बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी
ये आँखो का रुंधन और
ठंड हवा की बेरुखी
रेगिस्तान से जीवन मे
वक्त का कालग्रह
अधूरा इतराता चाँद
और मेरे मन का रीत जाना
रामू काका की आवाज और
भूरी(बिल्ली) का दिवार फ़ांद जाना
उसका मुस्कुराना याद आना
मेरा फ़िर से दिल हार जाना
बालो मे महकती मेहन्दी
किसी गुमनाम शहर की निशानी
बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी
और रात पूरी चाँदनी
ये आँखो का रुंधन और
ठंड हवा की बेरुखी
रेगिस्तान से जीवन मे
वक्त का कालग्रह
अधूरा इतराता चाँद
और मेरे मन का रीत जाना
रामू काका की आवाज और
भूरी(बिल्ली) का दिवार फ़ांद जाना
उसका मुस्कुराना याद आना
मेरा फ़िर से दिल हार जाना
बालो मे महकती मेहन्दी
किसी गुमनाम शहर की निशानी
बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी
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