#ashtag_तुम्हारे_बाद
" सौ दर्द है, सौ राह्ते, सब मिला दिलनशी... इक तू ही नही....! " आज भी ये ही पसंदिदा गाना है जो मै अक्सर तुम्हे गाकर सुनाता था और तुम बस चुप रह्ती थी इक लम्बी खामोशी लिये । मानो इसके बोल का हर शब्द दिल पे लग रहा हो । हर संगीत प्रेमी का कोई ना कोई फ़ेवरेट गाना, गायक होता है जैसे कि तुम्हारा " नुसरत फ़तेह अली खान साब और उनका वो "मेरे बाद किसको सताओगे " ।
तुमसे कुछ कहना था आज सोचा यहा लिख देता हू, शायद तुम तक पहुच ही जायेन्गी एक दिन तो मेरी सभी बाते जो मै पहले कभी नही कह पाया या साथ रहते कहना जरुरी नही समझा । जैसे कि मै उन आदतो का शिकार नही हू जिनके लिये मैने कई वर्षो पहले तुमसे प्रोमिस किया था कि, मै आज भी ब्लैक टी नही पीता , सुबह देर तक नही सोता , शाम का खाना रोज घर पर ही बनाकर खाता हू जैसी छोटी छोटी पर बहुत सी आदते जो तुमने सुधारी अब भी सुधरी हुई है । हा एक बात है जो मुझमे बदल गयी है पहले जब मै किसी बात पर बात नही करना चाहता था तो बात को नया मोड़ देकर ध्यान बंटा देता था या कहो कि बात करने से कतराता था । पर अब मै हर बात पर खुलकर चर्चा करता हू इग्नोर नही करता । सिर्फ़ उन बातो के अलावा जो दर्द नही देती है । तेरी याद दिलाने वाली हर बात, हर दृश्य, हर जगह, हर वो आदमी जिसकी याद आते ही तुम मेरी आँखो के सामने आ जाती हो उन सबके बारे मे मै जरूर बात करता हू । कितना भोलापन था ना तेरी बातो मे । मासूम और भोली सूरत के साथ दिल के भोलेपन का शानदार कोम्बिनेशन ।
वक्त के साथ सब कुछ कितना बदल जाता है । तुम जिन्दगी के उस मोड को पार कर चुकी हो और मै हू कि बार बार मोड़ के इस पार ही मुड़कर वापस आ जाता हू या यू कहू कि मै जाना ही नही चाहता इस खूबसूरत मोड़ के बाद । दरअसल यह मुझे खूबसूरत ही लग रहा है इसीलिए उस तरफ़ नही जाना चाहता । क्युकी यहा तुमसे जुड़ी हर चीज के साथ मै जी सकता हू ।
बीते हुये कल को तुम्हारी यादो के साथ कुछेक दिन या कुछेक वर्ष या शायद सारी उमर या बस अभी थोडा सा और जीना चाहता हूँ । इंसान उन पलो को ताउम्र संजोए रखता है जिनमे उसने महसूस किया हो कि मानो जीवन जिया है जिसके लिये असल मे वह जन्मा है ।