शुक्रवार, 17 मई 2019

मद्रास डायरी 1

मद्रास डायरी  1

हर रोज की तरह मै आज भी उसके सामने वाली सीट पर बैठ गया. यही होगी कोई 22-23 वर्ष के आसपास जीवन के अनुभव की युवती. हम दोनो का रोज office जाना इसी  train से होता है.  वो IT कम्पनी मे जोब करती है और हम 😂भारतीय रैल के नायाब हीरे एक रेलपथ अभियंता की हैसीयत से उसी के साथ office जाने का अनुभव लेते है. हालांकी मेरा महज 20 मिनट का सफ़र होता है जिसमे भी मै उसे नही देखता नजर सिर्फ़ मोबाईल की स्क्रीन पर होती है मस्ती की पाठशाला पे और उसको 25-30 मिनट और सफ़र करना है.  पर इन 20 मिनटो मे अलग ही तरह के अनुभव की प्राप्ति होती है . वो सोमवार से शुक्रवार जाती है हम सोमवार से रविवार जाते है 😂. आज मेरे बैठने के साथ उसने अपने पतले होठो से हल्की सी मुस्कान दी मै थोडा सहमा पर थोडा मुस्कुराया भी . सहमा इसलिए कि करीब  6-7 महीने के इस रूटीन मे आज पहली बार मुस्कुरायी थी. शायद ये सोचकर कि ढीठ छोरा है इसको रोज यही सीट पे बैठना है . मैने भी फ़िर मौके पे चौका मारा पूछ लिया -
- आप कहा काम करती है .
:- सोरी...??  दवी सी पर वजनदार आवाज मे उधर से जबाब आया. मै समझ गया छोरे तेरे भविष्य पर तो हिन्दी आती ही नही.  फ़िर मैने अपनी तरफ़ के पलड़े मे अंग्रेजी के दो वाक्य तौले -
- व्हेयर आर यू वर्किन्ग ??
- IT Cell मायलापुर .  एंड यू. 
- हेयर ओनली... रायपुरम... साउदर्न रैल्वे.  मैने मुस्कुराकर उस तरह की अंग्रेजी मे जबाब दिया जिस तरह की हिन्दी मे हमारे पूर्वजो से अंग्रेज गेहूँ मांगते थे. हिन्दी मे बताते है आगे का वार्तालाप आपको अब 😂. बात एक ही सुबह में इतनी बढ़ गयी थी कि लंच के बाद साथ मे कोफ़ी पीने का ओफ़र मिल गया और  मै ओफ़र नही छोड़ता. वो भी कन्या का इम्पोसीबल. 😂
वैसे इस कोफ़ी के चक्कर मे मेरी कोफ़ी ठंडी हो रही है ....😇😇


आगे भी है. 😂😂 सुननी है तो बने रहीये म्हारे साथ.  कथा सत्य है श्रोताओ.  😂😂

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