बुधवार, 29 जनवरी 2020

सपनो की बली

जिस उम्र मे एक व्यक्ति सपने देख और समझ सकता है, सम्पूर्ण उर्जा के साथ पूरा करने का प्रयत्न कर सकता है, लीक से हटकर करना चाहता है, उम्र का वह हिस्सा पढ़ाई और रोजगार की तलाश मे खत्म हो जाता है. मानता हूं पढ़ाई जरुरी है रोजगार भी जरुरी है. पर आपको ये भी मानना पड़ेगा कि सपने दबाना मतलब खुद के साथ ही कही न कही नाइंसाफ़ी है . एक युवा का सिर्फ़ सरकारी या प्राइवेट नौकरी करना ही सपना नही हो सकता. जिनका होता है उनका जीवन बीत जाता है बस पर कुछ कम मात्रा मे ही एसे होते है.  ज्यादातर लोग कुछ करना चाहते है जीवन मे जिससे उनके मन को संतुष्ट कर सके वो.  हर सरकारी नौकर ने ख्वाहिशे दाव पर लगाई है मजबूरियो को गिनकर या फ़िर वो ख्वाहिशो को जिन्दा रखना नही जानते. रोजगार के बाद सब कम्फ़र्ट जोन मे चले जाते है और ये एक एसा जोन है जिसमे जाने के बाद सिर्फ़ वो ही बाहर आ सकता है जिनको जिन्दगी से किक चाहिये. जो सोचते हैं बहुत खेल लिया जिन्दगी ने हमसे चलो अब हम जिन्दगी से खेलते है. अक्सर एसे लोगो को मंदबुद्धि कहते है. बाद मे पता चलता है कि उस बंदे ने कुछ एसा कर दिखाया कि हम सोच भी नही सकते. अपनी उर्जा की शक्ति पहचाना बड़ी बात है.  उससे बड़ी बात है उस पर रिस्क लेना . जो ले लेता है वो जीत जाता है या हार भी जाता है ये अलग बात है पर उसके लिये हिम्मत दिखाना बड़ी बात है. हर कोई रिस्क लेने से डर जाता है इसीलिये कम्फ़र्ट जोन से बाहर कोई नही आता. क्यूकी उससे बाहर हमेशा रिस्क है. लाईफ़ मे कुछ होगा या नही होगा ? जोब तो जिंदगीभर रहेगी पर सिर्फ़ गिटार बजाने मे फ़्यूचर कहा है? या फ़िर बिजनेस की सोचने वालो के दिमाग मे आता है चलेगा या नही ? बगैरा...

परंतु...  ये भी सच है कि....
जिसको  बिजनेस खडा करना है वो वो ही करके रहता है चाहे कुछ भी उसे करना पड़े उसके लिये,  जिसको राजनिति मे जाना है वो जरुर जाता है कितनो ने अच्छी खासी सरकरी नौकरी छोड़ दी इसके लिये, जिसको समाज सेवा करनी है वो जरुर करता है बिना किसी भेदभाव और मतलब के,  जिसको V Prodection की तरह सपने देखना है वो सपने देखता भी है पूरा भी करता है और एसे लोगो को ना तो कोई रोक पाता है ना ही ये अपने आरामदायक जीवन की कल्पना करते, ना ही सोसाईटी की बातो से फ़र्क पड़ता है और ना ही रिस्क लेने से डरते है. अंत मे विजयी सफ़लतम व्यक्तियो मे गिनते है फ़िर एसे लोगो को वो जिन्होने अपने कम्फ़र्ट जोन वाला कमरा नही छोड़ा कभी असफ़ल होने के डर और रिस्क नही लेने की कमजोरी से.

कहने का मतलब आज भी वो ही है जो कल था कि जो करना है ना, वो कर लीजीये वरना साँसे तो कम होती ही जा रही है एक दिन खत्म भी हो जायेंगी. कम स कम मलाल तो नही रहेगा. जीवन मे आत्मसंतुष्टी बहुत ज्यादा गहराई वाली बात हो जाती है जो कम लोगो को ही मिलती है.

#दिल_जयपुरी

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