#मद्रास_डायरी 4
शाम के छ: बजे है. थोड़ी तेज अदरक और शक्कर वाली चाय की चुस्की के साथ थडी पे बैठे बैठे सड़क पर आते जाते वाहनो का मुआयना करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा सा है. अक्सर अकेला होता हू. रोज की तरह गुजरती बड़ी छोटी गाडियों की कम्पनियो के नाम पढ़ रहा हू . चाय एकदम बढिया बनाता है अन्ना. आज ही बोल रहा था इसको कि अन्ना तन्दूरी टी स्टार्ट करो अब ज्यादा कमाई होगी और आसपास है भी नही दूर तक. मैने कभी पीयी नही पर बनने के तरीके से कह सकता हू कि शानदार होगी टी लवर्स के लिये. तभी एक स्कोडा सामने से निकली और बगल के रिलायन्स फ़्रेश के आगे रूकी.
ड्राइवर सीट से एक लडकी उतरी. क्रीमी शर्ट और डेनिम के साथ चार इन्च उचे सफ़ेद नाईकी स्नीकर पहने गालो पे झूलते बालो को कान पे सरकाती हुई खच्च से गेट को लगाया और अंदर जा ही रही थी कि मैने पहचान लिया अरे ये तो वो ही है जो रोज ट्रेन में मिलती है. पर यहा कैसे. दो चार बची घूट जल्दी खत्म कर चाय का गिलास रखा और अन्ना के मुह पे कागज का दस का नोट मारा . मै भी अंदर गया. वह सब्जीया देखने लगी और मै पीछे वाली गैराज से होता हुआ उसी के सामने आ गया भुजिया का बडा पैकेट हाथ मे लिये ताकी उसे मात्र संयोग वाली फ़ीलिन्ग आये.
फ़ीलिन्ग लाईक...
#उनसे_नजरे_क्या_मिली_रोशन_फ़िजाये_हो_गयी
"ओह... आप यहा कैसे ! "मैने पूछा .
"अरे.. आप ? हा यही थोड़ी दूर ही तो रहते है हम. पर आप यहा कैसे.? आप तो विल्लीवक्कम रहते हो. "
"हा! पर हम यहा चाय पीने इसी दुकान पे आता हू और सामान लेने भी यही "
"पहले कभी नही दिखे ."
"आज देख लिया ना. "
" हा पर... " इतने मे लम्बी ट्यून के साथ कुछ लीरिक्स सुनाई दिये
मेरा नाम इश्क ...तेरा नाम इश्क ...
ये #लाल_इश्क ...ये मलाल इश्क ...
मेरा हाथ अपने आप मोबाईल तक गया और अलार्म बंद कर दी. सुबह के छः बजे थे.
ओ हो... यहा भी #अधुरा_लाल_इश्क
शाम के छ: बजे है. थोड़ी तेज अदरक और शक्कर वाली चाय की चुस्की के साथ थडी पे बैठे बैठे सड़क पर आते जाते वाहनो का मुआयना करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा सा है. अक्सर अकेला होता हू. रोज की तरह गुजरती बड़ी छोटी गाडियों की कम्पनियो के नाम पढ़ रहा हू . चाय एकदम बढिया बनाता है अन्ना. आज ही बोल रहा था इसको कि अन्ना तन्दूरी टी स्टार्ट करो अब ज्यादा कमाई होगी और आसपास है भी नही दूर तक. मैने कभी पीयी नही पर बनने के तरीके से कह सकता हू कि शानदार होगी टी लवर्स के लिये. तभी एक स्कोडा सामने से निकली और बगल के रिलायन्स फ़्रेश के आगे रूकी.
ड्राइवर सीट से एक लडकी उतरी. क्रीमी शर्ट और डेनिम के साथ चार इन्च उचे सफ़ेद नाईकी स्नीकर पहने गालो पे झूलते बालो को कान पे सरकाती हुई खच्च से गेट को लगाया और अंदर जा ही रही थी कि मैने पहचान लिया अरे ये तो वो ही है जो रोज ट्रेन में मिलती है. पर यहा कैसे. दो चार बची घूट जल्दी खत्म कर चाय का गिलास रखा और अन्ना के मुह पे कागज का दस का नोट मारा . मै भी अंदर गया. वह सब्जीया देखने लगी और मै पीछे वाली गैराज से होता हुआ उसी के सामने आ गया भुजिया का बडा पैकेट हाथ मे लिये ताकी उसे मात्र संयोग वाली फ़ीलिन्ग आये.
फ़ीलिन्ग लाईक...
#उनसे_नजरे_क्या_मिली_रोशन_फ़िजाये_हो_गयी
"ओह... आप यहा कैसे ! "मैने पूछा .
"अरे.. आप ? हा यही थोड़ी दूर ही तो रहते है हम. पर आप यहा कैसे.? आप तो विल्लीवक्कम रहते हो. "
"हा! पर हम यहा चाय पीने इसी दुकान पे आता हू और सामान लेने भी यही "
"पहले कभी नही दिखे ."
"आज देख लिया ना. "
" हा पर... " इतने मे लम्बी ट्यून के साथ कुछ लीरिक्स सुनाई दिये
मेरा नाम इश्क ...तेरा नाम इश्क ...
ये #लाल_इश्क ...ये मलाल इश्क ...
मेरा हाथ अपने आप मोबाईल तक गया और अलार्म बंद कर दी. सुबह के छः बजे थे.
ओ हो... यहा भी #अधुरा_लाल_इश्क
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