शुक्रवार, 11 मई 2018

कहा खो गये हम

यूं वफा-ए-इश्क करते करते इतने करीब हो गये हम
जाने अनजाने  मे अपनो से दूर हो गये हम
राह-ए-मोहब्बत की उम्मीद-ए-अजल तक
पता ही नही चला कब मशहूर हो गये हम

एक परदेशी की डायरी: शहर

​कुछ शहर अक्षर देते हैं भाषा को, कुछ खोलते हैं संसार के कई आवरण। ​कुछ शहर केवल प्रतिध्वनि बनकर दोहराते हैं हमारा नाम। ​परंतु इन सबसे इतर... ...