#दिल_का
जब महसूस होता है कि तुम्हारा किसी के प्रति बहुत सारा प्यार उसके द्वारा छोटे छोटे हिस्सों मे बाटां जा रहा है या फ़िर जो मोहब्बत पहले थी, पहले मतलब अभी कुछ कल शाम तक , उसके बिखरने जैसा लगता है तो तुम सबकुछ सम्भालना चाहोगे कि कुछ भी तितर बितर ना हो. वरना मोहब्बत, प्यार , अपनापन एक एसी चीज है कि समेट पाना मुश्किल होता है हो सकता है ताउम्र समेट भी ना पाओ. मैने कभी नहीं सोचा कि इस तरह का बदलाव एक ही शाम मे आयेगा. आज लग रहा है कि या तो मै गलत हू या वो क्यूकी एक तो गलत होता ही है हमेशा , या फिर , हो सकता है नासमझ हो उसकी. जो भी है खोना मुझे नही आता क्यूकी हर इंसान को मोहब्बत देना मेरे वश की बात नही है लेकिन जिसको की है उसे दूर कर देने की ताकत भी मुझमे नही है चाहे पहल मे वो जो भी करे मुझे अपनो के वार सहने की आदत है . किसी न किसी रूप मे सहता आ रहा हू लम्बे समय से.
बदलाव मतलब कल तक जो जिद करे किसी बात पे आज अचानक से सहमत हो जाये ये तो आसान नहीं था उसके लिये फ़िर क्यू. सीधा सा हिसाव है मन में कुछ तो बैठ गया है या तो मेरा मजाक या हालातो की समझ हो गयी है. दोनो मे से जो भी है मुझे पसंद नही. जिस तरह दिमाग मे बैठी नकारात्मकता अच्छी नही लगती ठीक उसी प्रकार मै ये भी कबूल नही पाउन्गा कि वो जिद्दीपना छोड़कर इनोसेन्ट बन जाये. क्यूकी मुझे उसी मे पसंद है वो. मुझे वही अवतार पसंद है उसका. मुझे वही बचपना पसंद है उसमे. मुझे वही बात बात पे लड़ना पसंद है. एसे होते है हमारे जीवन मे बहुत सारे अपने जिनका अच्छा बन जाना हमे अच्छा नही लगता बिल्कुल वैसे ही जैसे अच्छे लोगो का बुरा बन जाना पसंद नही आता.
किसी जमीन की प्रकृति को दो भागो से समझ सकते है . एक थोडा उँचा वाला भाग जहा पानी रुक नही पाता और नीचा भाग जहा जाकर भर जाता है. एक ही जमीन पर एक ही प्रकार के बीजो मे जब आधे बीज नीचे बहकर चले जाते है इस तलाश मे कि पानी ज्यादा मिलेगा शायद तो वो सुखी रहेंगे या खुश रहेंगे. ये जमीन के दो भागो की ही तरह बंट जाते है. उँचाई पर उगे पौधे हष्ट पुष्ट रहते और नीचे वाले रहते तो ज्यादा पानी मे है पर उपर अच्छी सेहत दिखती है जबकी नीचे सड़ जाते है ज्यादा पानी की वजह से जिसे वो किसी से बयां भी नही कर पाते क्यूकी बाकी से अलग हुये थे. ठीक इसी प्रकार उन्चाई वाले अच्छे लोग अपने हो जाते है और नीचे वाले बुरे अपने हो जाते है जिन्होने खुद रास्ता चुना होता है जिनको शायद अपना कहना भी गलत लगता है एक दिन .
मै अपनी जिन्दगी मे किसी अपने को इतनी आसानी से नीचे बहकर नही जाने देता. रोक लेना अच्छी बात है क्यूकी फ़िर जुड़ पाना भी सम्भव नही हो पाता है कभी कभी. जुड़े रहने की कोशिश करनी चाहिए . उसके लिये कुछ गवाना पड़े तो फ़र्क नही पड़ता. हम वस्तुये गवा सकते है वापस मिल जाती है पर अपनापन गवा दिया तो वापिस नही मिल पाता. मिल भी जाता है तो उस स्तर का कभी नही मिल पाता जिस स्तर का खोने से पहले होता है .
#दिल_जयपुरी
जब महसूस होता है कि तुम्हारा किसी के प्रति बहुत सारा प्यार उसके द्वारा छोटे छोटे हिस्सों मे बाटां जा रहा है या फ़िर जो मोहब्बत पहले थी, पहले मतलब अभी कुछ कल शाम तक , उसके बिखरने जैसा लगता है तो तुम सबकुछ सम्भालना चाहोगे कि कुछ भी तितर बितर ना हो. वरना मोहब्बत, प्यार , अपनापन एक एसी चीज है कि समेट पाना मुश्किल होता है हो सकता है ताउम्र समेट भी ना पाओ. मैने कभी नहीं सोचा कि इस तरह का बदलाव एक ही शाम मे आयेगा. आज लग रहा है कि या तो मै गलत हू या वो क्यूकी एक तो गलत होता ही है हमेशा , या फिर , हो सकता है नासमझ हो उसकी. जो भी है खोना मुझे नही आता क्यूकी हर इंसान को मोहब्बत देना मेरे वश की बात नही है लेकिन जिसको की है उसे दूर कर देने की ताकत भी मुझमे नही है चाहे पहल मे वो जो भी करे मुझे अपनो के वार सहने की आदत है . किसी न किसी रूप मे सहता आ रहा हू लम्बे समय से.
बदलाव मतलब कल तक जो जिद करे किसी बात पे आज अचानक से सहमत हो जाये ये तो आसान नहीं था उसके लिये फ़िर क्यू. सीधा सा हिसाव है मन में कुछ तो बैठ गया है या तो मेरा मजाक या हालातो की समझ हो गयी है. दोनो मे से जो भी है मुझे पसंद नही. जिस तरह दिमाग मे बैठी नकारात्मकता अच्छी नही लगती ठीक उसी प्रकार मै ये भी कबूल नही पाउन्गा कि वो जिद्दीपना छोड़कर इनोसेन्ट बन जाये. क्यूकी मुझे उसी मे पसंद है वो. मुझे वही अवतार पसंद है उसका. मुझे वही बचपना पसंद है उसमे. मुझे वही बात बात पे लड़ना पसंद है. एसे होते है हमारे जीवन मे बहुत सारे अपने जिनका अच्छा बन जाना हमे अच्छा नही लगता बिल्कुल वैसे ही जैसे अच्छे लोगो का बुरा बन जाना पसंद नही आता.
किसी जमीन की प्रकृति को दो भागो से समझ सकते है . एक थोडा उँचा वाला भाग जहा पानी रुक नही पाता और नीचा भाग जहा जाकर भर जाता है. एक ही जमीन पर एक ही प्रकार के बीजो मे जब आधे बीज नीचे बहकर चले जाते है इस तलाश मे कि पानी ज्यादा मिलेगा शायद तो वो सुखी रहेंगे या खुश रहेंगे. ये जमीन के दो भागो की ही तरह बंट जाते है. उँचाई पर उगे पौधे हष्ट पुष्ट रहते और नीचे वाले रहते तो ज्यादा पानी मे है पर उपर अच्छी सेहत दिखती है जबकी नीचे सड़ जाते है ज्यादा पानी की वजह से जिसे वो किसी से बयां भी नही कर पाते क्यूकी बाकी से अलग हुये थे. ठीक इसी प्रकार उन्चाई वाले अच्छे लोग अपने हो जाते है और नीचे वाले बुरे अपने हो जाते है जिन्होने खुद रास्ता चुना होता है जिनको शायद अपना कहना भी गलत लगता है एक दिन .
मै अपनी जिन्दगी मे किसी अपने को इतनी आसानी से नीचे बहकर नही जाने देता. रोक लेना अच्छी बात है क्यूकी फ़िर जुड़ पाना भी सम्भव नही हो पाता है कभी कभी. जुड़े रहने की कोशिश करनी चाहिए . उसके लिये कुछ गवाना पड़े तो फ़र्क नही पड़ता. हम वस्तुये गवा सकते है वापस मिल जाती है पर अपनापन गवा दिया तो वापिस नही मिल पाता. मिल भी जाता है तो उस स्तर का कभी नही मिल पाता जिस स्तर का खोने से पहले होता है .
#दिल_जयपुरी
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