रविवार, 1 सितंबर 2019

तुम्हारे बाद I

#ashtag_तुम्हारे_बाद
                                    कई दिनो बाद,  नहीं ..., महीनो बाद आज उसने कॉल किया था ।  उसके हैलो मे वो वाली बात नही लगी जो अभी तक लगती थी । हमेशा की तरह अपनेपन का नशा नही हुआ । इस थोड़ी बहुत गैरजरुरी कमी के महसूस होने पर दिल किया कि कॉल कट कर दू पर नही कर पाया । लेकिन मै झूँझलापन पर नियंत्रण नही कर पाया , पूछ रही थी क्या हुआ । अब मै कैसे उसे समझाता कि " तुम अपनी आवाज का मीठापन क्यू नही परोस रही"। शायद उसी की कमी के चलते मेरी जीव्हा का बर्ताव बदल रहा था । 
                                मेरे कानो ने हमेशा से उसकी आवाज को एक सच्चे मुसलमान का  अजान सुनने की तरह सुना है । आज इस आवाज मे हर रोज की तरह सलामती कि दुआ नही सुनाई दे रही थी । एसा लग रहा था मानो जिम्मेदारी निभा रही हो । क्या जरूरत है मत निभाओ ना जिम्मेदारी,  क्यू तकलीफ़ देती हो बेबजह खुद को ।  मै खुद की देखभाल कर सकता हू। ।  इस तरह अपनी आवाज मे बोझ क्यू ला रही हो मुझे वो ही पहले वाला हैलो चाहिए जिसमे तुम "हैलो " के ऑ की मात्र का उच्चारण एक लम्बे और पैनी धुन के साथ करती थी । तुम बात नही करना चाहती हो तो छोड़ दो ना,  जाने दो ।  वक्त लगेगा पर सब ठीक हो जाएगा ।  तुम शायद बाहर आ चुकी हो उस मोहब्बत के दल दल से।

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