#मद्रास_डायरी 3
स्टेशन पर उतरते ही मै सीधे ओफ़िस गया. मन मे वो ही चल रही थी स्वभाविक है इतने दिनो से अपने क्रश को मै सिर्फ़ देखता था और आज अचानक से उसने माहौल एसा बनाया कि मै खुद को बात करने से रौक नही पाया. लड़की एसी ही होती है. उनको अगर किसी से बात करनी है तो वो खुद माहौल एसा बनाती है कि लड़का अपने आप बात करने लगता है जब दूर रहना चाहती है तो उनके मन मे ख्याल तो क्या सामने खड़े आदमी की शक्ल भी नही दिखेगी कि है कौन सामने. लड़कियो को हर पल मिलने वाले लोग पता नहीं रहते लड़को को हर पल दिखने वाली हर लड़की कितने ही दिनो तक याद रह सकती है .अब इसे प्रकृति का नियम कहो या कुछ और.
" केदार, अदरक वाली चाय लेके आओ सबके लिये ओफ़िस मे. ' मैने ओफ़िस मे एक कर्मचारी को कहा जिसका काम सिर्फ़ चाय लाना ही है. अक्सर ओफ़िस आते ही चाय के लिये जाता है सो उसके लिये सामान्य था पर मैने तो आज अलग खुशी मे चाय मंगवाई है. पर यहा ये राज ही रहेगा . मेरा मन तो कर रहा है खुशी खुशी मे सोने की अशर्फ़िया बंटवा दे आज तो अपनी नगरी मे . मैने फ़िर अमृत भैया को फ़ोन मिलाया जो अगले दो स्टेशन छोड़ के तीसरे पर duty रहते हैं.
"गुड मोर्निन्ग भैया "
"मोर्निन्ग तो ठीक है पर ये बता आज आवाज अलग लग रही है. लोहागढ फ़तेह कर लिया क्या " मेरी आवाज मे खुशी महसूस करके वोले.
' Duty क्या है "
' जनरल '
' ठीक है आते हैं लेमन टी पीने चलेन्गे लंच में '
' ठीक है, पर सब ठीक तो है. '
' हा, सब ठीक है, बाकी मिलके बताते है. और वो मिट्टी का किला फ़तेह करके क्या अचार डालून्गा मै , किरकिरायेगा हम दोनो के मूह मे. मिलके बताते है, बाय!
सबको लग तो गया कि बंदा आज खुश हैं. पर वजह सिर्फ़ मुझे ही पता है.
' सर चाय ' केदार चाय ला चुका था पता ही नही चला.
' आज कृष्णा नही आया क्या, दिख नही रहा? '
'नही सर वो उसकी वाईफ़ को होस्पिटल लेके जायेगा' तीखी मुस्कान के साथ कहा. क्युकी हम सबको पता है कुछ दिनो मे पिता बनने वाला है वो रूटीन चेकअप के लिये गया होगा.
करीब बारह बजे अचानक मुझे कुछ याद आया और सिर झझोड के एक मुक्का जोर से टेबल पे मारा.
"ओ शिट , कट गया आज तो सुबह सुबह. " मेरे मुह से निकला. सुबह से खुश था पर अचानक से मुह उतर गया.
मैने फ़िर अमृत भैया को फोन लगाया.
"कहा हो भैया "
"स्टेशन, क्या हुआ... आवाज मे फ़र्क है. "
"बोला तो था आके बताता हू "
"अरे पर... " मैने फोन काट दिया इतने मे. और मै तुरंत अगली लोकल से दस मिनट मे पहुच चुका था उनके पास . दिमाग अचानक से एसे हो गया कि मुझे अब अन्दरूनी शान्ती की जरूरत थी जो मुझे इन्ही के पास आके मिलती है.
"आओ तेरा ही इंतजार था इस कुर्सी को सुबह से " अमृत भैया ने एक टूटी कुर्सी को मेरी तरफ़ खिसकाते हुये कहा. जब भी आता हूँ अक्सर यही बैठने को मिलती है. टिकट काउन्टर वाली ओफ़िस मे एक अतिरिक्त कुर्सी है वो ही काफ़ी है.
"हा सही है, वैसे भी इसी के लायक हू आज तो मै '"
"मैने सुना है मन मे घातक बात छुपाने से हार्ट अटैक जल्दी आते है. तू जल्दी बता हुआ क्या है. " उसने हसते हुये पूछा क्युकी मै उदास अक्सर एसी बातो पे ही हुआ जिन पर दूसरो को हसी आती है. फ़िर मैने पूरा माजरा बताया उन्होने एक जोर की थप्पी गुद्धी पे मारी और बोलने लगे
" क्या बात है छोरे , सुना तो है मैने कई बार तेरे मुह से उसके बारे और आज बात ही हो गयी. अच्छी बात है ये तो."
" भैया वो बोली आओ कोफ़ी पीने आज हमारे इधर और मैने हा कर दी "
"आये हाये एक दिन मे ही ? थोडा धीरे चलो बाबू "
"वो सब तो ठीक है भैया पर सोच रहा हु जाना कहा है "
"क्यू, इसमे सोचना क्या है "
"भैया , वो नम्बर तो देके ही नही गयी यार " मैने हरी घास सामने से हटा लेने पर बकरी की तरह मिनमिनाते हुये कहा.
" अवे पेवर...! कटवा आया सुबह सुबह आज तो.... ! "" और ये कहते कहते उन्होने एक दबा के घूसा चेप दिया पीठ पे जोर के ठहाके के साथ .
"समझ नही आ रहा तू भुलक्कड है या तुझमे हिम्मत नही है , जब वो भी खुश है तो तू नर्वस क्यू होता है और तू तो इतने दिन से चाहता है उसको "
" मैने कब कहा था मै उसको चाहता हूँ भैया, ..एवई क्यू बढा रहे हो बात को एक तो उसका नम्बर नही ले पाया और उपर से आप भी "
" हा नही चाहता इसीलिये तो उसकी जूतियो के डिजाइन से ले के उसके नेल पोलिश के रंग तक याद है तुझे, "
"आप तो बात को बढा रहे हो यार "
"हा अब ठीक है इतना दुखी क्यू हो रहा है रोजगार बाला आदमी और औरत दोनो ही रोज घर से निकलते है और वो तो जब से तुझे मिली है रोज ही निकलती है शनिवार रविवार को छोड़ के. "
"मतलब " मेरे समझ नही आया .
" अरे मेरी स्ट्रीट लाइट कल फ़िर आयेगी वो ओफ़िस , तब ले लेना नम्बर. इतना बिलबिला क्यू रहा है "
" हा यार मेरा ध्यान ही नही गया" मै ये बात को भूल ही गया था बिल्कुल कि कल फ़िर आयेगी महबूबा. खूब विराम दिया इन्होने मेरी आज कि विचलित मनोदशा को . एकदम से अब मन शान्त था. और फ़िर हम दोनो बकवास करते हुये लेमन टी पीने चले गये . जो हमारा लगभग रोज का काम है.
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स्टेशन पर उतरते ही मै सीधे ओफ़िस गया. मन मे वो ही चल रही थी स्वभाविक है इतने दिनो से अपने क्रश को मै सिर्फ़ देखता था और आज अचानक से उसने माहौल एसा बनाया कि मै खुद को बात करने से रौक नही पाया. लड़की एसी ही होती है. उनको अगर किसी से बात करनी है तो वो खुद माहौल एसा बनाती है कि लड़का अपने आप बात करने लगता है जब दूर रहना चाहती है तो उनके मन मे ख्याल तो क्या सामने खड़े आदमी की शक्ल भी नही दिखेगी कि है कौन सामने. लड़कियो को हर पल मिलने वाले लोग पता नहीं रहते लड़को को हर पल दिखने वाली हर लड़की कितने ही दिनो तक याद रह सकती है .अब इसे प्रकृति का नियम कहो या कुछ और.
" केदार, अदरक वाली चाय लेके आओ सबके लिये ओफ़िस मे. ' मैने ओफ़िस मे एक कर्मचारी को कहा जिसका काम सिर्फ़ चाय लाना ही है. अक्सर ओफ़िस आते ही चाय के लिये जाता है सो उसके लिये सामान्य था पर मैने तो आज अलग खुशी मे चाय मंगवाई है. पर यहा ये राज ही रहेगा . मेरा मन तो कर रहा है खुशी खुशी मे सोने की अशर्फ़िया बंटवा दे आज तो अपनी नगरी मे . मैने फ़िर अमृत भैया को फ़ोन मिलाया जो अगले दो स्टेशन छोड़ के तीसरे पर duty रहते हैं.
"गुड मोर्निन्ग भैया "
"मोर्निन्ग तो ठीक है पर ये बता आज आवाज अलग लग रही है. लोहागढ फ़तेह कर लिया क्या " मेरी आवाज मे खुशी महसूस करके वोले.
' Duty क्या है "
' जनरल '
' ठीक है आते हैं लेमन टी पीने चलेन्गे लंच में '
' ठीक है, पर सब ठीक तो है. '
' हा, सब ठीक है, बाकी मिलके बताते है. और वो मिट्टी का किला फ़तेह करके क्या अचार डालून्गा मै , किरकिरायेगा हम दोनो के मूह मे. मिलके बताते है, बाय!
सबको लग तो गया कि बंदा आज खुश हैं. पर वजह सिर्फ़ मुझे ही पता है.
' सर चाय ' केदार चाय ला चुका था पता ही नही चला.
' आज कृष्णा नही आया क्या, दिख नही रहा? '
'नही सर वो उसकी वाईफ़ को होस्पिटल लेके जायेगा' तीखी मुस्कान के साथ कहा. क्युकी हम सबको पता है कुछ दिनो मे पिता बनने वाला है वो रूटीन चेकअप के लिये गया होगा.
करीब बारह बजे अचानक मुझे कुछ याद आया और सिर झझोड के एक मुक्का जोर से टेबल पे मारा.
"ओ शिट , कट गया आज तो सुबह सुबह. " मेरे मुह से निकला. सुबह से खुश था पर अचानक से मुह उतर गया.
मैने फ़िर अमृत भैया को फोन लगाया.
"कहा हो भैया "
"स्टेशन, क्या हुआ... आवाज मे फ़र्क है. "
"बोला तो था आके बताता हू "
"अरे पर... " मैने फोन काट दिया इतने मे. और मै तुरंत अगली लोकल से दस मिनट मे पहुच चुका था उनके पास . दिमाग अचानक से एसे हो गया कि मुझे अब अन्दरूनी शान्ती की जरूरत थी जो मुझे इन्ही के पास आके मिलती है.
"आओ तेरा ही इंतजार था इस कुर्सी को सुबह से " अमृत भैया ने एक टूटी कुर्सी को मेरी तरफ़ खिसकाते हुये कहा. जब भी आता हूँ अक्सर यही बैठने को मिलती है. टिकट काउन्टर वाली ओफ़िस मे एक अतिरिक्त कुर्सी है वो ही काफ़ी है.
"हा सही है, वैसे भी इसी के लायक हू आज तो मै '"
"मैने सुना है मन मे घातक बात छुपाने से हार्ट अटैक जल्दी आते है. तू जल्दी बता हुआ क्या है. " उसने हसते हुये पूछा क्युकी मै उदास अक्सर एसी बातो पे ही हुआ जिन पर दूसरो को हसी आती है. फ़िर मैने पूरा माजरा बताया उन्होने एक जोर की थप्पी गुद्धी पे मारी और बोलने लगे
" क्या बात है छोरे , सुना तो है मैने कई बार तेरे मुह से उसके बारे और आज बात ही हो गयी. अच्छी बात है ये तो."
" भैया वो बोली आओ कोफ़ी पीने आज हमारे इधर और मैने हा कर दी "
"आये हाये एक दिन मे ही ? थोडा धीरे चलो बाबू "
"वो सब तो ठीक है भैया पर सोच रहा हु जाना कहा है "
"क्यू, इसमे सोचना क्या है "
"भैया , वो नम्बर तो देके ही नही गयी यार " मैने हरी घास सामने से हटा लेने पर बकरी की तरह मिनमिनाते हुये कहा.
" अवे पेवर...! कटवा आया सुबह सुबह आज तो.... ! "" और ये कहते कहते उन्होने एक दबा के घूसा चेप दिया पीठ पे जोर के ठहाके के साथ .
"समझ नही आ रहा तू भुलक्कड है या तुझमे हिम्मत नही है , जब वो भी खुश है तो तू नर्वस क्यू होता है और तू तो इतने दिन से चाहता है उसको "
" मैने कब कहा था मै उसको चाहता हूँ भैया, ..एवई क्यू बढा रहे हो बात को एक तो उसका नम्बर नही ले पाया और उपर से आप भी "
" हा नही चाहता इसीलिये तो उसकी जूतियो के डिजाइन से ले के उसके नेल पोलिश के रंग तक याद है तुझे, "
"आप तो बात को बढा रहे हो यार "
"हा अब ठीक है इतना दुखी क्यू हो रहा है रोजगार बाला आदमी और औरत दोनो ही रोज घर से निकलते है और वो तो जब से तुझे मिली है रोज ही निकलती है शनिवार रविवार को छोड़ के. "
"मतलब " मेरे समझ नही आया .
" अरे मेरी स्ट्रीट लाइट कल फ़िर आयेगी वो ओफ़िस , तब ले लेना नम्बर. इतना बिलबिला क्यू रहा है "
" हा यार मेरा ध्यान ही नही गया" मै ये बात को भूल ही गया था बिल्कुल कि कल फ़िर आयेगी महबूबा. खूब विराम दिया इन्होने मेरी आज कि विचलित मनोदशा को . एकदम से अब मन शान्त था. और फ़िर हम दोनो बकवास करते हुये लेमन टी पीने चले गये . जो हमारा लगभग रोज का काम है.
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