शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

खीर

 मां ने कहा डेलची मे चावल और पानी रख दो.

मैने डेलची चूल्हे पर रख दी

दो लकडियां भिडा कर लगाई पहले धुंआ धुंआ

फिर मशक्कत और आग आग


मां ने कहा इलायची पीस दो

मैने सलबट्टा साफ किया इलायची

और खोपरा दोनो पीस दिये खोपरा नही पीसना था


मां आटे मे चुटकी से अजवाइन मिला रही थी और

मुझसे कहा कि लकडी बाहर निकाल और कंडा तोड कर लगा.

मैने कंडा लगाया कुडुचली से चावल हिलाये.

इसमे दूध और किसमिस कब मिलाई मुझे पता नही.

खीर के उपर तैरती मीठे की चमकीली परत से पता चला शक्कर डाल दी गयी है.


मां ने कहा सबसे पहले सब्जी और पूरी बाबा को देकर आ.

मै बोला वो तो खीर खाते ही नही है.

बेसन की कडी कब बनी मुझे पता नही.

पर उसमे हरा धनिया नही डाला गया.

मै भाग कर गया क्यारी से धनिये के पत्ते तोडकर लाया और मिला दिये.

अब इसमे अच्छी खुशबू आ रही थी.


दिल जयपुरी

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