रविवार, 1 सितंबर 2019

तुम्हारे बाद K

जैसा नही हू,  वैसा  बनता जा रहा हू
कुछ ऎसा,  पता नहीं कैसा बनता जा रहा हू
शायद मै,  इकतरफ़ा इश्क मे डूबा जा रहा हू

अभी झलक पाई है,  जी भर देखना चाह रहा हू
जिन्दगीभर , के साथ का ख्वाब पाले जा रहा हू
अरे...  कहा चले गये, मै कब से तुम्हे ढूँढे जा रहा हू

बड़ी देर से खिड़की से झांके जा रहा हू
मुद्दत से नही दिखे पर इंतजार किये जा रहा हू
कभी तो गुजरोगे पुरानी गली से, सोचके शराबी बनता जा रहा हू

जैसा नही हू,  वैसा बनता जा रहा हू
कुछ ऎसा,  पता नहीं कैसा बनता जा रहा हू

#दिल_जयपुरी

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