बुधवार, 29 जनवरी 2020

अधूरापन

कुछ चेहरे होते है जिन्हें हम ता-उम्र नहीं भूल पाते कुछ होते हैं जिनको भूलना नहीं चाहते. एक होते है दर्द बांटने वाले एक होते है बांटने की आड़ मे बढ़ाने वाले. बढ़ाने वाले ज्यादा मिलते है. धीमा जहर भी कह्ते है कुछ लोग जिसे. दूसरी तरह के लोगों का जीवन मे कोई खास मकसद नहीं होता सिवाय इसके कि उनको आनंद समय पर मिलता रहे जिसके लिए हर बात को मसालेदार बनाना जरूरी होता है. ताकि सुनने वालों के कान मे रेंगती जुआ जरा रफ़्तार बढ़ाए अपनी.
बात ये है कि यदि हम दूसरे प्रकार का जीवन जीते है तो इस बात से मुकर नहीं सकते कि जिंदगी लूजर के जैसे काटने से ज्यादा कुछ नहीं है. जिनके खुद के जीवन मे रोशनी नहीं होती वो दूसरों के घरों का दिया बुझाने मे माहिर होते है. ये दूसरी तरह के होते है. किसी की सोच को बदल पाना जितना मुश्किल है उतना ही आसान है वह खुद को समझ पाये. जो कि अक्सर होता नहीं है क्युकी हर आदमी अपनी नजर मे सही है. अपनी नजर मे सही होना भी एक स्तर तक ही सही होता है उससे उपर यदि कुछ आता है तो उसे अमूमन गलतफ़हमी कह्ते है. मानसिक बीमारियो की वज़ह भी गलतफहमियां बनती है. इसी तरह की बीमारियो के पीड़ित होती है बलात्कारी किस्म की सोच. हर व्यक्ति के अंदर बुराई और अच्छाई युद्धरत होती है एसा सुना होगा पर य़ह सच है. कुछ होते हैं जो काबू पा लेते है कुछ होते है जिनकी बुराई से दूसरे लोग प्रभावित होते है...

इससे आगे तुम सोचिए कुछ अधूरा लिखने का मन है. अंत मे अधूरापन छोड़ने का मन है.

दिल जयपुरी

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