेलती हुई बेजान सी पड़ी रहती है । हर बसंत बिना शिकायत के सह लेती है और हर बसंत टूटी हुई हर चीज मे जान डालने की असफ़ल कोशिश करता है । बिखरे हुये को समेट कर जान डाल भी दो तो भी वह पहले जैसा नही रह जाता । कम से कम जुड़ने वाली जगह पर सलवट तो रहेगी ही। जैसे टूटे धागे मे जोड़ने के बाद की गाँठ । जैसे रफ़ू किये कपड़े पर उभरते पतले धागे का गुच्छा । जैसे तुम्हारे लौट आने के बाद भी दिल मे उन बेतरतीव बातो की इक टीस  या जैसे तुम्हारी एक इंच लम्बी मुस्कान को दो भागो मे बाँट देने वाला वो क्षणिकभर  पल ।

तुम्हारे बाद F

#ashtag_तुम्हारे_बाद
           " सौ दर्द है,  सौ राह्ते, सब मिला दिलनशी... इक  तू ही नही....! " आज भी ये ही पसंदिदा गाना है जो मै अक्सर तुम्हे गाकर सुनाता था और तुम बस चुप रह्ती थी इक लम्बी खामोशी लिये । मानो इसके बोल का हर शब्द दिल पे लग रहा हो । हर संगीत प्रेमी का कोई ना कोई फ़ेवरेट गाना,  गायक होता है जैसे कि तुम्हारा " नुसरत फ़तेह अली खान साब और उनका वो "मेरे बाद किसको सताओगे " ।

               तुमसे कुछ कहना था आज सोचा यहा लिख देता हू, शायद तुम तक पहुच ही जायेन्गी एक दिन तो मेरी सभी बाते जो मै पहले कभी नही कह पाया या साथ रहते कहना जरुरी नही समझा । जैसे कि मै उन आदतो का शिकार नही हू जिनके लिये मैने कई वर्षो पहले तुमसे प्रोमिस किया था कि, मै आज भी ब्लैक टी नही पीता , सुबह देर तक नही सोता ,  शाम का खाना रोज घर पर ही बनाकर खाता हू जैसी छोटी छोटी पर बहुत सी आदते जो तुमने सुधारी अब भी सुधरी हुई है ।  हा एक बात है जो मुझमे बदल गयी है पहले जब मै किसी बात पर बात नही करना चाहता था तो बात को नया मोड़ देकर ध्यान बंटा देता था या कहो कि बात करने से कतराता था । पर अब मै हर बात पर खुलकर चर्चा करता हू इग्नोर नही करता । सिर्फ़ उन बातो के अलावा जो दर्द नही देती है । तेरी याद दिलाने वाली हर बात, हर दृश्य,  हर जगह,  हर वो  आदमी जिसकी याद आते ही तुम मेरी आँखो के सामने आ जाती हो उन सबके बारे मे मै जरूर बात करता हू । कितना भोलापन था ना तेरी बातो मे । मासूम और भोली सूरत के साथ दिल के भोलेपन का शानदार कोम्बिनेशन ।

                वक्त के साथ सब कुछ कितना बदल जाता है । तुम जिन्दगी के उस मोड को पार कर चुकी हो और मै हू कि बार बार मोड़ के इस पार ही मुड़कर वापस आ जाता हू या यू कहू कि मै जाना ही नही चाहता इस खूबसूरत मोड़ के बाद ।  दरअसल यह मुझे खूबसूरत ही लग रहा है इसीलिए उस तरफ़ नही जाना चाहता । क्युकी यहा तुमसे जुड़ी हर चीज के साथ मै जी सकता हू ।

                बीते हुये कल को तुम्हारी यादो के साथ कुछेक दिन या कुछेक वर्ष  या शायद सारी उमर या बस अभी थोडा सा और जीना चाहता हूँ । इंसान उन पलो को ताउम्र संजोए रखता है जिनमे उसने महसूस किया हो कि मानो जीवन जिया है जिसके लिये असल मे वह जन्मा है ।

तुम्हारे बाद E

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                          यदी किसी की कद्र तुम जरुरत से ज्यादा करोगे तो उसके पास तुम्हारी भावनाओ का कत्ल कर दिया जाता है । तुम्हारी कद्र की महत्वपूर्णता उसके पास खत्म हो जाती है । शायद आसानी से मिलने वाली चीजो और अच्छे दिल के इंसान इन दोनो का ही वक्त कम ही है या है ही नही । मैने उससे कुछ भी तो नही कहा था फ़िर क्यू उसे फ़र्क नही पड़ता । कभी कुछ कहा ही नही,  कुछ कहा होता तो शायद पड़ता । उससे पिछली मुलाकात हर बार की तरह शानदार नही रही थी । इस बार उसका रुखेपन वाला चेहरा देखा था मैने उस झूठी मुस्कान के पीछे । क्या लोग एक ही चेहरे को बहुत दिनो तक देखने से या एक ही तरह के इंसान से बहुत समय तक जुड़े रहने से बोर हो जाते है । इसलिये वो नये चेहरे नये लोग तलाशने के लिये पुराने बदल देना चाहते है । हर इंसान को उसके जीवन मे अनेको प्रकार के इंसान मिलते है  जितने भी उसे अच्छे लगते है  सबसे जुड़ना चाहता हैं इसी के उलट कुछ एसे भी होते है जिनको मिलते तो बहुत लोग है परंतु सारे जीवन मे  गिने चुने, कुछेक , शायद आंकड़ा दहाई भी नही छू पाये,  जुड़ पाते है  या यू कहें कि जीवन मे ज्यादा उथल पुथल पसंद नही एसे लोगो को । हर रोज  किसी से बात बेबात पे बहस करना ।   दरअसल दूसरी तरह के लोग सनकी होते  हैं  ।  इस प्रकार के लोग हमेशा अकेला रहना चाहते है.

                                              मैने उसको कहा भी था कि कुछ मैने कह दिया हो तो मै उसके लिये माफ़ी मागता हू  पर उसने इसे बड़ी खूबसूरती के साथ दरकिनार कर दिया जिसकी मुझे  उससे तो कतई उम्मीद नही थी । मानो जैसे क्या फ़र्क पड़ता है । मेरे व्यक्तिगत जीवन मे मैने क्षमा शब्द बहुत कम उपयोग किया है। कभी दिल से लगा हो कि कहना चाहिये तब ही कहा है और किसी के मुंह से सुना है तो नजरन्दाज नही किया क्युकी यह शब्द कुछेक ही लोगो की जुबा से निकलता है जो शायद  दिल के  साफ़ होते है पर फ़िर भी मुझे इन्सान की परख करना नही आता । कभी महत्वपूर्ण ही नही समझा । शायद इसीलिये उसने कह दिया कि वह एसे लोगो की कदर नही करती जो कठोर दिल के हो । अब उसे कौन समझाये कि इस कठोर दिल के सोफ़्ट कोर्नर मे वो ही रहती है ।

तुम्हारे बाद D

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                                                       खिड़की वापस लगा दी और पर्दा भी ताकि कोई मेरा अकेलापन ना देख सके । ये लम्बा अशोक का पेड़ भी । बारिश रुकी नही है पर धीमी पड़ चुकी है मै कॉफ़ी बनाने किचन मे चला आया ।  हल्की बारिश होती तो बाहर जाता पीने , पास मे ही एक कॉफ़ी कैफ़े है पर ये औसत से थोड़ी ज्यादा है ।  तुम्हारे बिना अब छोटी छोटी चीजो  में खुशी ढूँढना आदत सी हो गयी है जैसे मद्रास में शाम की इस ठंडी हवा का अलग ही अहसास है । जैसे बचपन मे बारिश मे भीगने के बहाने ढूँढते थे जैसे कि बनिये की दुकान से फ़लाँ सामान लाना है बगैरा । अब लगता है कि भीग गये तो ठंड लग जायेगी , बीमार हो जाएंगे या कपड़े खराब हो जाएंगे जैसे बेमतलबी से बहाने जिनके पीछे जिन्दगी है । एक खुशनुमा जिन्दगी । जो तुम्हारे साथ थी बिल्कुल वैसी ही खुशनुमा जिन्दगी । जहा बस हम होते है और हमारा बचपना जो शायद अब नही रहा । इंसान के पूरे जीवन मे सिर्फ़ बचपन ही आनंदमय होता है बाकी उम्र जिम्मेदारीयो से भरी,  डर से भरी एसी ही कई सारी चीजो के बीच से गुजरती है । हमेशा की तरह कॉफ़ी टेबल पर रखी और एक गिलास पानी पिया जो की मेरी आदत है । पिताजी कहते है चाय या कॉफ़ी से पहले एक गिलास पानी पियो तो वो नुकसान नही करती । अब इसमे सच्चाई कितनी है पता नही .

तुम्हारे बाद C

#ashTag_तुम्हारे_बाद
                                            आज फ़िर वो ही पसंदीदा गाना मेरा पीछा छोडने का नाम नहीं ले रहा है जबकि मुझे भली भाँति समझ है उस गुजरे वक्त की जो कभी मेरा हुआ करता  था  पर आज  वो  ही  मेरा नही है । समय का सारा घेराव मै  अच्छे से  समझता हूँ ।  मेरा दिल भी । परंतु    हम सब इंसान है जीव है और जीवो मे भावनाए होना प्राकृतिक है । समझ कोई आढे नही आती या कम आती है । इन गीली आँखो से वर्षो से आजीवन के लिये संजोये सपने बिखरते हुये जब चाहे वह निकलते है जैसे टूटकर भी मेरे नहीं होना चाहते ।

                                               कभी कभी सोचता हूं क्या वो भी उतनी ही सांसे लेती होगी जितनी की मै ! क्या उसकी भी आँखो से बहने वाले खारे दरिया मे कभी ना खत्म होने वाला पानी होगा जितना मेरी मे है !  या थोडा सा कम या थोडा सा ज्यादा । या फ़िर जितना मै सोचता हू उतना वो नहीं सोचती ।   " आँखो पर बड़े बड़े काले घेरे हो गये है आपके " कई लोग कह चुके है पिछले कुछ दिनो मे  । पर मै तो पूरे सात से आठ घंटे सो रहा हूँ । शायद एसे ही पड़ रहे होंगे । उम्र का एक पड़ाव पूरा हो चुका है शायद इसलिये भी ।  मुझे फ़र्क नही पड़ता कोई कुछ भी कहे कुछ भी सोचे या कोई अपनी जिंदगी से ही क्यू ना निकाल दे भले । हा हू केयरलेस, नही  कर सकता मै । मै उतना अच्छा लड़का नही हू जितना कुछ लोग समझते हैं ।

तुम्हारे बाद B

#ashTag_तुम्हारे_बाद
                        कुछ दिनो से लग रहा है कि अब ज्यादा वक्त नही बचा है । जो मै हू नही वो ही बनता जा रहा हू । पलभर के लिये  लगता है  कि बस  ये ही  पल आखिरी  है फ़िर  कुछ ही सैकंड बाद ख्याल आता है पलभर का ही तो खेल है इस जहां मे । सारी दुनिया पल पल जीती हुई वर्षो जी जाती है और नही तो आज की रात नही गुजरे । यही विधान है ।  पर मुझमे अब जीने  की  चाह भी नही  बची है ।  बचेगी भी कैसे । जब  हम अपने जीवन की सबसे प्यारी चीज के साथ नही जी सकते तो क्यू जीना चाहेंगे ।

                       रात का तीसरा पहर बीतने को है और मेरे अंदर अब कुछ बचा नही है, सब रीत गया हू मै,  गहराई तक । मुझे पता है कि ना मेरा कोई कल था और ना ही कोई कल होगा । मेरे पास है तो बस आज ।  जिसमे भी अभी के कुछ पल । एक वक्त होता है जब हमे हमारी जिम्मेदारीयो भरी जिंदगी नही दिखती । एसे विचार आते ही नही मन मे कि अभी कुछ करना भी है जीवन मे ।

तुम्हारे बाद A

#ashTag_तुम्हारे_बाद
                        मै हमेशा से ही उसके पास रहना चाहता था ।  मेरा दिल कभी उसे छोड़कर जाने को राजी नही हुआ और ना ही कभी मेरे हाथो ने उसके हाथो को छोड़ना चाहा । नींद मे भी अपने होंठों को उसका नाम बुदबुदाते अक्सर पकड़ा है मैने । उसका नाम कई दफ़ा पुकार लेने की रिश्वत मांगी है मुझसे इन अंधेरी रातो ने नींद भेजने के बहाने ।
                      हर वो सुबह जो इस जहां मे खुदा की ईबादत से शुरू होती है , मेरे लिये उसका जिक्र किये बिना कभी नही हुई । आज भी हर शाम मुझसे शिकायत करती है कि शायद मै अभी तक खुद के लिये नही जी पाया हू । वास्तव मे..??...  पता नहीं!
                       मेरे कमरे के दरीचे से झाँकता ये अशोक का लम्बा पेड़ मेरी पल पल की बेचैनी का गवाह रहा है । इसने मुझे दिन मे उसका नाम चिल्लाते देखा है तो रात को बालकनी मे भटकते भी,  उसकी यादो की वजह से औझल नींद के कारण । पर इसने मेरे हालात समझे है सो चुप रहता है या इसे तरस आता है मेरी हालत पर । पता नहीं क्या है ।

शुक्रवार, 17 मई 2019

मद्रास डायरी 5

मद्रास डायरी 5

ये पांचवा दिन था. आज वो दिखाई नहीं दे रही . मेरी नजरे बस उसी पर टिकना चाह रही थी पर उसकी नामौजूदगी मे टिक नही पा रही थी.  कोच मे कभी इस तरफ़ तो कभी उस तरफ़ देखें जा रहा था बेकार में. धूप भी ठीक से नही खुली आज शायद बारिश आयेगी दोपहर तक. घने काले बादलो से लग रहा था कि मौसम ज्यादा ही खराब होने वाला है .   मन अशांत सा है. अनकहे से कई अरमान दिल मे थे और न जाने कब से जो सब आज उसके साथ शेयर करने वाला था. सब तरफ़ निगाह फ़ेरने के बाद कन्फ़र्म हो गया था कि आज वो नही आयी है.  मेरे डेली रुटीन मे आज उसकी कमी थी . पर उसकी कई साथी आयी है सिर्फ़ वो ही नही एसा क्यू.  मन मे ख्याल आ रहा था शायद खराब मौसम की वजह से नही है पर दूसरा ख्याल कहता तो फ़िर ये सब कैसे आ गयी वैसे भी  मौसम इतना भी खराब नही है.  कही सौ ख्वाव देखे थे सब का कोई अता पता नही . तभी उसकी एक साथी ने आवाज लगायी... 
क्या आप ही रिन्कू हो ??
हा!  पर...!!!
वो अब नही आयेगी. 
पर क्यू? 
उसने दूसरी कम्पनी जोईन कर ली बैंगलोर मे आज से.  शैटरडे को निकल गयी थी वही शिफ़्ट हो गयी है वो अब. 
तो आपको कैसे पता हमारे बारे मे ??
उसने मुझे बता रखा था पहले दिन से ही. 
कल कोल किया था तो बोल रही थी अगर आप मिलो तो एक बार बता दू.

इस छोटे से कन्वरसेशन मे सब खत्म हो गया था. लग रहा था बडा ख्वाव अधूरा रह गया. मन बैचैन पहले से ही था अब तो मानो टूट सा गया.  कुछेक पल की बातो से इतना लगाव. दरअसल लगाव तो पहले ही था बात अब हुई थी. उसकी हर बात रह रह के याद आ रही थी.  उसके पास होने जैसा महसूस तो नहीं हो रहा था पर कुछ तो था जो थोडा लग रहा था कि यही आस पास ही है.

आपका नम्बर दे सकते हो?  उसकी सहेली ने अचानक से कहा. 
आपको??
नही!  वो मांग रही थी. आपसे बात करना चाहती है. शाम को बात करूंगी तब दे दुन्गी. 
ओह. !
हा. उसका घर यही है. पर वहा पैकेज अच्छा मिलने के कारण चली गयी है.  " उसने कहा

 मेरे अंदर की उदासीनता लम्बी मुस्कान मे बदल गयी थी. इतनी सी देर मे पता नही क्या क्या सोच लिया था. किसी को दिल से चाहते है तो वो जरुर मिलता है ये बात शायद सच निकली. हल्की बारिश के साथ मौसम खुशनुमा हो रहा था.  मै उतर कर office आ गया था.

मद्रास डायरी 4

#मद्रास_डायरी 4

शाम के छ: बजे है. थोड़ी तेज अदरक और शक्कर वाली चाय की चुस्की के साथ थडी पे बैठे बैठे सड़क पर आते जाते वाहनो का मुआयना करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा सा है. अक्सर अकेला होता हू. रोज की तरह गुजरती बड़ी छोटी गाडियों की कम्पनियो के नाम पढ़ रहा हू . चाय एकदम बढिया बनाता है अन्ना.  आज ही बोल रहा था इसको कि अन्ना तन्दूरी टी स्टार्ट करो अब ज्यादा कमाई होगी और आसपास है भी नही दूर तक. मैने कभी पीयी नही पर बनने के तरीके से कह सकता हू कि शानदार होगी टी लवर्स के लिये.  तभी एक स्कोडा सामने से निकली और बगल के रिलायन्स फ़्रेश के आगे रूकी.
    ड्राइवर सीट से एक लडकी उतरी. क्रीमी शर्ट और डेनिम के साथ चार इन्च उचे सफ़ेद नाईकी स्नीकर पहने  गालो पे झूलते बालो को कान पे सरकाती हुई खच्च से गेट को लगाया और अंदर जा ही रही थी कि मैने पहचान लिया अरे ये तो वो ही है जो रोज ट्रेन में मिलती है. पर यहा कैसे. दो चार बची घूट जल्दी खत्म कर चाय का गिलास रखा और अन्ना के मुह पे कागज का दस का नोट मारा . मै भी अंदर गया. वह सब्जीया देखने लगी और मै पीछे वाली गैराज से होता हुआ उसी के सामने आ गया भुजिया का बडा पैकेट हाथ मे लिये ताकी उसे मात्र संयोग वाली फ़ीलिन्ग आये.

फ़ीलिन्ग लाईक...
#उनसे_नजरे_क्या_मिली_रोशन_फ़िजाये_हो_गयी

"ओह... आप यहा कैसे ! "मैने पूछा .
"अरे.. आप  ? हा यही थोड़ी दूर ही तो रहते है हम.  पर आप यहा कैसे.? आप तो विल्लीवक्कम रहते हो. "
"हा!  पर हम यहा चाय पीने इसी दुकान पे आता हू  और सामान लेने भी यही  "
"पहले कभी नही दिखे ."
"आज देख लिया ना.  "
" हा पर... " इतने मे लम्बी ट्यून के साथ कुछ लीरिक्स सुनाई दिये

मेरा नाम इश्क ...तेरा नाम इश्क ...
ये #लाल_इश्क ...ये मलाल इश्क ...

मेरा हाथ अपने आप मोबाईल तक गया और अलार्म बंद कर दी.  सुबह के छः बजे थे.
ओ हो... यहा भी #अधुरा_लाल_इश्क

मद्रास डायरी 3

#मद्रास_डायरी 3

                      स्टेशन पर उतरते ही मै सीधे ओफ़िस गया. मन मे वो ही चल रही थी स्वभाविक है इतने दिनो से अपने क्रश को मै सिर्फ़ देखता था और आज अचानक से उसने माहौल एसा बनाया कि मै खुद को बात करने से रौक नही पाया. लड़की एसी ही होती है.  उनको अगर किसी से बात करनी है तो वो खुद माहौल एसा बनाती है कि लड़का अपने आप बात करने लगता है जब दूर रहना चाहती है तो उनके मन मे ख्याल तो क्या सामने खड़े आदमी की शक्ल भी नही दिखेगी कि है कौन सामने. लड़कियो को हर पल मिलने वाले लोग पता नहीं रहते लड़को को हर पल दिखने वाली हर लड़की कितने ही दिनो तक याद रह सकती है .अब इसे प्रकृति का नियम कहो या कुछ और.
                  " केदार,  अदरक वाली चाय लेके आओ सबके लिये ओफ़िस मे.  '  मैने ओफ़िस मे एक कर्मचारी को कहा जिसका काम सिर्फ़ चाय लाना ही है. अक्सर ओफ़िस आते ही चाय के लिये जाता है सो उसके लिये सामान्य था पर मैने तो आज अलग खुशी मे चाय मंगवाई है. पर यहा ये राज ही रहेगा . मेरा मन तो कर रहा है खुशी खुशी मे सोने की अशर्फ़िया बंटवा दे आज तो अपनी नगरी मे . मैने फ़िर अमृत भैया को फ़ोन मिलाया जो अगले दो स्टेशन छोड़ के तीसरे पर duty रहते हैं. 
"गुड मोर्निन्ग भैया "
"मोर्निन्ग तो ठीक है पर ये बता आज आवाज अलग लग रही है.  लोहागढ फ़तेह कर लिया क्या "  मेरी आवाज मे खुशी महसूस करके वोले.
' Duty क्या है "
' जनरल '
' ठीक है आते हैं  लेमन टी पीने चलेन्गे लंच में '
' ठीक है,  पर सब ठीक तो है. '
' हा,  सब ठीक है,  बाकी मिलके बताते है.  और वो मिट्टी का किला फ़तेह करके क्या अचार डालून्गा मै , किरकिरायेगा हम दोनो के मूह मे. मिलके बताते है,  बाय! 
सबको लग तो गया कि बंदा आज खुश हैं. पर वजह सिर्फ़ मुझे ही पता है.
' सर चाय ' केदार चाय ला चुका था पता ही नही चला.
' आज कृष्णा नही आया क्या, दिख नही रहा? '
'नही सर वो उसकी वाईफ़ को होस्पिटल लेके जायेगा'  तीखी मुस्कान के साथ कहा.  क्युकी हम सबको पता है कुछ दिनो मे पिता बनने वाला है वो रूटीन चेकअप के लिये गया होगा. 

करीब  बारह बजे अचानक मुझे कुछ याद आया और सिर झझोड के एक मुक्का जोर से टेबल पे मारा.
"ओ शिट , कट गया आज तो सुबह सुबह. " मेरे मुह से निकला.  सुबह से खुश था पर अचानक से मुह उतर गया.
मैने फ़िर अमृत भैया को फोन लगाया.
"कहा हो भैया "
"स्टेशन,  क्या हुआ... आवाज मे फ़र्क है. "
"बोला तो था आके बताता हू "
"अरे पर... " मैने फोन काट दिया इतने मे. और मै तुरंत अगली लोकल से दस मिनट मे पहुच चुका था उनके पास .  दिमाग अचानक से एसे हो गया कि मुझे अब अन्दरूनी शान्ती की जरूरत थी जो मुझे इन्ही के पास आके मिलती है.
"आओ तेरा ही इंतजार था इस कुर्सी को सुबह से " अमृत भैया ने एक टूटी कुर्सी को मेरी तरफ़ खिसकाते हुये कहा. जब भी आता हूँ अक्सर यही बैठने को मिलती है. टिकट काउन्टर वाली ओफ़िस मे एक अतिरिक्त कुर्सी है वो ही काफ़ी है. 
"हा सही है,  वैसे भी इसी के लायक हू आज तो मै '"
"मैने सुना है मन मे घातक बात छुपाने से हार्ट अटैक जल्दी आते है.  तू जल्दी बता हुआ क्या है.  " उसने हसते हुये पूछा क्युकी मै उदास अक्सर एसी बातो पे ही हुआ जिन पर दूसरो को हसी आती है. फ़िर मैने पूरा माजरा बताया उन्होने एक जोर की थप्पी गुद्धी पे मारी और बोलने लगे
" क्या बात है छोरे ,  सुना तो है मैने कई बार तेरे मुह से उसके बारे और आज बात ही हो गयी.  अच्छी बात है ये तो." 
" भैया वो बोली आओ कोफ़ी पीने आज हमारे इधर और मैने हा कर दी "
"आये हाये एक दिन मे ही ? थोडा धीरे चलो बाबू "
"वो सब तो ठीक है भैया पर सोच रहा हु जाना कहा है "
"क्यू,  इसमे सोचना क्या है "
"भैया , वो नम्बर तो देके ही नही गयी यार " मैने हरी घास सामने से हटा लेने पर बकरी की तरह मिनमिनाते हुये कहा. 
" अवे  पेवर...! कटवा आया सुबह सुबह आज तो.... ! ""  और ये कहते कहते उन्होने एक दबा के घूसा चेप दिया पीठ पे जोर के ठहाके के साथ .
"समझ नही आ रहा तू भुलक्कड है या तुझमे हिम्मत नही है , जब वो भी खुश है तो तू नर्वस क्यू होता है और तू तो इतने दिन से चाहता है उसको "
" मैने कब कहा था मै उसको चाहता हूँ भैया,  ..एवई क्यू बढा रहे हो बात को एक तो उसका नम्बर नही ले पाया और उपर से आप भी "
" हा नही चाहता इसीलिये तो उसकी जूतियो के डिजाइन से ले के उसके नेल पोलिश के रंग तक याद है तुझे, "
"आप तो बात को बढा रहे हो यार "
"हा अब ठीक है इतना दुखी क्यू हो रहा है रोजगार बाला आदमी और औरत दोनो ही रोज घर से निकलते है और वो तो जब से तुझे मिली है रोज ही निकलती है शनिवार रविवार को छोड़ के. "
"मतलब " मेरे समझ नही आया .
" अरे मेरी स्ट्रीट लाइट कल फ़िर आयेगी वो ओफ़िस , तब ले लेना नम्बर. इतना बिलबिला क्यू रहा है "
" हा यार मेरा ध्यान ही नही गया" मै ये बात को भूल ही गया था बिल्कुल कि कल फ़िर आयेगी महबूबा. खूब विराम दिया इन्होने मेरी आज कि विचलित मनोदशा को . एकदम से अब मन शान्त था. और फ़िर हम दोनो बकवास करते हुये लेमन टी पीने चले गये . जो हमारा लगभग रोज का काम है. 
Cont ...

मद्रास डायरी 2

मद्रास डायरी 2

उसके इस तरह मुस्कुराने से मै पोजीटिव फ़ील कर रहा था सोचा क्यू ना बात की जाये मोहतर्मा से,  वैसे भी जीवन मे कोई बकवास करने वाली है नही. 
"आप कहा काम करती है?" मैने पूरे कोन्फ़ीडेन्स के साथ आगे बात बढ़ाते हुये कहा . 
"यही.  मुंडकम्मनकोईल के पास है  IT कम्पनी है उसमे काम करती हू.!" उसने सहजता से जबाब दिया.  मै एक दफ़ा उसको देखता और फ़िर मोबाईल मे. भगवान लड़कियों को खूबसूरत बनाके क्या दिखाना चाहता है. लड़के तो मानो कोई सीमेन्ट फैक्टरी  मे मैनुफ़ैक्चर किये जाते हैं मृत्यु लोक मे ही! जलन होती है.  मद्रास मे गोरी लडकी देखके. जब उनको गिरना कलूटो की बाहो मे ही है तो गोरा बनाकर हमे क्यू जलाते हो. 
""आप नोर्थ से है ना?" उसने मेरे विचार कुरेदते हुये कहा . ये सवाल घर से दूर होने का एहसास करा गया. मैने  हा मे सिर हिलाया और उसने जरा से होठ हिला के पता नहीं क्या कहा पर लगा कि बढिया ही कहा होगा कुछ.
फ़िर हमने कुछ और बाते इधर उधर की शेयर की कुछ वो अपनी जोब के बारे मे बता रही थी कुछ मै अपनी भारतीय रैल की सेवा मे तत्परता के वारे मे बता रहा था.
सटेशन आने वाला था मेरा. मैने बैग सम्भाला और उतरने को रेडी हुआ ही था कि उसने पुछ लिया.
""आपका नाम क्या है?  "" उसने पूछा.  मखै लो बन्दी को अब तक नाम पता नहीं है. 
"""जी,  रिन्कू...  रिन्कू मीणा . ""
""आज आफ़्टरनून मे क्या कर रहे हो. """
"" कुछ नही, थोडा काम है  आधा एक घंटे का फ़िर फ़्री हू. "'
""तो आज आओ उधर घूमने कोफ़ी पिलाते है आपको. "" उसने एकदम अपने अलग अन्दाज मे कहा. एक ख्याल तो आया ये तो पद्मावत ने खिलजी को चाय पे बुलाया है. 
""बिल्कुल आते हैं.  आप बुलाये और हम नही आये ये तो बात की तौहीन हो जाउगी.  ""मैने उतावलेपन से कहा.  कोफ़ी का ओफ़र बाईगोड चलते हैं  3 बजे के आसपास शाम को घर वापस साथ साथ चलेन्गे.  मै पूरा प्लान चुका था.  मै सटेसन पर उसको बाय करके उतर गया आने का वादा भी देकर के. 
आज ... Cont.

मद्रास डायरी 1

मद्रास डायरी  1

हर रोज की तरह मै आज भी उसके सामने वाली सीट पर बैठ गया. यही होगी कोई 22-23 वर्ष के आसपास जीवन के अनुभव की युवती. हम दोनो का रोज office जाना इसी  train से होता है.  वो IT कम्पनी मे जोब करती है और हम 😂भारतीय रैल के नायाब हीरे एक रेलपथ अभियंता की हैसीयत से उसी के साथ office जाने का अनुभव लेते है. हालांकी मेरा महज 20 मिनट का सफ़र होता है जिसमे भी मै उसे नही देखता नजर सिर्फ़ मोबाईल की स्क्रीन पर होती है मस्ती की पाठशाला पे और उसको 25-30 मिनट और सफ़र करना है.  पर इन 20 मिनटो मे अलग ही तरह के अनुभव की प्राप्ति होती है . वो सोमवार से शुक्रवार जाती है हम सोमवार से रविवार जाते है 😂. आज मेरे बैठने के साथ उसने अपने पतले होठो से हल्की सी मुस्कान दी मै थोडा सहमा पर थोडा मुस्कुराया भी . सहमा इसलिए कि करीब  6-7 महीने के इस रूटीन मे आज पहली बार मुस्कुरायी थी. शायद ये सोचकर कि ढीठ छोरा है इसको रोज यही सीट पे बैठना है . मैने भी फ़िर मौके पे चौका मारा पूछ लिया -
- आप कहा काम करती है .
:- सोरी...??  दवी सी पर वजनदार आवाज मे उधर से जबाब आया. मै समझ गया छोरे तेरे भविष्य पर तो हिन्दी आती ही नही.  फ़िर मैने अपनी तरफ़ के पलड़े मे अंग्रेजी के दो वाक्य तौले -
- व्हेयर आर यू वर्किन्ग ??
- IT Cell मायलापुर .  एंड यू. 
- हेयर ओनली... रायपुरम... साउदर्न रैल्वे.  मैने मुस्कुराकर उस तरह की अंग्रेजी मे जबाब दिया जिस तरह की हिन्दी मे हमारे पूर्वजो से अंग्रेज गेहूँ मांगते थे. हिन्दी मे बताते है आगे का वार्तालाप आपको अब 😂. बात एक ही सुबह में इतनी बढ़ गयी थी कि लंच के बाद साथ मे कोफ़ी पीने का ओफ़र मिल गया और  मै ओफ़र नही छोड़ता. वो भी कन्या का इम्पोसीबल. 😂
वैसे इस कोफ़ी के चक्कर मे मेरी कोफ़ी ठंडी हो रही है ....😇😇


आगे भी है. 😂😂 सुननी है तो बने रहीये म्हारे साथ.  कथा सत्य है श्रोताओ.  😂😂

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

आदिवासीयो का काला दिवस

#समारकेला_खरसावा_गोलीकान्ड

उस वक्त देश की रियासतो का एकीकरण चल रहा था . झारखंड मे समारकेला-खरसावा एक मात्र देशी रियासत थी जो जमशेदपुर शहर से सटी हुई थी इस रियासत मे आदिवासीयो की बहुलता थी.  वो अपने अलग राज्य के लिये आजादी से पहले से संघर्ष कर रहे थे. एकीकरण के समय उड़ीसा चाहता था कि यह उड़ीसा मे शामिल हो क्युकी झारखंड का शासक उडिया भाषी था.  परंतु आदिवासी या तो अलग राज्य चाहते थे या बिहार मे विलय पर अडे थे.  जो की उड़ीसा राज्य सरकार को बहुत ही नागवार गुजरा.

आदिवासीयो पर उड़ीसा मे शामिल होने के लिये लगातार दबाब बनाया जा रहा था पर वे किसी भी हालत मे उड़ीसा मे जाना नही चाहते थे.विरसा मुँडा और कई आदिवासी मुखियाओ के नेतृत्व मे सभी आदिवासीयो ने खरसावा के गुरूवार हाट मे एकत्रित होकर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को ताकत दिखाने का फ़ैसला लिया गया ताकी दोनो सरकारे गौर फ़रमाये और हमे बिहार मे शामिल किया जाये.
इस योजना की खबर राज्य सरकार को लग गयी और उसने 17 दिसंबर 1947 से ही गुरूवार की हाट पर नजर रखना चालू कर दिया इसके लिये उड़ीसा सरकार की 3 टुकड़ीया तैनात की गयी मानो कोई युद्ध तैयारी हो.

1 जनवरी 1948 गुरुवार को खरसावा की हटिया मे 40,000-50,000 आदिवासी एकत्रित हुये और फ़ैसला सिर्फ़ एक तरफ़ा था या तो अलग राज्य या बिहार मे विलय.  इस चलती हाट मे जहा पूरा विश्व नये साल के जश्न मे डूबा था और देश आजाद हिन्दुस्तान का पहला नया साल मना रहा था महज 133 दिन बाद . इन 50,000 निहत्थे आदिवासीयो पर पुलिस ने गोलियां बरसाना चालू कर दिया . कई राउंड मे #अंधाधुन्ध_गोलीबारी हुई. हजारो आदिवासी मारे गये थे जिनमे हाट मे आये बच्चे और औरते भी शामिल है. इस घटना को इतने गुप्त तरीके से अन्जाम दिया गया की पास के राज्यो को भी खबर नही लगी. किसी भी मीडिया को वहा फ़टकने भी नही दिया गया था ताकी बाहर तक बात नही पहुचे. लाशो को खरसावा के कुओ मे डाला गया और ट्रको मे भरकर बीहडो मे जानवरो को फ़ेक दिया गया था. तब से 1 जनवरी आदिवासी #काला_दिवस के रुप मे मनाते है और शहीदो को #श्रद्धांजलि देते है.
जलियावाला हत्याकांड किताबो मे पढ़ाया जाता रहा है पर इस नरसंहार कही भी इतिहास मे कोई उल्लेख नही है. सिवाय #पुरखो की जुबा के कही सुनने को नही मिलता .

उन आदिवासीयो को आज तक उनका #हक नही मिला जो कि सिर्फ़ #जल_जंगल_और_जमीन है.  उनको दुनिया से कोई मतलब नही उनको बस उनकी जगह उनसे छीनी नही जाये पर वहा सरकार विकास के नाम पर जंगलो का सफ़ाया कर रही है.  जहा आदिवासीयो को जरुरत है वहा पर एक सड़क भी आज तक नही बनाई गयी. जब झारखंड अलग राज्य बना उम्मीद थी कि अब कुछ होगा पर आज भी वो ही 1948 के  हालातो  मे लोग जीवन जीते है

#काला_दिवस

इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...