बुधवार, 29 जनवरी 2020

जर्नी

#जर्नी

जन शताब्दी मे ईत्ती भीड़ मैने कभी ना देखी .
भाईसाब पैरो ने मना कर दिया फ़रीदाबाद आते आते तो कि हम खड़े ना रह रहे अब , थक चुके है पूरी तरह.  तार तार हो चुकी है जाँघ और पींढी की सब नसें . बड़ी माथापच्ची के बाद निजामुद्दीन तक खड़े रहने को राजी हुई. तारा भाई बोल रहे है निजामुद्दीन पर Metro नही है बस से आना पड़ेगा मखै ना .  अपुन को Metro मालिश मान्गता है आज . बाहर चेक किया तो गेट के बाहर Metro , यार आप अब झूट भी बोलते हो.

Metro Station पर फ़र्श पर बने ये येलो/मैजेंटा कलर के पग आपको एैसे ले जाते कि अगर आपने इनसे पैर हटा लिया तो दिल्ली Metro की गारंटी नही है कि Destination पर तुम पहुच ही जाओ.  अपनी रिस्क है तुम्हारी.  मै ये ही सोचकर पग पे पग रखकर चल रहा था लोग मुझे देख रहे थे कि बंदा लगा के आया है या... 😜.   इत्ते मे  येलो पग की कतार के बीच मे  डिवाईडर आ गया. 

- मखै हटाओ इसको मै खो गया तो. 
सिक्यूरिटी वाला बोला -
सर आप इधर से आ जाओ .
-अबे जब उधर से जाना था तो ये पग बिना घुन्घरू के इधर से क्यू निकाले उधर से ही निकालते ना. 
बोला -
सर केजरीवाल की गलती नही है  कांग्रेस थी  सत्तर साल से. 
मखै -
तुम भेन्चो अब  ये  लाईन लाईन  खेलने  केजरिवाल को बुलाओगे. अच्छा खासा चल रहा है उसका मेमे मार्केट उसे परेशान क्यू करना.
ठीक है उधर होकर निकल लुंगा मै तो पर ये ठीक बात नहीं है भाईसाब.
पैसेंजर को तो उल्टा गुमराह ये एक हाथ चौड़े पग कर रहे है. और एक बात बताओ. ये इतने  चौड़े पैर किसके होते है भई. आम इंसानो के तो होते नही.  राहुल गांधी का पता नहीं. 
- सर राहुल गांधी भी आम आदमी ही है.
- यार  तुम फ़िर केजरिवाल को बीच मे ला रहे हो.
-सर वो तो आप लेकर आये थे. 
-चल छोड़ अब तू ये छ महीने से कार्ड यूज नही किया चलेगा.
-सर दौड़ेगा आप की ही सरकार है.
-साले फ़िर तू केजरिवाल को घसीट रहा है तुझसे तो मुह लगना ही बेकार है.
जैसे तैसे T3 आ गया मै. इधर बाहर निकलते टाइम लेफ़्ट मे दिख गया पिछली बार जिसे टिकट काउन्टर समझा था वो दारु का ठेका निकला था. ठेका तो ठेका ही होता है चाहे सोने की छड़ो के पीछे हो या लोहे के सरीयो के पीछे. गैप हाथ घुसाने और एक बोतल बाहर निकल सकने लायक ही रहेगा.

भाईसाब इतना बडा Airport है कुछ दिन पहले अखबार मे पढा था कि दुनिया के पांच सबसे व्यस्त Airport मे है. ये ध्यान आते ही फ़ीलीन्ग अमीरपणा . इत्ते मे पापा का कॉल आ गया.
- पैसे डाल देना कतई चाय पीवे कू भी नही है.
अकाउंट चेक किया  चार सौ पचपन थे भाईसाब. मखै -
पापा मै नही खेल रहा यार. कल तनखा आयेगी तब देखते हैं.  सडनली फ़ीलीन्ग दुनिया का सबसे बडा गरीब. मन किया यही कटोरा लेके बैठ जाऊ.
 अंदर आने के लिये गेट मे घुसने लगा तो सिक्युरिटी वाला बोला -
 लाला Pass वाले निकलै यामे होके.  तू पीछै वाली लाईन मे लग के निकल.
- कतई जाट लग रहा था हरियाणा का मखै यही मारेगा कै भई.

मिडिल क्लास वालो की ये ही प्रोब्लम  है. पढ़ा भी नही जो लिख रहा था. जैसे तैसे अंदर आ गया. चेक ईन तो नयी दिल्ली करा ली इस बार.   वही दे दिया कोथडा अपना.  इधर सीधे अंदर ही घुसना है.
इस बार गेट सिक्युरिटी चेकिन्ग पर पूरा लिखा हुआ पढ़ा फ़िर एक ट्रे लेके सामान रखा उसमे. दो फोन,  पावर बैंक, डाटा केवल, बेल्ट,  पर्स फ़िर सरका दिया एक बोल रहा था -
भाईसाब आपमे ज्यादा वजन है या इनमे. 
मैने कहा
-भाई तेको क्या लगता है.
इतने मे मच्छर मारने के रैकेट को इधर उधर घुमा के SI बोला कि -
Level U ना रखी लाला ट्रे मे, 
-उरे...  तभी मै सोचू ट्रे मे जगह खाली कैसे रह गयी थोड़ी सी .  पहले जो वजन की पूछ रहा था वो देखकर मुस्कुराया कि लाला का बस ना चला वरना गोज्या मे ही कम्पोटर धर के लाता ये पक्का.
यहा आके लग रहा था देश बडा खूबसूरत है अपना. हर तरफ़ आग लगी पड़ी है भाईसाब. पर अमीर लोगो मे गरीबी देखनी हो तो या तो CP या airport आओ. विभिन्न प्रकार की गरीबी देखने को मिलेगी.
सीट तो window है पर बीच की चार सीट आर पार खाली है.  उधर लास्ट मे ताऊ बैठे है. इतनी सिन्गलता तो गान्धी की जिन्दगी मे भी ना थी जितनी मेरी मे है आजकल . उपर से एयर होस्टेज  Male है आज. रात मे Male एयर होस्टेज  का मतलब समझते हो ?. मतलब कुछ नही है मुझे अपनी किस्मत पर भरोसा है.  देखने का सुख भी ना देती मुझे तो कि जी भर के देख लिया तो अनर्थ हो जायेगा मानो. जबकी किस्मत को खूब पता है कि हाथ में कोई दोष नही है मेरे मे. आंखों को मै कंट्रोल मे रखता हु फ़िर भी.
" कृपया बैठे हुये कुर्सी की पेटी बांधे रखिये " मै ढूँढ रहा हू पर मिल नही रही है. इतने मे वो ही Male आया  और बोला सर सीट बेल्ट लगा लो प्लीज.  पेटी क्यू बोलते हो सालो हमे सूट ना करते ये वर्ड.  हमे बेल्ट ही चाहिए.
और ये लिखते लिखते चेन्नई आ गया भाईसाब.  मखै मात्र तीन हजार खर्च करके  तीस घंटे बचा लिये लाला. पर अभी चार सौ और देने है रात को लोकल ना मिलेगी घर तक. पैसा डॉलर के बराबर होता तो मै सिक्को मे खेलता भेन्चो एक एक रुपया के मे .😂😂

#दिल_जयपुरी

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