#ashtag_तुम्हारे_बाद
यदी किसी की कद्र तुम जरुरत से ज्यादा करोगे तो उसके पास तुम्हारी भावनाओ का कत्ल कर दिया जाता है । तुम्हारी कद्र की महत्वपूर्णता उसके पास खत्म हो जाती है । शायद आसानी से मिलने वाली चीजो और अच्छे दिल के इंसान इन दोनो का ही वक्त कम ही है या है ही नही । मैने उससे कुछ भी तो नही कहा था फ़िर क्यू उसे फ़र्क नही पड़ता । कभी कुछ कहा ही नही, कुछ कहा होता तो शायद पड़ता । उससे पिछली मुलाकात हर बार की तरह शानदार नही रही थी । इस बार उसका रुखेपन वाला चेहरा देखा था मैने उस झूठी मुस्कान के पीछे । क्या लोग एक ही चेहरे को बहुत दिनो तक देखने से या एक ही तरह के इंसान से बहुत समय तक जुड़े रहने से बोर हो जाते है । इसलिये वो नये चेहरे नये लोग तलाशने के लिये पुराने बदल देना चाहते है । हर इंसान को उसके जीवन मे अनेको प्रकार के इंसान मिलते है जितने भी उसे अच्छे लगते है सबसे जुड़ना चाहता हैं इसी के उलट कुछ एसे भी होते है जिनको मिलते तो बहुत लोग है परंतु सारे जीवन मे गिने चुने, कुछेक , शायद आंकड़ा दहाई भी नही छू पाये, जुड़ पाते है या यू कहें कि जीवन मे ज्यादा उथल पुथल पसंद नही एसे लोगो को । हर रोज किसी से बात बेबात पे बहस करना । दरअसल दूसरी तरह के लोग सनकी होते हैं । इस प्रकार के लोग हमेशा अकेला रहना चाहते है.
मैने उसको कहा भी था कि कुछ मैने कह दिया हो तो मै उसके लिये माफ़ी मागता हू पर उसने इसे बड़ी खूबसूरती के साथ दरकिनार कर दिया जिसकी मुझे उससे तो कतई उम्मीद नही थी । मानो जैसे क्या फ़र्क पड़ता है । मेरे व्यक्तिगत जीवन मे मैने क्षमा शब्द बहुत कम उपयोग किया है। कभी दिल से लगा हो कि कहना चाहिये तब ही कहा है और किसी के मुंह से सुना है तो नजरन्दाज नही किया क्युकी यह शब्द कुछेक ही लोगो की जुबा से निकलता है जो शायद दिल के साफ़ होते है पर फ़िर भी मुझे इन्सान की परख करना नही आता । कभी महत्वपूर्ण ही नही समझा । शायद इसीलिये उसने कह दिया कि वह एसे लोगो की कदर नही करती जो कठोर दिल के हो । अब उसे कौन समझाये कि इस कठोर दिल के सोफ़्ट कोर्नर मे वो ही रहती है ।
यदी किसी की कद्र तुम जरुरत से ज्यादा करोगे तो उसके पास तुम्हारी भावनाओ का कत्ल कर दिया जाता है । तुम्हारी कद्र की महत्वपूर्णता उसके पास खत्म हो जाती है । शायद आसानी से मिलने वाली चीजो और अच्छे दिल के इंसान इन दोनो का ही वक्त कम ही है या है ही नही । मैने उससे कुछ भी तो नही कहा था फ़िर क्यू उसे फ़र्क नही पड़ता । कभी कुछ कहा ही नही, कुछ कहा होता तो शायद पड़ता । उससे पिछली मुलाकात हर बार की तरह शानदार नही रही थी । इस बार उसका रुखेपन वाला चेहरा देखा था मैने उस झूठी मुस्कान के पीछे । क्या लोग एक ही चेहरे को बहुत दिनो तक देखने से या एक ही तरह के इंसान से बहुत समय तक जुड़े रहने से बोर हो जाते है । इसलिये वो नये चेहरे नये लोग तलाशने के लिये पुराने बदल देना चाहते है । हर इंसान को उसके जीवन मे अनेको प्रकार के इंसान मिलते है जितने भी उसे अच्छे लगते है सबसे जुड़ना चाहता हैं इसी के उलट कुछ एसे भी होते है जिनको मिलते तो बहुत लोग है परंतु सारे जीवन मे गिने चुने, कुछेक , शायद आंकड़ा दहाई भी नही छू पाये, जुड़ पाते है या यू कहें कि जीवन मे ज्यादा उथल पुथल पसंद नही एसे लोगो को । हर रोज किसी से बात बेबात पे बहस करना । दरअसल दूसरी तरह के लोग सनकी होते हैं । इस प्रकार के लोग हमेशा अकेला रहना चाहते है.
मैने उसको कहा भी था कि कुछ मैने कह दिया हो तो मै उसके लिये माफ़ी मागता हू पर उसने इसे बड़ी खूबसूरती के साथ दरकिनार कर दिया जिसकी मुझे उससे तो कतई उम्मीद नही थी । मानो जैसे क्या फ़र्क पड़ता है । मेरे व्यक्तिगत जीवन मे मैने क्षमा शब्द बहुत कम उपयोग किया है। कभी दिल से लगा हो कि कहना चाहिये तब ही कहा है और किसी के मुंह से सुना है तो नजरन्दाज नही किया क्युकी यह शब्द कुछेक ही लोगो की जुबा से निकलता है जो शायद दिल के साफ़ होते है पर फ़िर भी मुझे इन्सान की परख करना नही आता । कभी महत्वपूर्ण ही नही समझा । शायद इसीलिये उसने कह दिया कि वह एसे लोगो की कदर नही करती जो कठोर दिल के हो । अब उसे कौन समझाये कि इस कठोर दिल के सोफ़्ट कोर्नर मे वो ही रहती है ।
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