सोमवार, 18 जून 2018

जय किसान

#देश
             देश मे सैकडो बडे बड़े मन्दिर है जिनमे रूपयो की गिनती के लिए मशीने लगी है . कुछ मन्दिर तो ऐसे है जिनमे दान मे आया रूपया गिनने के लिए सरकार सरकारी कर्मचारियो को नियुक्त करती है । हर वर्ष अरबो खरबो का दान मन्दिरों मे आसानी से आ जाता है।  हर बडे मन्दिर पर सरकार का ताला भी है दान के टेण्डर मे से 30-70 प्रतिशत सरकार को जाता है बाकी का टेण्डर बाला ब्राहमण ले जाता है अपना कोठा भरने।
           एक नेता को किसी भी सरकारी कर्मचारी से अधिक वेतन मिलता है सुविधायें मिलयी है। नेताओ के बच्चे विदेशो मे रहकर पढाई कर रहे होंगे ।
            बैंक उद्योगपतियो को लोन इसलिए दे देता है क्यूकी वो बडे उद्यमी है । उनको कर्जा कितना भी बैंक दे सकता है ।उनके पूरे उद्योग की कीमत से ज्यादा बैंक लोन दे देते है।
             देश मे किसी भी सरकारी निर्माण पर निर्धारित धन मे से  केबल 40-60 प्रतिशत खर्च ही होगा और बाकी रूपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ जाता है।

#किसान
            किसान को फसले बोने के लिए पैसा नही मिल पाता . जहा मिलता है वहां ब्याज की दरे कमर तोडती है। ब्याज कुछ दिन मे इतना बढ जाता है कि वह चुका नही पाता . बडी दयनीय स्थिति बन जाती है .
              किसानो के बच्चे सरकारी स्कूल मे पढकर आगे बढते है । उनके खून मे किसानी है। किसान अपने बच्चो को प्राइवेट विद्यालय मे नही पढा पाता । जब बेटा पढाई करने शहर जाता है तब किसान कर्जा मे डूबा होता है पर फिर भी अपने बेटे को पढाता है कर्जा लेकर । उम्मीद के साथ की नौकरी लगने के बाद बेटा चुका देगा ।पर जगह नही निकलती है जॉब कैसे लगे।
               बैंक किसानों को लोन खेत के कागज गिरवी रखने के बाद देता है अगर लॉन ही चुका पाया तो खेत को बैंक निलाम कर देता है
               देश का 60-70% किसान आज भी कच्चे मकान मे रहता है ।

               #भारत किसान प्रधान देश है। खेती पर निर्भर है। देश मे किसानो को कोई राहत नही है इस समय . तमिलनाडु के किसान सूखे की मार झेल रहे है सरकार की तरफ से कोई कदम नही उठाये गये। तमिल किसानो ने संसद पर महिनों धरना दिया किसानो ने ना कोई मिडिया ने दिखाया ना किसी सरकार ने ध्यान दिया। सैकडो किसान आत्म हत्या करते है हर साल उनका कोई कर्ज माफ नही जाता।  ये दयनीय स्थिति ही तो है किसान की। मध्यप्रदेश मे महाराष्ट्र मे कितने किसान आत्म हत्या कर लेते है फिर भी सरकार को नेताओ को कोई फर्क नही पडता है । जबकी सरकार यह भूल रही है कि जिस दिन किसान का अनाज शहर नही गया उस दिन देश भूखो मरने की नौबत आ जायेगी । गुजरात राजस्थान हरियाणा ने अगर 1 दिन दूध दिल्ली नही भेजा तो दिल्ली मे मां बच्चो को पाश्चुरिकृत दूध पिलायेगी. जिससे पेट ठीक से नही भरता बच्चे का विकास तो दूर की बात है ।

                     #किसानो का अगर कर्जा माफ किया जाये तो उनमे फसल पैदा करमे का जज्बा रैदा हो।  सूखे इलाको को पानी की व्यवस्था हो जाये तो देश को जरूरत से ज्यादा अनाज मसाले पैदा हो। किसान की फसल का उचित दाम लगाया जाये तो उसकी गरीबी दूर हो सके ताकि वह भी अपने बच्चो के सपने पूरे कर सके।
जो देश खेती पर निर्भर हो और उसी को ठीक से नही कर सकें तो देश कैसे विकास कर सकता है । कैसे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी किसान की और देश की । किसान का साथ देने की जरूरत है उसका हौसला अफजाई करने की जरूरत है इस देश की रीढ है किसान। मै खुद किसान का बेटा हूं तो किसान की दशा को बेहतर समझता हूं मै भी काम करता हूं खेतो मे । मैंने भी अनाज खेतो मे उगा कर मंडी मे पहुचाया है .जहां मुझे कभी भी मेरी फसल का उचित दाम नही मिला । .
#खैर मै तो किसान के साथ था, साथ हूं और आजीवन रहूंगा।
#जय_किसान

रविवार, 17 जून 2018

असलियत 1

#पिता

                   जब हमारी गाव मे पढाई पूरी हो जाती है तो अपने सपनो को उडान देने के लिए हम जयपुर या दिल्ली जैसे शहरो मे पढाई जारी करना चाहते है खासकर के हम मीणाओ के लडके लड़कियां. किसी ने कोई सपना देखा होता है किसी ने कोई सपना देखा होता है वास्तविकता मे वो सपने हमने सिर्फ देखे होते है उनको पूरा कराने का असली जुनून तो पिता की आँखों मे होता है .  वो सपना पूरा करने का लक्ष्य तो पिता ने निश्चित किया होता है हमसे ज्यादा. और एक मध्यम वर्गीय या गरीब परिवार मीणाओ के है ज्यादातर. सभी मीणाओ के घर मे कस्टम कलेक्टर आईपीएस नही है . है भी तो वो भी ऐसी ही स्थिति से गुजरे है . बात ये है कि जब हम पढाई जारी करते है शहर मे तो कमरा कॉलेज और कोचिंग की फीस पिता देता है और हमको ये पता नही होता कि उसने कहा से रुपयो की व्यवस्था की है . हमारा पिता ये नही चाहता कि हमको इन सब का पता चले क्यूकी वो सोचते है कि ये बात हमको मायने नही रखती , हमे सिर्फ पढाई ही मायने रखनी चाहिये. कोचिंग नही छूटती कभी मैथ की तो कभी इंग्लिश की ...तो कभी रीजनिंग की तो कभी साइंस की .....कभी रेल्वे के लिए तो कभी बैंक के लिए ..तो कभी एस एस सी के लिए. सबका कोर्स अलग अलग . कुछ लडके हर कम्पीटिशन की परीक्षा के लिए हर बार कोचिंग करते है . फीस 6000 से 25000/30000 पर हमको पता नही है पैसा कहा से आ रहा है . हमने तो बस पापा को बोला था . पापा कमरा का किराया देना है पापा मैथ की कोचिंग की फीस देनी है पापा खर्चा को पैसे खत्म होगे पापा पापा पापा...Always. और पापा के शब्द...बेटे कितने चाहिए. बेटा कहेगा 10000 बस. पापा कहेगा परसों डला दुंगा तो चलेगा . बेटा कहेगा पापा कल कोचिंग मे बैठने नही देगा टीचर. ठीक है बेटा दोपहर तक डला दुंगा.  दोपहर को फिस जमा हो जायेगी बेटे की अब बिना टेंशन के पढाई जारी रख सकेगा.
            कुछ वर्षो बाद जब बेटा कलेक्टर/कस्टम/जेइन/फईन/मास्टर/गैंगमेन/चपरासी कुछ भी बन जायेगा. पिता को लगेगा मेरा तो जीवन सफल हो गया . गाव मे मूंछो में ताव देकर घूमता है अब पिता क्यूकी उसको बेटे से जो उम्मीद थी पूरी कर दी .
              इन मूंछो के ताव को देखकर एक दिन जब बोहरा घर आता है कि ला अब तो गढ तोड दिया तेरे छोरे ने भाई म्हारा भी हिसाब कर लें . तब पिता कहता है कि हा भाई आओ कर लेते है बहुत शुक्रिया जो तुमने मेरा साथ दिया . हिसाब मे पता चलता है कर्जा 4 लाख/5 लाख/ 6 लाख /8 लाख जुडता है . बेटे को कहा जाता है कि बेटा पैसा देना है दूसरे का और बेटा के शब्द होते है - कौनसा पैसा . मैने तो अकेले खर्च नही किये पूरे. मै तो बस कुछेक लाख एडजस्ट कर सकता हूं खींच के .बाकी आप देख लो  . ये शब्द सुनकर बाप दिल बै़ठ जाता है . वो नि:शब्द हो जाता है .
                    अब उस कलेक्टर साब को क्या पता कि जो पैसे उसे भेजे जाते थे वो घर मे पेड से नही तोडे जाते थे. खेती मे इतना भी नही होता कि खाद बीज का खर्च चल सके . उसकी बीमार मां को जिन्दा भी तो आजकल की अंग्रेज़ी दवाईयो ने रखा है जो कितनी महंगी होती है उसे पता नही. उस बेटे को ये भी पता नही कि उसके छोटे भाई बहन को भी तो पढाया जा रहा है जिनका खर्च देने के लिए सडक पर कोई दान पेटी नही है . शायद उस बेटे को ये भी पता नही होगा कि 1 लाख रूपये का 3 साल मे 2 लाख हो जाता है जो कि 2 रूपिया प्रति सैकडा है तो वरना कुछ तो इससे भी ज्यादा मे बोहरगित करते है . और उसे शहर मे शानदार वक्त बिताते 5-8 साल हो जाते है . वो भूल जाता है वो महंगे महंगे कपडे वो शानदार एक हाथ लम्बा मोबाईल. परिवार की हर जरूरत पूरी की थी जितना कमा सकता था उससे घर का खर्च चला लेता था.  और क्या बताऊँ अब यार सब कुछ तो कह दिया.....

दुनिया मे पिता से बढा सलाहाकार; मार्गदर्शक; साथी; हर्षवर्धन करने वाला कोई नही होता ।
जिनके सर पर पिता का साया है वो भाग्यशाली है जिनके पर नही है उनको कामयाब व्यक्ति बनकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते है.

एक बात सीखी है जिंदगी मे ...कुछ भी करूगा पर ऐसा कुछ नही करूंगा जिससे पिता के दिल को ठेस पहुंचे. और गर्व है अब तक तो ऐसा नहीं किया.

और मै सिर्फ आज याद नही कर रहा रोज पिता को याद करता हूं . आज तो #असलियत लिखी है कुछ लोगो की .

उनको समर्पित है जिनके घर मे मूंसे ग्यारस कर रहे है और शहर मे R15 के पीछे भायेली बैठकर घूम री है ।

इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...