शुक्रवार, 17 मई 2019

मद्रास डायरी 5

मद्रास डायरी 5

ये पांचवा दिन था. आज वो दिखाई नहीं दे रही . मेरी नजरे बस उसी पर टिकना चाह रही थी पर उसकी नामौजूदगी मे टिक नही पा रही थी.  कोच मे कभी इस तरफ़ तो कभी उस तरफ़ देखें जा रहा था बेकार में. धूप भी ठीक से नही खुली आज शायद बारिश आयेगी दोपहर तक. घने काले बादलो से लग रहा था कि मौसम ज्यादा ही खराब होने वाला है .   मन अशांत सा है. अनकहे से कई अरमान दिल मे थे और न जाने कब से जो सब आज उसके साथ शेयर करने वाला था. सब तरफ़ निगाह फ़ेरने के बाद कन्फ़र्म हो गया था कि आज वो नही आयी है.  मेरे डेली रुटीन मे आज उसकी कमी थी . पर उसकी कई साथी आयी है सिर्फ़ वो ही नही एसा क्यू.  मन मे ख्याल आ रहा था शायद खराब मौसम की वजह से नही है पर दूसरा ख्याल कहता तो फ़िर ये सब कैसे आ गयी वैसे भी  मौसम इतना भी खराब नही है.  कही सौ ख्वाव देखे थे सब का कोई अता पता नही . तभी उसकी एक साथी ने आवाज लगायी... 
क्या आप ही रिन्कू हो ??
हा!  पर...!!!
वो अब नही आयेगी. 
पर क्यू? 
उसने दूसरी कम्पनी जोईन कर ली बैंगलोर मे आज से.  शैटरडे को निकल गयी थी वही शिफ़्ट हो गयी है वो अब. 
तो आपको कैसे पता हमारे बारे मे ??
उसने मुझे बता रखा था पहले दिन से ही. 
कल कोल किया था तो बोल रही थी अगर आप मिलो तो एक बार बता दू.

इस छोटे से कन्वरसेशन मे सब खत्म हो गया था. लग रहा था बडा ख्वाव अधूरा रह गया. मन बैचैन पहले से ही था अब तो मानो टूट सा गया.  कुछेक पल की बातो से इतना लगाव. दरअसल लगाव तो पहले ही था बात अब हुई थी. उसकी हर बात रह रह के याद आ रही थी.  उसके पास होने जैसा महसूस तो नहीं हो रहा था पर कुछ तो था जो थोडा लग रहा था कि यही आस पास ही है.

आपका नम्बर दे सकते हो?  उसकी सहेली ने अचानक से कहा. 
आपको??
नही!  वो मांग रही थी. आपसे बात करना चाहती है. शाम को बात करूंगी तब दे दुन्गी. 
ओह. !
हा. उसका घर यही है. पर वहा पैकेज अच्छा मिलने के कारण चली गयी है.  " उसने कहा

 मेरे अंदर की उदासीनता लम्बी मुस्कान मे बदल गयी थी. इतनी सी देर मे पता नही क्या क्या सोच लिया था. किसी को दिल से चाहते है तो वो जरुर मिलता है ये बात शायद सच निकली. हल्की बारिश के साथ मौसम खुशनुमा हो रहा था.  मै उतर कर office आ गया था.

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