रविवार, 1 सितंबर 2019

तुम्हारे बाद N

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          सिगरेट का धुंआ उपर पंखे के हैंडल तक जा रहा था ।छत से टकराकर सब तरफ़ फ़ैल रहा था । हैंडल के चारो ओर हल्का धुआ । दूसरा कश पहले पेट मे फ़िर छत की तरफ़ मुह कर के छोड़ दिया । एक हाथ मे सिगरेट और दूसरे मे कोक, मेरा पसंदीदा ड्रिंक । कोक का अक्सर गोल्ड फ़्लैक के साथ कोम्बिनेशन होता है मेरे कमरे मे चाहे रात के  ग्यारह  ही क्यू ना बजे हो । इस हैंडल मे ये तार लगायी जाये जिस पर मेरी पैन्ट सूख रही है ज्यादा लम्बी है पर बंध सकती है । करीब डेढ़ से दो फ़ीट लम्बाई के बाद स्टूल से कवर हो सकती है बाकी लम्बाई । रस्सी या कपडा ठीक तरह से नही लग सकता तार की तुलना मे । गर्दन पर नील कुछ सेकंड मे ही छा सकती है । तार नही टूटेगा महज पचास पचपन किलो के वजन से । अरे मेरी आंखे गीली क्यू है ? आंखों पर ध्यान जाते ही पता नहीं क्यू खिड़की की तरफ़ मुह करके मैने सिगरेट से पर्दे मे एक छेद कर दिया । बाहर से ठन्डी हवा आ रही है । मै हॉल का दरवाजा खोलकर बाहर आया और ठन्डी हवा मे सीढीयो के उपर दिवार के सहारे खडा था । कोक पीता हुआ । सिगरेट जल चुकी थी । सिर्फ़ एक मे ही मुझे मेरी औकात पता चल जाती है । सिर घूमता है मेरा , फ़िर भी मै पीता हू खासकर रात को । खड़े खड़े सीढीयो पर बने खाँचे देख रहा था। तीन तीन लाईने । एक सीढ़ी मे छः टाईले ।  तीन मे कुल मिलाकर अठारह टाईल है । और  नौ लाईने । थोड़ी देर मे मैने खुद को पहले वाली सीढी पर बैठा पाया और पैर सबसे निचली पर रखे थे । घुटनो पर हाथ टेके हुये सिर नीचा किये । बाये हाथ की कलाई ठीक सबसे नीचली सीढी के खाँचे के उपर थी । कल मै टोपाज का ब्लेड बोक्स लेकर आया था सेविन्ग बनाने के लिये । उस पतले धागे जैसी धारदार ब्लेड से कलाई पर हल्के से स्लिप किया जाये तो सिर्फ़ बूदे गिरेन्गी या लगातार बहेगा खून । अगर लगातार बहा तो बायी तरफ़ पहले सीढी से बाहर निकलेगा उस पर बने खाँचे से बहकर,  क्यूकी मै ठीक बीच मे नही बैठा हू दायी तरफ़ ज्यादा हिस्सा है टाईल का।  शायद दायी तरफ़ खून बाहर गिरने से पहले मै ही नीचे गिर जाउ क्यूकी मुझमे पहले से ही कमजोरी है । खून उतना है ही नही जितना एक वयस्क आदमी मे होना चाहिए । मेरी नस हल्की नीली दिख रही है शायद सबकी दिखती है । ये देखो इसके उपर का उभरा हुआ हिस्सा जिससे  बचपन मे हाथ मे थप्पी देकर ये बता देते थे कि किसने कितनी रोटी खाई है ।
         कोक कब की हाथ से गिर चुकी थी ।  बारिस की बूंदे चेहरे पर आंसूओ की बूंदो को बहा लायी जो आँखो से ठीक से निकले नही थे.  झमाझम बूंदे चेहरे पर पड़ने लगी तो देखा कि रात के साढे बारह बज चुके है और कमरे से नुसरत फ़तेह अली खान साब के "मेरे बाद किसको सताओगे " लिरिक्स सुनाई दे रहे है. पहले थी पर अब मुझे तुमसे कोई उम्मीद नही है ना ही  तेरे लौटाने के इंतजार के लिये वक्त.

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