#ashtag_तुम्हारे_बाद
उन दिनों मै हमारे कल वाले ख्यालो मे खोया रहता था । आज भी कुछ एसा ही है पर वो आने वाला हुआ करता था और ये वो जो गुजर चुका । उस वाले कल मे मिलने की आरजू थी इस वाले मे तुम्हारी यादे । अब जब भी उस गुजरे हुए कल की याद आती है तब याद आता है कि वो कल नही था असल मे तुम ही थी जो मेरे जेहन मे आसन लगाये बैठी है और पता नही कब तलक रहोगी । मै तुम्हे हटाना भी नही चाहुन्गा वहा से । जिंदगी के कुछ पल होते है जिन्हें इंसान अंतिम सांस तक नही भूलता । बेहतरीन पलो को आजीवन संजोये रखता है । एक कभी न खर्च होने वाली पूंजी की तरह । उस पूंजी को एक बडा तबका अचल सम्पति भी कहता है । पर सम्पति नही कह सकते क्युकि यह दुनिया छोड़ने के बाद विरासत बन जाती है जिसके हिस्से भी होते है । परंतु हमारी यादे हमारे साथ ही खत्म हो जाती है ।
कल ही की तो बात है कलम और तकिये मे ठन गयी थी । तकिया झेंपते हुये बोला " तुम उसके साथ मत रहो करो । जब से तुम साथ आयी हो उसने मेरा सहारा लेना छोड़ दिया है जैसे कि पहले वह मुझे कसकर पकडता था और कुछ ही पलो मे उसकी आँखें मुझे गीला कर देती थी । " पर मुझे लगता है कि तकिये को आँखो से मोहब्बत हो गयी । मतलब सब इश्क मे है । तभी कलम झल्लाती हुई बोली " तुमने सहारे के नाम पे बहुत आन्सू गिरवाये है उन आँखो से । अब जब वह लिखता है तो घिसती तो मै हू पर उसकी आंखों से दर्द का दरिया नही बहता । मै तुम्हारे पास कभी नही आने दुन्गी उसे । मै उसे तुम्हारी तरह दुखी नही देख सकती । "
उन दिनों मै हमारे कल वाले ख्यालो मे खोया रहता था । आज भी कुछ एसा ही है पर वो आने वाला हुआ करता था और ये वो जो गुजर चुका । उस वाले कल मे मिलने की आरजू थी इस वाले मे तुम्हारी यादे । अब जब भी उस गुजरे हुए कल की याद आती है तब याद आता है कि वो कल नही था असल मे तुम ही थी जो मेरे जेहन मे आसन लगाये बैठी है और पता नही कब तलक रहोगी । मै तुम्हे हटाना भी नही चाहुन्गा वहा से । जिंदगी के कुछ पल होते है जिन्हें इंसान अंतिम सांस तक नही भूलता । बेहतरीन पलो को आजीवन संजोये रखता है । एक कभी न खर्च होने वाली पूंजी की तरह । उस पूंजी को एक बडा तबका अचल सम्पति भी कहता है । पर सम्पति नही कह सकते क्युकि यह दुनिया छोड़ने के बाद विरासत बन जाती है जिसके हिस्से भी होते है । परंतु हमारी यादे हमारे साथ ही खत्म हो जाती है ।
कल ही की तो बात है कलम और तकिये मे ठन गयी थी । तकिया झेंपते हुये बोला " तुम उसके साथ मत रहो करो । जब से तुम साथ आयी हो उसने मेरा सहारा लेना छोड़ दिया है जैसे कि पहले वह मुझे कसकर पकडता था और कुछ ही पलो मे उसकी आँखें मुझे गीला कर देती थी । " पर मुझे लगता है कि तकिये को आँखो से मोहब्बत हो गयी । मतलब सब इश्क मे है । तभी कलम झल्लाती हुई बोली " तुमने सहारे के नाम पे बहुत आन्सू गिरवाये है उन आँखो से । अब जब वह लिखता है तो घिसती तो मै हू पर उसकी आंखों से दर्द का दरिया नही बहता । मै तुम्हारे पास कभी नही आने दुन्गी उसे । मै उसे तुम्हारी तरह दुखी नही देख सकती । "
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