कैसा होता अगर तुम होती
सुबह की चाय मे मिठास ज्यादा होती?
दिन के सूरज मे तपन ज्यादा होती?
डाइनिंग टेबल पर एक प्लेट ज्यादा होती?
वो तुलसी का पेड़ मां की पसंद का है ,
इस आंगन मे एक फ़ूल मेरी पसंद का होता
कैसा होता अगर तुम होती
ये दिल घुटा घुटा सा ना रहता
ये नैन भरे भरे से ना रहते
ये हाथ बंधे बंधे से ना रहते
यू जीने की ललक खत्म ना होती
कैसा होता अगर तुम होती.
यू खुद पे इल्जाम ना लगा रहा होता
यू अपनो के बीच पराया सा ना रहता
यू बापू से हर बात पे नजरे ना चुरा रहा होता
मै तुझसे आंख मिला रहा होता
तुम मुझसे आंख मिला रही होती
कैसा होता अगर तुम होती.
सुबह की चाय मे मिठास ज्यादा होती?
दिन के सूरज मे तपन ज्यादा होती?
डाइनिंग टेबल पर एक प्लेट ज्यादा होती?
वो तुलसी का पेड़ मां की पसंद का है ,
इस आंगन मे एक फ़ूल मेरी पसंद का होता
कैसा होता अगर तुम होती
ये दिल घुटा घुटा सा ना रहता
ये नैन भरे भरे से ना रहते
ये हाथ बंधे बंधे से ना रहते
यू जीने की ललक खत्म ना होती
कैसा होता अगर तुम होती.
यू खुद पे इल्जाम ना लगा रहा होता
यू अपनो के बीच पराया सा ना रहता
यू बापू से हर बात पे नजरे ना चुरा रहा होता
मै तुझसे आंख मिला रहा होता
तुम मुझसे आंख मिला रही होती
कैसा होता अगर तुम होती.
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