शुक्रवार, 17 मई 2019

मद्रास डायरी 2

मद्रास डायरी 2

उसके इस तरह मुस्कुराने से मै पोजीटिव फ़ील कर रहा था सोचा क्यू ना बात की जाये मोहतर्मा से,  वैसे भी जीवन मे कोई बकवास करने वाली है नही. 
"आप कहा काम करती है?" मैने पूरे कोन्फ़ीडेन्स के साथ आगे बात बढ़ाते हुये कहा . 
"यही.  मुंडकम्मनकोईल के पास है  IT कम्पनी है उसमे काम करती हू.!" उसने सहजता से जबाब दिया.  मै एक दफ़ा उसको देखता और फ़िर मोबाईल मे. भगवान लड़कियों को खूबसूरत बनाके क्या दिखाना चाहता है. लड़के तो मानो कोई सीमेन्ट फैक्टरी  मे मैनुफ़ैक्चर किये जाते हैं मृत्यु लोक मे ही! जलन होती है.  मद्रास मे गोरी लडकी देखके. जब उनको गिरना कलूटो की बाहो मे ही है तो गोरा बनाकर हमे क्यू जलाते हो. 
""आप नोर्थ से है ना?" उसने मेरे विचार कुरेदते हुये कहा . ये सवाल घर से दूर होने का एहसास करा गया. मैने  हा मे सिर हिलाया और उसने जरा से होठ हिला के पता नहीं क्या कहा पर लगा कि बढिया ही कहा होगा कुछ.
फ़िर हमने कुछ और बाते इधर उधर की शेयर की कुछ वो अपनी जोब के बारे मे बता रही थी कुछ मै अपनी भारतीय रैल की सेवा मे तत्परता के वारे मे बता रहा था.
सटेशन आने वाला था मेरा. मैने बैग सम्भाला और उतरने को रेडी हुआ ही था कि उसने पुछ लिया.
""आपका नाम क्या है?  "" उसने पूछा.  मखै लो बन्दी को अब तक नाम पता नहीं है. 
"""जी,  रिन्कू...  रिन्कू मीणा . ""
""आज आफ़्टरनून मे क्या कर रहे हो. """
"" कुछ नही, थोडा काम है  आधा एक घंटे का फ़िर फ़्री हू. "'
""तो आज आओ उधर घूमने कोफ़ी पिलाते है आपको. "" उसने एकदम अपने अलग अन्दाज मे कहा. एक ख्याल तो आया ये तो पद्मावत ने खिलजी को चाय पे बुलाया है. 
""बिल्कुल आते हैं.  आप बुलाये और हम नही आये ये तो बात की तौहीन हो जाउगी.  ""मैने उतावलेपन से कहा.  कोफ़ी का ओफ़र बाईगोड चलते हैं  3 बजे के आसपास शाम को घर वापस साथ साथ चलेन्गे.  मै पूरा प्लान चुका था.  मै सटेसन पर उसको बाय करके उतर गया आने का वादा भी देकर के. 
आज ... Cont.

कोई टिप्पणी नहीं:

इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...