शुक्रवार, 11 मई 2018

कहा खो गये हम

यूं वफा-ए-इश्क करते करते इतने करीब हो गये हम
जाने अनजाने  मे अपनो से दूर हो गये हम
राह-ए-मोहब्बत की उम्मीद-ए-अजल तक
पता ही नही चला कब मशहूर हो गये हम

इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...