शनिवार, 21 सितंबर 2019

बाहर अधूरा चाँद है

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

ये आँखो का रुंधन और
ठंड हवा की बेरुखी

रेगिस्तान से जीवन मे
वक्त का कालग्रह

अधूरा इतराता चाँद
और मेरे मन का रीत जाना

रामू काका की आवाज और
भूरी(बिल्ली)  का दिवार फ़ांद जाना

उसका मुस्कुराना याद आना
 मेरा फ़िर से दिल हार जाना

बालो मे महकती मेहन्दी
 किसी गुमनाम शहर की निशानी

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

कैसा होता अगर तुम होती

कैसा होता अगर तुम होती

सुबह की चाय मे मिठास ज्यादा होती?
दिन के सूरज मे तपन ज्यादा होती?
डाइनिंग टेबल पर एक प्लेट ज्यादा होती?
वो तुलसी का पेड़ मां की पसंद का है ,
इस आंगन मे एक फ़ूल मेरी पसंद का होता
कैसा होता अगर तुम होती

ये दिल घुटा घुटा सा ना रहता
ये नैन भरे भरे से ना रहते
ये हाथ बंधे बंधे से ना रहते
यू जीने की ललक खत्म ना होती
कैसा होता अगर तुम होती.

यू खुद पे इल्जाम ना लगा रहा होता
यू अपनो के बीच पराया सा ना रहता
यू बापू से हर बात पे नजरे ना चुरा रहा होता
मै तुझसे आंख मिला रहा होता
तुम मुझसे आंख मिला रही होती
कैसा होता अगर तुम होती.

तुमसे पहली मुलाकत

#तुमसे_पहली_मुलाकात

सीने से जब पहली बार तुमने लगाया, मैंने महसूस किया कि जिंदगी की सबसे महफूज़ जगह मिल गयी है।

अब सासें थम जाना चाहती है। क्युकी जिस सहूलियत की ज़रूरत थी पूरी हो चुकी।

मैं वहां हू जहां से कोई लौटना नहीं चाहता।
जिस जगह हर कोई जीवन भर रहना चाहता है।
सुकून वालीं जगह।
दिल का शांत हो जाना, मन का पूरा हो जाना, पीठ पर हथेली का सहारे जैसा सहारा, मेरे कान से होकर मेरे दिल की धड़कनों से मिलकर धड़क की रफ़्तार बढ़ा रहीं तेरी धड़कनो की आवाज़।

वो पहली दफा तेरे आंचल से लगकर मेरा सिसकना, क्युकी मै भावुक हो गया था, फ़िर मेरे  सिसकने पर तेरा मुझको सम्हालना। मन इतनी शांति मे था कि बस इस क्षण मौत भी आये तो खुशी खुशी स्वीकार कर लू।
बेफ़िक्र दुनिया से, बेफिक्री के कुछ पल साथ जीने का एहसास।
इससे ज्यादा किसी दिलेर को इश्क मे क्या चाहिये।

मेरा तुझे देखना तेरी गर्म सांसे मेरी गर्म सांसो से मिलना।
कितना कुछ था हम दोनों को एक दूसरे मे मिलने के लिये।

An Incomplete Love

- हैलो, विनय। मै कब से फोन कर रही हूं उठा क्यूँ नहीं रहे ? सुजाता ने थोड़ी सी कड़क आवाज मे कहा।
-पापा के पास था बाबा कैसे उठाता। अभी उठाया ना। बोलो क्या बात है? विनय बोला।

-मुझे तुमसे मिलना है।
-ठीक है कल तुम्हारे कॉलेज के बाद मिलते हैं।

-नहीं अभी मिलना है।
-कबीर सिंह देख ली क्या ? अभी दोपहर के तीन बजे है कैसे आऊंगा धूप मे। ओफ़िस से आए घंटा भर नहीं हुआ पापा घर पे ही है पूछेंगे कहा जा रहे हो।

-तो तुमने अभी तक घर बताया नहीं हमारे बारे मे। मैं कितने दिन से कह रही हू तुमसे कि बता दो। बाद मे क्या कहीं और शादी कर देंगे मेरी तब बतायेंगा। मैंने अपने पापा से बात कर ली है वो मान गये। तुम भी जल्दी कर लो इस दिसम्बर मे मुझे शादी करनी है तुमसे i can't wait ।
-तुम इतनी  सेंटी क्यू हो जाती हो अभी तुम्हारा ग्रेजुएशन भी नहीं हुआ पूरा...।

-  क्या एक पढ़ा लिखा आदमी काफ़ी नही है तुमको घर मे?  बाकी पढ़ने से कौन रोक रहा है मुझे।  पढ़ती रहूंगी शादी के बाद भी। और तुम पहले मिलने आओ मैं जवाहर सर्किल पर wait कर रही हूं तुम्हारा।  एक प्रोब्लम हो गयी है प्लीज।
- क्या हुआ ? विनय ने चौंकते हुये पूछा ।

- आओ उसके बाद बताती हू।
       कहते हुये सुजाता थोड़ी इमोशनल हो गयी ।
- पापा मै अंकुश के घर जा रहा हू थोडा काम है, आता हू थोड़ी देर मे।

        विनय प्रोब्लम की सुनते ही बिना एक पल गंवाये  सुजाता से मिलने को तैयार हो गया। एक झूठा बहाना बना दिया उसके बेस्ट फ़्रेन्ड के नाम। उसे भी फ़ोन करके बोल दिया कि पापा पूछे तो बोल देना यही है।
        पिछले तीन चार साल से दोनो साथ साथ है। इसी बीच विनय की जोब लगी और दोनो ही शादी से फ़्री होना चाहते है सुजाता अभी पढ़ना चाहती है पर एक दूसरे की खुशी मे खुश हैं।

-कहा आ पहुचे ?  सुजाता ने फ़िर से कॉल किया ।
- निकल गया बस दस मिनट। उड़ के नही आ रहा यार।  विनय ने जबाब दिया।

         ये दिन सुजाता कि जिन्दगी मे बड़ी प्रोब्लम लेके आयेगा या फ़िर खुशी। सब कुछ विनय की हा या ना पर निर्भर था।  क्यूकी सुजाता प्रेग्नेन्ट है। उसे विनय से बात करनी है कि हम अभी कोर्ट मैरीज कर सकते है मै घरबालो को मना लून्गी बाद मे रीती रिवाज से शादी कर लेंगे। उसे पता है कि विनय कभी ना नही करेगा ये बहुत impotant है अभी के लिये। यदी विनय ने मना कर दिया हालांकि वह नही करेगा she sure but one percent उसने मना कर दिया... ? तो abortion only एक option रह जायेगा उसके पास।  जो उसके लिये असहनीय है।  हो सकता है जी भी ना पाये। पर उसे विनय के बारे मे पूरा पता है वो मना नही करेगा चाहे उसे घर पर लडाई ही क्यू ना करनी पड़े।

तभी अचानक से उसका मोबाईल बजा। विनय का कॉल था। उसने नोटिस किया कि घंटाभर हो गया और वो पता नही किन ख्यालो मे खो गयी ।

- This Is सुजाता?  उधर से आवाज आयी पर विनय की नही।
- yes.  पर आप....?  विनय..??
- जी मै रामनगरिया hospital से बोल रहा हू इनका नन्दपुरी बाईपास के पास एक्सीडेन्ट हो गया है और इनके मोबाईल मे आपका लास्ट कॉल था. प्लीज थोडा जल्दी आ जाईये कुछ formalities पूरी करनी है. कुछ कहना मुश्किल है सर पूरी तरह फ़ट चुका है बाकी शरीर पर कोई खरोच नही है. हैलो...  हैलो  ... जी आप सुन रही है...??

सुजाता वही गिर पड़ी. ...

विनय जल्दि मे बिना हैलमेट आ गया था और बदकिस्मती से वक्त ने भी यही वक्त चुना।  क्यूकी सुजाता ने लास्ट टाईम कब कहा था कि वो प्रोब्लम मे है उसे याद नही और आज उसने कहा है That means there is some serious matter. and Indeed It was Now Very serious....!

#दिल_जयपुरी

रविवार, 1 सितंबर 2019

तुम्हारे बाद N

#ashTag_तुम्हारे_बाद
          सिगरेट का धुंआ उपर पंखे के हैंडल तक जा रहा था ।छत से टकराकर सब तरफ़ फ़ैल रहा था । हैंडल के चारो ओर हल्का धुआ । दूसरा कश पहले पेट मे फ़िर छत की तरफ़ मुह कर के छोड़ दिया । एक हाथ मे सिगरेट और दूसरे मे कोक, मेरा पसंदीदा ड्रिंक । कोक का अक्सर गोल्ड फ़्लैक के साथ कोम्बिनेशन होता है मेरे कमरे मे चाहे रात के  ग्यारह  ही क्यू ना बजे हो । इस हैंडल मे ये तार लगायी जाये जिस पर मेरी पैन्ट सूख रही है ज्यादा लम्बी है पर बंध सकती है । करीब डेढ़ से दो फ़ीट लम्बाई के बाद स्टूल से कवर हो सकती है बाकी लम्बाई । रस्सी या कपडा ठीक तरह से नही लग सकता तार की तुलना मे । गर्दन पर नील कुछ सेकंड मे ही छा सकती है । तार नही टूटेगा महज पचास पचपन किलो के वजन से । अरे मेरी आंखे गीली क्यू है ? आंखों पर ध्यान जाते ही पता नहीं क्यू खिड़की की तरफ़ मुह करके मैने सिगरेट से पर्दे मे एक छेद कर दिया । बाहर से ठन्डी हवा आ रही है । मै हॉल का दरवाजा खोलकर बाहर आया और ठन्डी हवा मे सीढीयो के उपर दिवार के सहारे खडा था । कोक पीता हुआ । सिगरेट जल चुकी थी । सिर्फ़ एक मे ही मुझे मेरी औकात पता चल जाती है । सिर घूमता है मेरा , फ़िर भी मै पीता हू खासकर रात को । खड़े खड़े सीढीयो पर बने खाँचे देख रहा था। तीन तीन लाईने । एक सीढ़ी मे छः टाईले ।  तीन मे कुल मिलाकर अठारह टाईल है । और  नौ लाईने । थोड़ी देर मे मैने खुद को पहले वाली सीढी पर बैठा पाया और पैर सबसे निचली पर रखे थे । घुटनो पर हाथ टेके हुये सिर नीचा किये । बाये हाथ की कलाई ठीक सबसे नीचली सीढी के खाँचे के उपर थी । कल मै टोपाज का ब्लेड बोक्स लेकर आया था सेविन्ग बनाने के लिये । उस पतले धागे जैसी धारदार ब्लेड से कलाई पर हल्के से स्लिप किया जाये तो सिर्फ़ बूदे गिरेन्गी या लगातार बहेगा खून । अगर लगातार बहा तो बायी तरफ़ पहले सीढी से बाहर निकलेगा उस पर बने खाँचे से बहकर,  क्यूकी मै ठीक बीच मे नही बैठा हू दायी तरफ़ ज्यादा हिस्सा है टाईल का।  शायद दायी तरफ़ खून बाहर गिरने से पहले मै ही नीचे गिर जाउ क्यूकी मुझमे पहले से ही कमजोरी है । खून उतना है ही नही जितना एक वयस्क आदमी मे होना चाहिए । मेरी नस हल्की नीली दिख रही है शायद सबकी दिखती है । ये देखो इसके उपर का उभरा हुआ हिस्सा जिससे  बचपन मे हाथ मे थप्पी देकर ये बता देते थे कि किसने कितनी रोटी खाई है ।
         कोक कब की हाथ से गिर चुकी थी ।  बारिस की बूंदे चेहरे पर आंसूओ की बूंदो को बहा लायी जो आँखो से ठीक से निकले नही थे.  झमाझम बूंदे चेहरे पर पड़ने लगी तो देखा कि रात के साढे बारह बज चुके है और कमरे से नुसरत फ़तेह अली खान साब के "मेरे बाद किसको सताओगे " लिरिक्स सुनाई दे रहे है. पहले थी पर अब मुझे तुमसे कोई उम्मीद नही है ना ही  तेरे लौटाने के इंतजार के लिये वक्त.

तुम्हारे बाद M

#ashTag_तुम्हारे_बाद 
                 कभी कभी चाहता हू कि अपने जीवन का हर पल हरेक क्षण पन्नों पर उतार दू एक फ़िल्म की स्क्रिप्ट की तरह और उसका किरदार बन जाऊ जिसमे  कई सारे सह कलाकार होंगे । और वो भी  । दरअसल जिन्दगी है ही एक लिखी हुई फ़िल्म की तरह । हम सिर्फ़ किरदार निभा रहे है अपना अपना । हर व्यक्ति उसके जीवन का मुख्य कलाकार है और उसके जानने वाले उसके जीवन की स्क्रिप्ट के सह कलाकार । इस जिंदगी की प्यारी और खूबसूरत सी कहानी मे कुछ मोड़ एसे भी आते है तब हम सोचते है कि ये तो लिखा ही नही था फ़िर कैसे हो गया या एसा ही लिखा था तो हमे पहले बताना चाहिए था हम यह रोल नही करते । कुछ इस तरह ही किरदार निभाते निभाते खुद किरदार एक दिन बूढा हो जाता है इस दुनिया की जटिल स्क्रीप्ट  मे ।

               दिल और इरादे साफ़ रखना मेरी फ़ितरत में हमेशा शामिल रहा है । पर उसका कुछ इस तरह रुखेपन से पेश आना रास नही आया था । शायद मै भी कही न कही गलत था । कुछ दिन तक एसे लग रहा था मानो सब कुछ खत्म सा हो गया है और इसीलिये कुछ दिन मै सारी दुनिया से अलग होना चाहता था बिल्कुल अकेले । कही जाना चाहता था जहा मुझे परेशान करने वाला कोई नही हो हालांकी मेरे वन बीएचके फ़्लैट मे  अकेले पड़े रहने के  अलावा मै कही जा नही पाया पर उसी मे  दुनिया से  कनेक्टिविटी तोड़कर सूकून तलाशा मैने कई दिनो तक । यार दोस्त घर परिवार  रिश्तेदार सबसे दूर एक  जीवन जीना चाहता था जिसमे मेरे और उसकी यादो के  अलावा  कोई ना हो । यहा तक की बाहर गली से आयी होर्न की आवाज भी चिड़चिडापन ला देती थी । मजाक मे कहू तो इतना अकेलापन ढूँढने वाला व्यक्ति सत्य की खोज मे निकलता है ।
                जब इंसान को कुछ सूझता नही है  या  उसे समझ नही आता जिंदगी मे  आगे  क्या करना है  या  कुछ रास्ते जो जीने के  बेहतरीन रास्ते थे  उसकी नजर मे,   जो बंद हो चुके है, एसी स्थिति मे  अक्सर इंसान या तो अकेलापन  ढूँढता है  या मौत का इंतजार करता है , हो सकता है इंतजाम भी कर ले ।  जिन लोगो के लिये यह सब असहनीय होता है वो  इंतजाम भी ढूँढ लेते है । इसका मतलब सीधा और साफ़ है कि वो जीना नही चाहते । हार मान ली है उन्होने इस ,प्रकृति  की रहस्यमय रचना मे ।  जिसमे हर आदमी संघर्ष करता है पर उन्हे लगता है  कि उनके  जैसा  संघर्ष कोई नही कर रहा या उनकी समस्याये बाकी  लोगो से अलग है । जबकी इस संसार मे  हर एक व्यक्ति की समस्याऎ हर दूसरे व्यक्ति से ज्यादा बडी है ।

तुम्हारे बाद L

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                              कम बोलने की आदत मुझमे बहुत दिनो से है।  शायद बचपन मे भी कम बोलता होउन्गा याद नही। एसे बहुत से लोग देखे है जो कम बोलते है पर ज्यादातर का कम बोलने के पीछे का कारण उनके जीवन की उथल पुथल रहता है। कुछ लोग होते है जो  समस्याओं को उतनी दृढता से फ़ेस नही कर पाते। गूढ़ व्यक्ति बन जाते है धीरे धीरे जिनके अंदर ही अंदर कुछ गलत सा चल रहा होता  है  जो मानसिक संतुलन के लिये बिल्कुल भी ठीक नही होता। फ़िर उनको अकेलापन पसंद आता है। मुझे भी बहुत पसंद है , अकेलापन। परंतु मै किसी समस्या मे या दुविधा मे फ़न्सा हुआ नही हू।  सुलझा हुआ महसूस करता हू खुद को इस उलझी हुई दुनिया में जब मै अकेला होता हू।  बाहर की झें पें मुझमे चिड़चिड़ापन लाती है। कोई बात को विस्तार से समझाये मुझे कम ही पसंद है, जो भी कहना हो फ़टाफ़ट सुना के खत्म करो एसा स्वभाव है।
              पीछे वाली गली मे अय्यर जी ने अपना पालतू कुत्ता बेच दिया था उस दिन उनकी बारह साल की बेटी बहुत रोई थी। कुत्ता रात को तीन चार बार भौंकता था क्यूकी सामने वाले फ़्लैट मे बैचलर रहते थे सो गली मे हलचल रहती थी और ये उस कुत्ते को पसंद नही था। अय्यर जी को नींद कुत्ते से ज्यादा प्यारी थी परंतु कुत्ता उनकी बेटी को उनकी नींद से ज्यादा प्यारा था। अब उनकी बेटी घर मे अकेलापन महसूस करती है और अय्यर जी चैन से सोते है।
              तुमसे झूठ बोल रहा था मै कि कम बोलने की आदत है विचक्षण हू बगैरा बगैरा जब कि सच्चाई ये है कि मुझमे अथाह अकेलापन है पिछले कई महिनो से।  किसी से जुड़ना भी नहीं चाहता। इस चुप्पी को महसूस करने मे आनंद है जिसे छोड़ना नहीं चाहता। अकेलापन जिन्दगी रोक देता है वक्त इतना धीमे गुजरता है मानो गुजर ही नही रहा। हर पल, पल नही घंटे जैसे गुजरता है।
             अकेले रहना और अकेलापन दोनो अलग अलग चीजे है। अकेला, यानि दुनिया से कोई जुड़ाव नही , रहने से जिस व्यक्ति को पीसफ़ुल महसूस होता है उसके लिये यह  माइन्ड थैरैपी की तरह काम करता है। और अकेलापन , यानी दुनिया से कोई लगाव नही , जिस व्यक्ति मे रहता है सीधे शब्दो मे वो दिमाग से बिल्कुल भी ठीक नही है।
              मै कैसा हू मुझे पता नही पर इतना पता है कि  मै हमेशा तुम्हारा इंतजार करना चाहुन्गा। हर वक्त तुम्हे महसूस करना चाहुन्गा। अकेले मे भी, अकेलेपन मे भी।

#दिल_जयपुरी

तुम्हारे बाद K

जैसा नही हू,  वैसा  बनता जा रहा हू
कुछ ऎसा,  पता नहीं कैसा बनता जा रहा हू
शायद मै,  इकतरफ़ा इश्क मे डूबा जा रहा हू

अभी झलक पाई है,  जी भर देखना चाह रहा हू
जिन्दगीभर , के साथ का ख्वाब पाले जा रहा हू
अरे...  कहा चले गये, मै कब से तुम्हे ढूँढे जा रहा हू

बड़ी देर से खिड़की से झांके जा रहा हू
मुद्दत से नही दिखे पर इंतजार किये जा रहा हू
कभी तो गुजरोगे पुरानी गली से, सोचके शराबी बनता जा रहा हू

जैसा नही हू,  वैसा बनता जा रहा हू
कुछ ऎसा,  पता नहीं कैसा बनता जा रहा हू

#दिल_जयपुरी

तुम्हारे बाद J

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                    झूठी मुस्कान , दिलफ़रेब , झूठा इश्क , झूठ को सच मे तब्दील करता जमाना  और वो....?....  उसे कुछ नही कह सकता ना मै!...  क्यू?..! मेरी मुस्कान तो झूठी है मानता हू पर इश्क तो मिथ नही । हा...  शायद इसीलिये कुछ कह ही नही पाता मै उसे और... ना उसके बारे मे ।  जिससे इश्क होता है क्या उससे नफ़रत नही हो सकती ? अगर नही हो सकती तो बेबफ़ा शब्द इजाद कैसे हुआ । पर मुझे तो नही लगता बेबफ़ा शब्द किसी इश्क की बीमारी ने पैदा किया है । ये कही मिसअंडरस्टैंड की पैदाईस तो नही ? हो सकता है । पता नहीं मुझे क्या...! 

जमाना खुदगर्ज है  फ़िर मेरी क्यू  तुमसे हमदर्दी है ।

#दिल_जयपुरी

तुम्हारे बाद I

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                    कई दिनो बाद,  नहीं ..., महीनो बाद आज उसने कॉल किया था ।  उसके हैलो मे वो वाली बात नही लगी जो अभी तक लगती थी । हमेशा की तरह अपनेपन का नशा नही हुआ । इस थोड़ी बहुत गैरजरुरी कमी के महसूस होने पर दिल किया कि कॉल कट कर दू पर नही कर पाया । लेकिन मै झूँझलापन पर नियंत्रण नही कर पाया , पूछ रही थी क्या हुआ । अब मै कैसे उसे समझाता कि " तुम अपनी आवाज का मीठापन क्यू नही परोस रही"। शायद उसी की कमी के चलते मेरी जीव्हा का बर्ताव बदल रहा था । 
                                मेरे कानो ने हमेशा से उसकी आवाज को एक सच्चे मुसलमान का  अजान सुनने की तरह सुना है । आज इस आवाज मे हर रोज की तरह सलामती कि दुआ नही सुनाई दे रही थी । एसा लग रहा था मानो जिम्मेदारी निभा रही हो । क्या जरूरत है मत निभाओ ना जिम्मेदारी,  क्यू तकलीफ़ देती हो बेबजह खुद को ।  मै खुद की देखभाल कर सकता हू। ।  इस तरह अपनी आवाज मे बोझ क्यू ला रही हो मुझे वो ही पहले वाला हैलो चाहिए जिसमे तुम "हैलो " के ऑ की मात्र का उच्चारण एक लम्बे और पैनी धुन के साथ करती थी । तुम बात नही करना चाहती हो तो छोड़ दो ना,  जाने दो ।  वक्त लगेगा पर सब ठीक हो जाएगा ।  तुम शायद बाहर आ चुकी हो उस मोहब्बत के दल दल से।

तुम्हारे बाद H

#ashtag_तुम्हारे_बाद
            उन दिनों मै हमारे कल वाले ख्यालो मे खोया रहता था  । आज भी कुछ एसा ही है पर वो आने वाला हुआ करता था और ये वो जो गुजर चुका ।  उस वाले कल मे मिलने की आरजू थी इस वाले मे तुम्हारी यादे । अब जब भी उस गुजरे हुए कल की याद आती है तब याद आता है कि वो कल नही था असल मे तुम ही थी जो मेरे जेहन मे आसन लगाये बैठी है और पता नही कब तलक रहोगी । मै तुम्हे हटाना भी नही चाहुन्गा वहा से । जिंदगी के कुछ पल  होते है जिन्हें इंसान अंतिम सांस तक नही भूलता । बेहतरीन पलो को आजीवन संजोये रखता है । एक कभी न खर्च होने वाली पूंजी की तरह । उस पूंजी को एक बडा तबका अचल सम्पति भी कहता है । पर सम्पति नही कह सकते क्युकि यह दुनिया छोड़ने के बाद विरासत बन जाती है जिसके हिस्से भी होते है । परंतु हमारी यादे हमारे साथ ही खत्म हो जाती है ।
         कल ही की तो बात है कलम और तकिये मे ठन गयी थी ।  तकिया झेंपते हुये बोला " तुम उसके साथ मत रहो करो । जब से तुम साथ आयी हो उसने मेरा सहारा लेना छोड़ दिया है जैसे कि पहले वह मुझे कसकर पकडता था और कुछ ही पलो मे उसकी आँखें मुझे गीला कर देती थी । " पर मुझे लगता है कि तकिये को आँखो से मोहब्बत हो गयी । मतलब सब इश्क मे है । तभी कलम झल्लाती हुई बोली " तुमने सहारे के नाम पे बहुत आन्सू गिरवाये है उन आँखो से । अब जब वह लिखता है तो घिसती तो मै हू पर उसकी आंखों से दर्द का दरिया नही बहता । मै तुम्हारे पास कभी नही आने दुन्गी उसे । मै उसे तुम्हारी तरह दुखी नही देख सकती । "

तुम्हारे बाद G

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                      कॉफ़ी का चौथा कप भी बिना धोये टेबल के नीचे सरका दिया (कप का तल डूबा रहे इतनी कॉफ़ी कप मे छोड़ने की आदत है) और सिगरेट के न जाने कितने कश लगा चुका हू इस बात से वाकिफ़ होते हुये भी कि यह कितनी नुकसानदेय है । जब अपनी सारी उम्मीदे और जीने की मुराद छोड़ देते है तो कोई फ़र्क नही पड़ता कि क्या गलत है और क्या सही,  एसा महसूस होता है । बाहर अधूरा चाँद है पर रात पूरी चाँदनी और आँखो को नींद की वाट तक नही ।               
                                      तुम्हारे नाक पे चिउँटी काटने की आदत कितने लोगो को बता चुका हू । उस दिन तुमने बॉल फ़ेक कर मारी थी मुझे और पीछे गमला टूट गया था , याद है ! आजकल वह  छत पर पड़ा है । टूटा गमला । टूटी हुई हर चीज एेसे ही मौसम की मार झेलती हुई बेजान सी पड़ी रहती है । हर बसंत बिना शिकायत के सह लेती है और हर बसंत टूटी हुई हर चीज मे जान डालने की असफ़ल कोशिश करता है । बिखरे हुये को समेट कर जान डाल भी दो तो भी वह पहले जैसा नही रह जाता । कम से कम जुड़ने वाली जगह पर सलवट तो रहेगी ही। जैसे टूटे धागे मे जोड़ने के बाद की गाँठ । जैसे रफ़ू किये कपड़े पर उभरते पतले धागे का गुच्छा । जैसे तुम्हारे लौट आने के बाद भी दिल मे उन बेतरतीव बातो की इक टीस  या जैसे तुम्हारी एक इंच लम्बी मुस्कान को दो भागो मे बाँट देने वाला वो क्षणिकभर  पल ।

तुम्हारे बाद F

#ashtag_तुम्हारे_बाद
           " सौ दर्द है,  सौ राह्ते, सब मिला दिलनशी... इक  तू ही नही....! " आज भी ये ही पसंदिदा गाना है जो मै अक्सर तुम्हे गाकर सुनाता था और तुम बस चुप रह्ती थी इक लम्बी खामोशी लिये । मानो इसके बोल का हर शब्द दिल पे लग रहा हो । हर संगीत प्रेमी का कोई ना कोई फ़ेवरेट गाना,  गायक होता है जैसे कि तुम्हारा " नुसरत फ़तेह अली खान साब और उनका वो "मेरे बाद किसको सताओगे " ।

               तुमसे कुछ कहना था आज सोचा यहा लिख देता हू, शायद तुम तक पहुच ही जायेन्गी एक दिन तो मेरी सभी बाते जो मै पहले कभी नही कह पाया या साथ रहते कहना जरुरी नही समझा । जैसे कि मै उन आदतो का शिकार नही हू जिनके लिये मैने कई वर्षो पहले तुमसे प्रोमिस किया था कि, मै आज भी ब्लैक टी नही पीता , सुबह देर तक नही सोता ,  शाम का खाना रोज घर पर ही बनाकर खाता हू जैसी छोटी छोटी पर बहुत सी आदते जो तुमने सुधारी अब भी सुधरी हुई है ।  हा एक बात है जो मुझमे बदल गयी है पहले जब मै किसी बात पर बात नही करना चाहता था तो बात को नया मोड़ देकर ध्यान बंटा देता था या कहो कि बात करने से कतराता था । पर अब मै हर बात पर खुलकर चर्चा करता हू इग्नोर नही करता । सिर्फ़ उन बातो के अलावा जो दर्द नही देती है । तेरी याद दिलाने वाली हर बात, हर दृश्य,  हर जगह,  हर वो  आदमी जिसकी याद आते ही तुम मेरी आँखो के सामने आ जाती हो उन सबके बारे मे मै जरूर बात करता हू । कितना भोलापन था ना तेरी बातो मे । मासूम और भोली सूरत के साथ दिल के भोलेपन का शानदार कोम्बिनेशन ।

                वक्त के साथ सब कुछ कितना बदल जाता है । तुम जिन्दगी के उस मोड को पार कर चुकी हो और मै हू कि बार बार मोड़ के इस पार ही मुड़कर वापस आ जाता हू या यू कहू कि मै जाना ही नही चाहता इस खूबसूरत मोड़ के बाद ।  दरअसल यह मुझे खूबसूरत ही लग रहा है इसीलिए उस तरफ़ नही जाना चाहता । क्युकी यहा तुमसे जुड़ी हर चीज के साथ मै जी सकता हू ।

                बीते हुये कल को तुम्हारी यादो के साथ कुछेक दिन या कुछेक वर्ष  या शायद सारी उमर या बस अभी थोडा सा और जीना चाहता हूँ । इंसान उन पलो को ताउम्र संजोए रखता है जिनमे उसने महसूस किया हो कि मानो जीवन जिया है जिसके लिये असल मे वह जन्मा है ।

तुम्हारे बाद E

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                          यदी किसी की कद्र तुम जरुरत से ज्यादा करोगे तो उसके पास तुम्हारी भावनाओ का कत्ल कर दिया जाता है । तुम्हारी कद्र की महत्वपूर्णता उसके पास खत्म हो जाती है । शायद आसानी से मिलने वाली चीजो और अच्छे दिल के इंसान इन दोनो का ही वक्त कम ही है या है ही नही । मैने उससे कुछ भी तो नही कहा था फ़िर क्यू उसे फ़र्क नही पड़ता । कभी कुछ कहा ही नही,  कुछ कहा होता तो शायद पड़ता । उससे पिछली मुलाकात हर बार की तरह शानदार नही रही थी । इस बार उसका रुखेपन वाला चेहरा देखा था मैने उस झूठी मुस्कान के पीछे । क्या लोग एक ही चेहरे को बहुत दिनो तक देखने से या एक ही तरह के इंसान से बहुत समय तक जुड़े रहने से बोर हो जाते है । इसलिये वो नये चेहरे नये लोग तलाशने के लिये पुराने बदल देना चाहते है । हर इंसान को उसके जीवन मे अनेको प्रकार के इंसान मिलते है  जितने भी उसे अच्छे लगते है  सबसे जुड़ना चाहता हैं इसी के उलट कुछ एसे भी होते है जिनको मिलते तो बहुत लोग है परंतु सारे जीवन मे  गिने चुने, कुछेक , शायद आंकड़ा दहाई भी नही छू पाये,  जुड़ पाते है  या यू कहें कि जीवन मे ज्यादा उथल पुथल पसंद नही एसे लोगो को । हर रोज  किसी से बात बेबात पे बहस करना ।   दरअसल दूसरी तरह के लोग सनकी होते  हैं  ।  इस प्रकार के लोग हमेशा अकेला रहना चाहते है.

                                              मैने उसको कहा भी था कि कुछ मैने कह दिया हो तो मै उसके लिये माफ़ी मागता हू  पर उसने इसे बड़ी खूबसूरती के साथ दरकिनार कर दिया जिसकी मुझे  उससे तो कतई उम्मीद नही थी । मानो जैसे क्या फ़र्क पड़ता है । मेरे व्यक्तिगत जीवन मे मैने क्षमा शब्द बहुत कम उपयोग किया है। कभी दिल से लगा हो कि कहना चाहिये तब ही कहा है और किसी के मुंह से सुना है तो नजरन्दाज नही किया क्युकी यह शब्द कुछेक ही लोगो की जुबा से निकलता है जो शायद  दिल के  साफ़ होते है पर फ़िर भी मुझे इन्सान की परख करना नही आता । कभी महत्वपूर्ण ही नही समझा । शायद इसीलिये उसने कह दिया कि वह एसे लोगो की कदर नही करती जो कठोर दिल के हो । अब उसे कौन समझाये कि इस कठोर दिल के सोफ़्ट कोर्नर मे वो ही रहती है ।

तुम्हारे बाद D

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                                       खिड़की वापस लगा दी और पर्दा भी ताकि कोई मेरा अकेलापन ना देख सके । ये लम्बा अशोक का पेड़ भी । बारिश रुकी नही है पर धीमी पड़ चुकी है मै कॉफ़ी बनाने किचन मे चला आया ।  हल्की बारिश होती तो बाहर जाता पीने , पास मे ही एक कॉफ़ी कैफ़े है पर ये औसत से थोड़ी ज्यादा है ।  तुम्हारे बिना अब छोटी छोटी चीजो  में खुशी ढूँढना आदत सी हो गयी है जैसे मद्रास में शाम की इस ठंडी हवा का अलग ही अहसास है । जैसे बचपन मे बारिश मे भीगने के बहाने ढूँढते थे जैसे कि बनिये की दुकान से फ़लाँ सामान लाना है बगैरा । अब लगता है कि भीग गये तो ठंड लग जायेगी , बीमार हो जाएंगे या कपड़े खराब हो जाएंगे जैसे बेमतलबी से बहाने जिनके पीछे जिन्दगी है । एक खुशनुमा जिन्दगी । जो तुम्हारे साथ थी बिल्कुल वैसी ही खुशनुमा जिन्दगी । जहा बस हम होते है और हमारा बचपना जो शायद अब नही रहा । इंसान के पूरे जीवन मे सिर्फ़ बचपन ही आनंदमय होता है बाकी उम्र जिम्मेदारीयो से भरी,  डर से भरी एसी ही कई सारी चीजो के बीच से गुजरती है । हमेशा की तरह कॉफ़ी टेबल पर रखी और एक गिलास पानी पिया जो की मेरी आदत है । पिताजी कहते है चाय या कॉफ़ी से पहले एक गिलास पानी पियो तो वो नुकसान नही करती । अब इसमे सच्चाई कितनी है पता नही .

तुम्हारे बाद C

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                                            आज फ़िर वो ही पसंदीदा गाना मेरा पीछा छोडने का नाम नहीं ले रहा है जबकि मुझे भली भाँति समझ है उस गुजरे वक्त की जो कभी मेरा हुआ करता  था  पर आज  वो  ही  मेरा नही है । समय का सारा घेराव मै  अच्छे से  समझता हूँ ।  मेरा दिल भी । परंतु    हम सब इंसान है जीव है और जीवो मे भावनाए होना प्राकृतिक है । समझ कोई आढे नही आती या कम आती है । इन गीली आँखो से वर्षो से आजीवन के लिये संजोये सपने बिखरते हुये जब चाहे वह निकलते है जैसे टूटकर भी मेरे नहीं होना चाहते ।

                                               कभी कभी सोचता हूं क्या वो भी उतनी ही सांसे लेती होगी जितनी की मै ! क्या उसकी भी आँखो से बहने वाले खारे दरिया मे कभी ना खत्म होने वाला पानी होगा जितना मेरी मे है !  या थोडा सा कम या थोडा सा ज्यादा । या फ़िर जितना मै सोचता हू उतना वो नहीं सोचती ।   " आँखो पर बड़े बड़े काले घेरे हो गये है आपके " कई लोग कह चुके है पिछले कुछ दिनो मे  । पर मै तो पूरे सात से आठ घंटे सो रहा हूँ । शायद एसे ही पड़ रहे होंगे । उम्र का एक पड़ाव पूरा हो चुका है शायद इसलिये भी ।  मुझे फ़र्क नही पड़ता कोई कुछ भी कहे कुछ भी सोचे या कोई अपनी जिंदगी से ही क्यू ना निकाल दे भले । हा हू केयरलेस, नही  कर सकता मै । मै उतना अच्छा लड़का नही हू जितना कुछ लोग समझते हैं ।

तुम्हारे बाद B

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                        कुछ दिनो से लग रहा है कि अब ज्यादा वक्त नही बचा है । जो मै हू नही वो ही बनता जा रहा हू । पलभर के लिये  लगता है  कि बस  ये ही  पल आखिरी  है फ़िर  कुछ ही सैकंड बाद ख्याल आता है पलभर का ही तो खेल है इस जहां मे । सारी दुनिया पल पल जीती हुई वर्षो जी जाती है और नही तो आज की रात नही गुजरे । यही विधान है ।  पर मुझमे अब जीने  की  चाह भी नही  बची है ।  बचेगी भी कैसे । जब  हम अपने जीवन की सबसे प्यारी चीज के साथ नही जी सकते तो क्यू जीना चाहेंगे ।

                       रात का तीसरा पहर बीतने को है और मेरे अंदर अब कुछ बचा नही है, सब रीत गया हू मै,  गहराई तक । मुझे पता है कि ना मेरा कोई कल था और ना ही कोई कल होगा । मेरे पास है तो बस आज ।  जिसमे भी अभी के कुछ पल । एक वक्त होता है जब हमे हमारी जिम्मेदारीयो भरी जिंदगी नही दिखती । एसे विचार आते ही नही मन मे कि अभी कुछ करना भी है जीवन मे ।

तुम्हारे बाद A

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                        मै हमेशा से ही उसके पास रहना चाहता था ।  मेरा दिल कभी उसे छोड़कर जाने को राजी नही हुआ और ना ही कभी मेरे हाथो ने उसके हाथो को छोड़ना चाहा । नींद मे भी अपने होंठों को उसका नाम बुदबुदाते अक्सर पकड़ा है मैने । उसका नाम कई दफ़ा पुकार लेने की रिश्वत मांगी है मुझसे इन अंधेरी रातो ने नींद भेजने के बहाने ।
                      हर वो सुबह जो इस जहां मे खुदा की ईबादत से शुरू होती है , मेरे लिये उसका जिक्र किये बिना कभी नही हुई । आज भी हर शाम मुझसे शिकायत करती है कि शायद मै अभी तक खुद के लिये नही जी पाया हू । वास्तव मे..??...  पता नहीं!
                       मेरे कमरे के दरीचे से झाँकता ये अशोक का लम्बा पेड़ मेरी पल पल की बेचैनी का गवाह रहा है । इसने मुझे दिन मे उसका नाम चिल्लाते देखा है तो रात को बालकनी मे भटकते भी,  उसकी यादो की वजह से औझल नींद के कारण । पर इसने मेरे हालात समझे है सो चुप रहता है या इसे तरस आता है मेरी हालत पर । पता नहीं क्या है ।

इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...