कही तो हमारा मिलना होता
किसी कहानी मे ही सही ...
पर मै भी आज तक एसी कोई कहानी भी नही लिख पाया जिसमे मिलना तय हो. हर जगह बिछडना क्यू लिख देता हूँ खुद पता नही. कोशिश करुन्गा यदी आगे कोई प्रेम पर कुछ थोड़ा बहुत लिख पाया तो. भावनाये लिख कर ही सही काल्पनिक तौर पर ही सही पर एकबारगी तो महसूस कर सकून्गा वो सब जो असल मे नही कर पाया कभी. जो मै करना चाहता था जैसा मै जीना चाह रहा था जैसा मै साथ रहने का ख्वाब पाले हुये था वैसा सब ...अब बस कहानियों मे ही जी सकता हू.
जीवन का कोई भी हिस्सा हम दुबारा नही जी सकते बिल्कुल गुजरे वक्त के माफ़िक वापिस नही आता कुछ भी. जैसे बचपन को दुबारा जीना हो तो यादो के सहारे हम बस महसूस कर सकते है. कोई बेहद दिल के करीब किस्सा हमारे साथ उसी तरह हो जिस तरह पहले हुआ था इत्तेफाक होगा और इत्तेफाक जीवन मे कम ही होते है. इक उम्र होती है जब इंसान प्यार मे जी रहा होता है वह जिन्दगीभर उसी मे जीना चाहता है. वह चाहता है आज जो सब उसके पास है वह आजीवन रहे पर अक्सर ही होता है एसा कुछेक भाग्यशाली लोगो के साथ वरन ज्यादातर के साथ उसके जीवन के सुखद पल छीन लिये जाते है. प्रकृति का नियम थोडा अटपटा लगता है तब कि हम जो चाहते हैं वह होता क्यू नहीं है जिन्दगीभर हमे संघर्ष क्यू करना पड़ता है क्या आराम की जिन्दगी जीना गुनाह है और आराम का मतलब यहा सिर्फ़ इतना सा है कि जिसके साथ जीने का मन हो उसके साथ ही बाकी की जिन्दगी निकले बस. दिल का खुश रहना उसके संतुष्ट रहने के बिल्कुल समानुपातिक होता है. मन उतना ही साफ़ और स्वस्थ रहता है जितना वो संतुष्ट रहता है.
#दिल_जयपुरी
किसी कहानी मे ही सही ...
पर मै भी आज तक एसी कोई कहानी भी नही लिख पाया जिसमे मिलना तय हो. हर जगह बिछडना क्यू लिख देता हूँ खुद पता नही. कोशिश करुन्गा यदी आगे कोई प्रेम पर कुछ थोड़ा बहुत लिख पाया तो. भावनाये लिख कर ही सही काल्पनिक तौर पर ही सही पर एकबारगी तो महसूस कर सकून्गा वो सब जो असल मे नही कर पाया कभी. जो मै करना चाहता था जैसा मै जीना चाह रहा था जैसा मै साथ रहने का ख्वाब पाले हुये था वैसा सब ...अब बस कहानियों मे ही जी सकता हू.
जीवन का कोई भी हिस्सा हम दुबारा नही जी सकते बिल्कुल गुजरे वक्त के माफ़िक वापिस नही आता कुछ भी. जैसे बचपन को दुबारा जीना हो तो यादो के सहारे हम बस महसूस कर सकते है. कोई बेहद दिल के करीब किस्सा हमारे साथ उसी तरह हो जिस तरह पहले हुआ था इत्तेफाक होगा और इत्तेफाक जीवन मे कम ही होते है. इक उम्र होती है जब इंसान प्यार मे जी रहा होता है वह जिन्दगीभर उसी मे जीना चाहता है. वह चाहता है आज जो सब उसके पास है वह आजीवन रहे पर अक्सर ही होता है एसा कुछेक भाग्यशाली लोगो के साथ वरन ज्यादातर के साथ उसके जीवन के सुखद पल छीन लिये जाते है. प्रकृति का नियम थोडा अटपटा लगता है तब कि हम जो चाहते हैं वह होता क्यू नहीं है जिन्दगीभर हमे संघर्ष क्यू करना पड़ता है क्या आराम की जिन्दगी जीना गुनाह है और आराम का मतलब यहा सिर्फ़ इतना सा है कि जिसके साथ जीने का मन हो उसके साथ ही बाकी की जिन्दगी निकले बस. दिल का खुश रहना उसके संतुष्ट रहने के बिल्कुल समानुपातिक होता है. मन उतना ही साफ़ और स्वस्थ रहता है जितना वो संतुष्ट रहता है.
#दिल_जयपुरी
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