शनिवार, 21 सितंबर 2019

बाहर अधूरा चाँद है

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

ये आँखो का रुंधन और
ठंड हवा की बेरुखी

रेगिस्तान से जीवन मे
वक्त का कालग्रह

अधूरा इतराता चाँद
और मेरे मन का रीत जाना

रामू काका की आवाज और
भूरी(बिल्ली)  का दिवार फ़ांद जाना

उसका मुस्कुराना याद आना
 मेरा फ़िर से दिल हार जाना

बालो मे महकती मेहन्दी
 किसी गुमनाम शहर की निशानी

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

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