बात 2008 की है मैं जब 9th मे था. एसे ही एक दिन लंच मे घर से खाना खाकर आए हम. घर के पास ही स्कूल हुआ करता था तो घर ही खाने आ जाते थे टिफिन साथ मे लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी. वापस आते टाईम हम कई दोस्त साथ मे आ रहे थे. मैं और एक दोस्त थोड़े से पीछे रह गए क्युकी हम धीरे धीरे चल रहे थे बाकी से तो पता नहीं क्यु एसे ही मेरे मन मे कुछ आया और मैं दोस्त से बोला कि यार ऐक्टर बनने के लिए क्या ज़रूरी है मतलब कोई अभिनेता बनना चाहे तो उसके पास क्या होना मायने रखता है. उस वक़्त इतनी समझ हममे नहीं हुआ करती थी बस इतना ही थी स्कूल से घर घर से स्कूल यही जिंदगी हैं और फ्री टाईम मे घर मम्मी-पापा से छुपा के दोस्तों के साथ खेलना क्युकि किसी भी पैरेंट्स को बच्चों का खेलना बिल्कुल पसंद नहीं होता था गाव में क्युकी उनका मानना था कि ये बस पढ़े लिखे अच्छे आदमी बने यू खेलने के पीछे कहीं किताबों से मन ना भटक जाए. तो वो दोस्त बोला कि देख ऐक्टर बनने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि पैसा हो आदमी के पास और दूसरा सबसे जरूरी है बॉलीवुड मे दो चार पक्के मित्र या रिश्तेदार हो जो काम दे दे फिल्म बगैरा मिल सके और तीसरी जो है वो ये बात है कि उसपर ऐक्टिंग आनी चाहिए. मुझे ये पता नहीं था कि मैं क्यू पूछ रहा हू बस एसे ही पूछ लिया कि ये लोग कैसे वहा तक पहुचते होंगे बिल्कुल एक एसे सवाल की तरह जिसका बस जवाब जानना होता है जैसे हिन्दी के टीचर को इस बात से मतलब नहीं है कि याद समझ के किया या रटंत विद्या चलाई है. जवाब मुझे मिल गया था पर मन ये फिर इसी जवाब से एक और सवाल पैदा हो गया कि इसने ऐक्टिंग को तीसरे नंबर पर क्यू रखा. खैर उस उमर मे इतना जवाब मिल गया काफी था पर मैं इस पैदा हुए सवाल को आज तक नहीं भूला शायद ये बात मुझे इसी सवाल की वज़ह से याद है.
अब जब सिल्वर स्क्रीन पर पंकज त्रिपाठी नवाज भाई जैसे अभिनेता दिखते है जिन्होंने खानदानी अभिनेताओं की वाट लगा रखी है तो समझ आता है कि ना पैसा चाहिए ना रिश्तेदार जो काम दिला सके सिर्फ टैलेंट चाहिए. काम तुम्हारे पास खुद चलकर आयेगा. दूसरा बात ये भी कि जो करना है ना, वो कर डालो. चाहो जो भी करना हो. पैसा काम दिला दे जरूरी नहीं है पर मेहनत का वक़्त जरूर आता है.
#दिल_जयपुरी
अब जब सिल्वर स्क्रीन पर पंकज त्रिपाठी नवाज भाई जैसे अभिनेता दिखते है जिन्होंने खानदानी अभिनेताओं की वाट लगा रखी है तो समझ आता है कि ना पैसा चाहिए ना रिश्तेदार जो काम दिला सके सिर्फ टैलेंट चाहिए. काम तुम्हारे पास खुद चलकर आयेगा. दूसरा बात ये भी कि जो करना है ना, वो कर डालो. चाहो जो भी करना हो. पैसा काम दिला दे जरूरी नहीं है पर मेहनत का वक़्त जरूर आता है.
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