#मरीना_बीच_चेन्नई
- बची हुई गुल्ली(मक्का) को कौअा खा रहा है देखो
- श्मशान घाट मे भी अपने हिस्से का चावल नही छोड़ते ये.
- मतलब
- कुछ नही
- अवे पानी मे इतना अंदर क्यू जा रहा है. मरेगा क्या . समंदर है ये वहा ले जायेगा.
- वहा तक गहरा ज्यादा नही है. भीग लेने दो थोडा. वैसे भी एक दिन सबको मरना है. और मरने के बाद body बाहर फ़ेन्क देता है समंदर पता है ना.
- तेरी मम्मा कैसी है अब उनकी तबीयत खराब थी ना.
- पता नहीं. चार पांच दिन से बात नही की.
- पता तो होगा.
- छोटा भाई है उसके पास. सो कोई टेन्शन नही है.
- क्यू
- वो लापरवाह नही है. और एक दिन तुम भी मै भी वो बच्चे भी और वो बूढा वहा जो अपनी पोती के साथ खेल रहा है सब को ये दुनिया छोडनी ही है.
- तु पगला गया है क्या. हर बात पे मरना कहा से आ जाता है बीच मे.
- क्यू इसमे क्या गलत था.
- सही गलत मत सिखा. उम्मीद होती है जीने की बस. और उसी पे दुनिया चल रही है.
- उम्मीद... जिन्दा लोगो को मारती है. अगले पल का भरोसा नही. उम्मीद क्यू पालते है लोग पता नही.
- तू ना किसी अच्छे साईक्लोजिस्ट को दिखा. तेरा दिमाग ठीक नही है.
- अरे एसा कुछ नही है. बस मै सच को दिल से कुबूल करता हू. मुझे फ़र्क नही पड़ता किसी भी चीज से . जीना मरना, दुख सुख, जुड़ना बिछडना. सबकुछ मेरे लिये एक समान जिन्दगी के हिस्से लगते है. जो कि है भी. पर सब डरते है इसे मानने से जबकी सबके मन को पता है सच्चाई.
- तुझे नही लग रहा ये ज्यादा हो रहा है. ना जगह देखता ना वक्त देखता ना कुछ और बस जो मन मे आया बक दिया.
- हा चलो अब रात हो जायेगी घर पहुचते पहुचते....
#दिल_जयपुरी
- बची हुई गुल्ली(मक्का) को कौअा खा रहा है देखो
- श्मशान घाट मे भी अपने हिस्से का चावल नही छोड़ते ये.
- मतलब
- कुछ नही
- अवे पानी मे इतना अंदर क्यू जा रहा है. मरेगा क्या . समंदर है ये वहा ले जायेगा.
- वहा तक गहरा ज्यादा नही है. भीग लेने दो थोडा. वैसे भी एक दिन सबको मरना है. और मरने के बाद body बाहर फ़ेन्क देता है समंदर पता है ना.
- तेरी मम्मा कैसी है अब उनकी तबीयत खराब थी ना.
- पता नहीं. चार पांच दिन से बात नही की.
- पता तो होगा.
- छोटा भाई है उसके पास. सो कोई टेन्शन नही है.
- क्यू
- वो लापरवाह नही है. और एक दिन तुम भी मै भी वो बच्चे भी और वो बूढा वहा जो अपनी पोती के साथ खेल रहा है सब को ये दुनिया छोडनी ही है.
- तु पगला गया है क्या. हर बात पे मरना कहा से आ जाता है बीच मे.
- क्यू इसमे क्या गलत था.
- सही गलत मत सिखा. उम्मीद होती है जीने की बस. और उसी पे दुनिया चल रही है.
- उम्मीद... जिन्दा लोगो को मारती है. अगले पल का भरोसा नही. उम्मीद क्यू पालते है लोग पता नही.
- तू ना किसी अच्छे साईक्लोजिस्ट को दिखा. तेरा दिमाग ठीक नही है.
- अरे एसा कुछ नही है. बस मै सच को दिल से कुबूल करता हू. मुझे फ़र्क नही पड़ता किसी भी चीज से . जीना मरना, दुख सुख, जुड़ना बिछडना. सबकुछ मेरे लिये एक समान जिन्दगी के हिस्से लगते है. जो कि है भी. पर सब डरते है इसे मानने से जबकी सबके मन को पता है सच्चाई.
- तुझे नही लग रहा ये ज्यादा हो रहा है. ना जगह देखता ना वक्त देखता ना कुछ और बस जो मन मे आया बक दिया.
- हा चलो अब रात हो जायेगी घर पहुचते पहुचते....
#दिल_जयपुरी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें