#ashTag_तुम्हारे_बाद
कभी कभी चाहता हू कि अपने जीवन का हर पल हरेक क्षण पन्नों पर उतार दू एक फ़िल्म की स्क्रिप्ट की तरह और उसका किरदार बन जाऊ जिसमे कई सारे सह कलाकार होंगे । और वो भी । दरअसल जिन्दगी है ही एक लिखी हुई फ़िल्म की तरह । हम सिर्फ़ किरदार निभा रहे है अपना अपना । हर व्यक्ति उसके जीवन का मुख्य कलाकार है और उसके जानने वाले उसके जीवन की स्क्रिप्ट के सह कलाकार । इस जिंदगी की प्यारी और खूबसूरत सी कहानी मे कुछ मोड़ एसे भी आते है तब हम सोचते है कि ये तो लिखा ही नही था फ़िर कैसे हो गया या एसा ही लिखा था तो हमे पहले बताना चाहिए था हम यह रोल नही करते । कुछ इस तरह ही किरदार निभाते निभाते खुद किरदार एक दिन बूढा हो जाता है इस दुनिया की जटिल स्क्रीप्ट मे ।
दिल और इरादे साफ़ रखना मेरी फ़ितरत में हमेशा शामिल रहा है । पर उसका कुछ इस तरह रुखेपन से पेश आना रास नही आया था । शायद मै भी कही न कही गलत था । कुछ दिन तक एसे लग रहा था मानो सब कुछ खत्म सा हो गया है और इसीलिये कुछ दिन मै सारी दुनिया से अलग होना चाहता था बिल्कुल अकेले । कही जाना चाहता था जहा मुझे परेशान करने वाला कोई नही हो हालांकी मेरे वन बीएचके फ़्लैट मे अकेले पड़े रहने के अलावा मै कही जा नही पाया पर उसी मे दुनिया से कनेक्टिविटी तोड़कर सूकून तलाशा मैने कई दिनो तक । यार दोस्त घर परिवार रिश्तेदार सबसे दूर एक जीवन जीना चाहता था जिसमे मेरे और उसकी यादो के अलावा कोई ना हो । यहा तक की बाहर गली से आयी होर्न की आवाज भी चिड़चिडापन ला देती थी । मजाक मे कहू तो इतना अकेलापन ढूँढने वाला व्यक्ति सत्य की खोज मे निकलता है ।
जब इंसान को कुछ सूझता नही है या उसे समझ नही आता जिंदगी मे आगे क्या करना है या कुछ रास्ते जो जीने के बेहतरीन रास्ते थे उसकी नजर मे, जो बंद हो चुके है, एसी स्थिति मे अक्सर इंसान या तो अकेलापन ढूँढता है या मौत का इंतजार करता है , हो सकता है इंतजाम भी कर ले । जिन लोगो के लिये यह सब असहनीय होता है वो इंतजाम भी ढूँढ लेते है । इसका मतलब सीधा और साफ़ है कि वो जीना नही चाहते । हार मान ली है उन्होने इस ,प्रकृति की रहस्यमय रचना मे । जिसमे हर आदमी संघर्ष करता है पर उन्हे लगता है कि उनके जैसा संघर्ष कोई नही कर रहा या उनकी समस्याये बाकी लोगो से अलग है । जबकी इस संसार मे हर एक व्यक्ति की समस्याऎ हर दूसरे व्यक्ति से ज्यादा बडी है ।
कभी कभी चाहता हू कि अपने जीवन का हर पल हरेक क्षण पन्नों पर उतार दू एक फ़िल्म की स्क्रिप्ट की तरह और उसका किरदार बन जाऊ जिसमे कई सारे सह कलाकार होंगे । और वो भी । दरअसल जिन्दगी है ही एक लिखी हुई फ़िल्म की तरह । हम सिर्फ़ किरदार निभा रहे है अपना अपना । हर व्यक्ति उसके जीवन का मुख्य कलाकार है और उसके जानने वाले उसके जीवन की स्क्रिप्ट के सह कलाकार । इस जिंदगी की प्यारी और खूबसूरत सी कहानी मे कुछ मोड़ एसे भी आते है तब हम सोचते है कि ये तो लिखा ही नही था फ़िर कैसे हो गया या एसा ही लिखा था तो हमे पहले बताना चाहिए था हम यह रोल नही करते । कुछ इस तरह ही किरदार निभाते निभाते खुद किरदार एक दिन बूढा हो जाता है इस दुनिया की जटिल स्क्रीप्ट मे ।
दिल और इरादे साफ़ रखना मेरी फ़ितरत में हमेशा शामिल रहा है । पर उसका कुछ इस तरह रुखेपन से पेश आना रास नही आया था । शायद मै भी कही न कही गलत था । कुछ दिन तक एसे लग रहा था मानो सब कुछ खत्म सा हो गया है और इसीलिये कुछ दिन मै सारी दुनिया से अलग होना चाहता था बिल्कुल अकेले । कही जाना चाहता था जहा मुझे परेशान करने वाला कोई नही हो हालांकी मेरे वन बीएचके फ़्लैट मे अकेले पड़े रहने के अलावा मै कही जा नही पाया पर उसी मे दुनिया से कनेक्टिविटी तोड़कर सूकून तलाशा मैने कई दिनो तक । यार दोस्त घर परिवार रिश्तेदार सबसे दूर एक जीवन जीना चाहता था जिसमे मेरे और उसकी यादो के अलावा कोई ना हो । यहा तक की बाहर गली से आयी होर्न की आवाज भी चिड़चिडापन ला देती थी । मजाक मे कहू तो इतना अकेलापन ढूँढने वाला व्यक्ति सत्य की खोज मे निकलता है ।
जब इंसान को कुछ सूझता नही है या उसे समझ नही आता जिंदगी मे आगे क्या करना है या कुछ रास्ते जो जीने के बेहतरीन रास्ते थे उसकी नजर मे, जो बंद हो चुके है, एसी स्थिति मे अक्सर इंसान या तो अकेलापन ढूँढता है या मौत का इंतजार करता है , हो सकता है इंतजाम भी कर ले । जिन लोगो के लिये यह सब असहनीय होता है वो इंतजाम भी ढूँढ लेते है । इसका मतलब सीधा और साफ़ है कि वो जीना नही चाहते । हार मान ली है उन्होने इस ,प्रकृति की रहस्यमय रचना मे । जिसमे हर आदमी संघर्ष करता है पर उन्हे लगता है कि उनके जैसा संघर्ष कोई नही कर रहा या उनकी समस्याये बाकी लोगो से अलग है । जबकी इस संसार मे हर एक व्यक्ति की समस्याऎ हर दूसरे व्यक्ति से ज्यादा बडी है ।
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