शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

पिता

#पिता

                   जब हमारी गाव मे पढाई पूरी हो जाती है तो अपने सपनो को उडान देने के लिए हम जयपुर या दिल्ली जैसे शहरो मे पढाई जारी करना चाहते है खासकर के हम मीणाओ के लडके लड़कियां. किसी ने कोई सपना देखा होता है किसी ने कोई सपना देखा होता है वास्तविकता मे वो सपने हमने सिर्फ देखे होते है उनको पूरा कराने का असली जुनून तो पिता की आँखों मे होता है .  वो सपना पूरा करने का लक्ष्य तो पिता ने निश्चित किया होता है हमसे ज्यादा. और एक मध्यम वर्गीय या गरीब परिवार मीणाओ के है ज्यादातर. सभी मीणाओ के घर मे कस्टम कलेक्टर आईपीएस नही है . है भी तो वो भी ऐसी ही स्थिति से गुजरे है . बात ये है कि जब हम पढाई जारी करते है शहर मे तो कमरा कॉलेज और कोचिंग की फीस पिता देता है और हमको ये पता नही होता कि उसने कहा से रुपयो की व्यवस्था की है . हमारा पिता ये नही चाहता कि हमको इन सब का पता चले क्यूकी वो सोचते है कि ये बात हमको मायने नही रखती , हमे सिर्फ पढाई ही मायने रखनी चाहिये. कोचिंग नही छूटती कभी मैथ की तो कभी इंग्लिश की ...तो कभी रीजनिंग की तो कभी साइंस की .....कभी रेल्वे के लिए तो कभी बैंक के लिए ..तो कभी एस एस सी के लिए. सबका कोर्स अलग अलग . कुछ लडके हर कम्पीटिशन की परीक्षा के लिए हर बार कोचिंग करते है . फीस 6000 से 25000/30000 पर हमको पता नही है पैसा कहा से आ रहा है . हमने तो बस पापा को बोला था . पापा कमरा का किराया देना है पापा मैथ की कोचिंग की फीस देनी है पापा खर्चा को पैसे खत्म होगे पापा पापा पापा...Always. और पापा के शब्द...बेटे कितने चाहिए. बेटा कहेगा 10000 बस. पापा कहेगा परसों डला दुंगा तो चलेगा . बेटा कहेगा पापा कल कोचिंग मे बैठने नही देगा टीचर. ठीक है बेटा दोपहर तक डला दुंगा.  दोपहर को फिस जमा हो जायेगी बेटे की अब बिना टेंशन के पढाई जारी रख सकेगा.
            कुछ वर्षो बाद जब बेटा कलेक्टर/कस्टम/जेइन/फईन/मास्टर/गैंगमेन/चपरासी कुछ भी बन जायेगा. पिता को लगेगा मेरा तो जीवन सफल हो गया . गाव मे मूंछो में ताव देकर घूमता है अब पिता क्यूकी उसको बेटे से जो उम्मीद थी पूरी कर दी .
              इन मूंछो के ताव को देखकर एक दिन जब बोहरा घर आता है कि ला अब तो गढ तोड दिया तेरे छोरे ने भाई म्हारा भी हिसाब कर लें . तब पिता कहता है कि हा भाई आओ कर लेते है बहुत शुक्रिया जो तुमने मेरा साथ दिया . हिसाब मे पता चलता है कर्जा 4 लाख/5 लाख/ 6 लाख /8 लाख जुडता है . बेटे को कहा जाता है कि बेटा पैसा देना है दूसरे का और बेटा के शब्द होते है - कौनसा पैसा . मैने तो अकेले खर्च नही किये पूरे. मै तो बस कुछेक लाख एडजस्ट कर सकता हूं खींच के .बाकी आप देख लो  . ये शब्द सुनकर बाप दिल बै़ठ जाता है . वो नि:शब्द हो जाता है .
                    अब उस कलेक्टर साब को क्या पता कि जो पैसे उसे भेजे जाते थे वो घर मे पेड से नही तोडे जाते थे. खेती मे इतना भी नही होता कि खाद बीज का खर्च चल सके . उसकी बीमार मां को जिन्दा भी तो आजकल की अंग्रेज़ी दवाईयो ने रखा है जो कितनी महंगी होती है उसे पता नही. उस बेटे को ये भी पता नही कि उसके छोटे भाई बहन को भी तो पढाया जा रहा है जिनका खर्च देने के लिए सडक पर कोई दान पेटी नही है . शायद उस बेटे को ये भी पता नही होगा कि 1 लाख रूपये का 3 साल मे 2 लाख हो जाता है जो कि 2 रूपिया प्रति सैकडा है तो वरना कुछ तो इससे भी ज्यादा मे बोहरगित करते है . और उसे शहर मे शानदार वक्त बिताते 5-8 साल हो जाते है . वो भूल जाता है वो महंगे महंगे कपडे वो शानदार एक हाथ लम्बा मोबाईल. परिवार की हर जरूरत पूरी की थी जितना कमा सकता था उससे घर का खर्च चला लेता था.  और क्या बताऊँ अब यार सब कुछ तो कह दिया.....

दुनिया मे पिता से बढा सलाहाकार; मार्गदर्शक; साथी; हर्षवर्धन करने वाला कोई नही होता ।
जिनके सर पर पिता का साया है वो भाग्यशाली है जिनके पर नही है उनको कामयाब व्यक्ति बनकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते है.

एक बात सीखी है जिंदगी मे ...कुछ भी करूगा पर ऐसा कुछ नही करूंगा जिससे पिता के दिल को ठेस पहुंचे. और गर्व है अब तक तो ऐसा नहीं किया.

और मै सिर्फ आज याद नही कर रहा रोज पिता को याद करता हूं . आज तो #असलियत लिखी है कुछ लोगो की .

उनको समर्पित है जिनके घर मे मूंसे ग्यारस कर रहे है और शहर मे R15 के पीछे भायेली बैठकर घूम री है ।

किस्मत

#किस्मत

एक लडका था जो 5-6वीं कक्षा तक गाव के ही एक प्राइवेट स्कूल मे पढा था.उसके बाद उसे सरकारी स्कूल मे दाखिला  दिलवा दिया. किरोडीमल जी के दोनो बेटे सरकारी स्कूल मे पढते थे अब. गोलू अपने बडे भाई दीपक के साथ स्कूल जाता था. गोलू पढाई मे बहुत अच्छा रहा है . किरोडीमल जी के विचार बडे ही सार्थक हुआ करते थे . उनका मानना था कि सरकारी स्कूल के टीचर ज्यादा अच्छे है वजाय प्राईवेट स्कूल के टीचरो से और सच भी है वो तो खुद नही पढाते है. गावो के सरकारी स्कूल के टीचर आराम ज्यादा करते है पढाते कम है. कुछ टीचर होते है जो अच्छे से अपनी ड्यूटी करते है

       खैर. इसी सरकारी स्कूल से राज्य की वरियता सूची मे नाम आया एक लडके का . कक्षा 12वीं के गोलू का. कला वर्ग मे राज्य मे प्रथम था 96.15 प्रतिशत के साथ. गोलू सामान्य किसान का बेटा था. तब सभी अखबार बालो ने झोपडी से निकला हीरा कहा था. पूरा गाव गर्व महसूस कर रहा था. किरोडीमल जी का सर फक्र से ऊंचा था कि बेटे ने आज एक अलग पहचान बनाई है. बाप का नाम रोशन कर दिया. समाज मे अलग ही इज्जत, पहचान बन चुकी थी उसकी. वो वक्त किरोडीमल जी के परिवार के जीवन का बेहतरीन वक्त था. उस वक्त गोलू ने सपना भी बडा देखा था कि आईएएस बनना है अब. पिता ने भी ठान लिया था कि जो सपना बेटे ने देखा है जान लगा दुंगा पूरा करने मे.
         गोलू ने राजस्थान यूनिवर्सिटी कालेज से ग्रजुएशन किया. जयपुर के मीणा हॉस्टल मे रहकर पढाई की. विषयो पर ऐसी पकड कि साथी God Gift कहते थे. उसका आईएएस बनने का जुनून कम नही हुआ .ग्रजुएशन की पहली साल से आईएएस की पढाई जारी कर दी.उसकी ग्रजुएशन खत्म होने के बाद वो दिल्ली चला गया और यूपीएससी का एक्जाम दिया .वह पहले एक्जाम मे सलेक्ट होकर इंटरव्यू तक पहूंच गया जो कि अपने आप मे बडी सफलता थी . उसका सपना था पहले ही एक्जाम मे फाइनल सलेक्ट होना. पर ये सपना उसका टूट गया था .उसे इंटरव्यू मे बाहर कर दिया गया.यही से उसके सपने मात खाते चले गये थे. पता नही क्यू लडका तो पढाई मे भी हीरा और दिल से भी हीरा था पर किस्मत ने उसकी उल्टी गिनतिया चालू कर दी थी . उसने फिर एक्जाम दिया सिलेक्शन नही हुआ.  3 यूपीएससी एक्जाम देने के बाद उसने पहला आरएएस का भी एक्जाम दिया और उसमे इंटरव्यू के लिए सलेक्ट हुआ. उसका 4 वीं बार आईएस का मेन्स दिया और दिल्ली से कमरा खाली करके गाव आ गया था. एक तो उसको ये आत्मविश्वास था की इस बार इंटरव्यू मे भी मुझे कोई नही रोक सकता. क्यूकी मेन्स का पेपर उसका बहुत अच्छे से हो गया था. दूसरा अब आरएएस का भी इंटरव्यू था जो उसे अब देना था कि आईएएस जॉब के बाद दे लूंगा. उसका जुनून गडबडा सा गया था. इतनी सारी असफ़लता और घर के हालात देखकर क्यूकी वो सिर्फ़ किसान का बेटा था किसी आईएएस या आईपीएस का बेटा नही जो पैसो की टेंशन नी होती. सब पैसा साहूकारों से आता था. सबको विश्वास था कि लडका एक दिन कलेक्टर बनेगा और पूरा हिसाब बराबर कर देगा. साहूकार सोचते थे कि दिन और रात तो हमारे आते है इसका तो जमाना आयेगा. इसलिए किरोडीमल जी को जितने चाहिये मिल जाये थे.
               दिसंबर 2014 की बात है उसका मेन्स का लास्ट एक्जाम रविवार को हो गया था।  सोमवार को वो कमरा खाली करके घर आ गया था. गाव मे मित्र 2-3 थे बस गिने चुने उन्ही के घर सारा दिन-रात निकल जाता था उसका.मंगलवार शाम को वह दोस्त के घर से दोनो अपने घर चले गये. टीवी देख रहे थे सब करीब 8 बजे शाम को. गोलू का मोबाईल डिस्चार्ज हो गया था. वो टीवी के प्लग मे ही मोबाईल का चार्जर लगाने लग गया. नही लगा चार्जर. थोडा दाब देकर लगाना चाहा तभी एक झटका लगा और जमीन पर धडाम से गिर पडा. सब घरबाले उठाने को भागे . जीप बुलाई डॉक्टर के पास ले के गये सिर्फ 3 किमी था डॉक्टर. पहुचते ही I'm sorry बोल दिया डॉक्टर साब ने.
          उस दिन समझ आया कि किस्मत बडी कुत्ती चीज है साली कभी भी पलट जाती है.

(यह मेरे गाव की सत्य घटना है.)

सोमवार, 18 जून 2018

जय किसान

#देश
             देश मे सैकडो बडे बड़े मन्दिर है जिनमे रूपयो की गिनती के लिए मशीने लगी है . कुछ मन्दिर तो ऐसे है जिनमे दान मे आया रूपया गिनने के लिए सरकार सरकारी कर्मचारियो को नियुक्त करती है । हर वर्ष अरबो खरबो का दान मन्दिरों मे आसानी से आ जाता है।  हर बडे मन्दिर पर सरकार का ताला भी है दान के टेण्डर मे से 30-70 प्रतिशत सरकार को जाता है बाकी का टेण्डर बाला ब्राहमण ले जाता है अपना कोठा भरने।
           एक नेता को किसी भी सरकारी कर्मचारी से अधिक वेतन मिलता है सुविधायें मिलयी है। नेताओ के बच्चे विदेशो मे रहकर पढाई कर रहे होंगे ।
            बैंक उद्योगपतियो को लोन इसलिए दे देता है क्यूकी वो बडे उद्यमी है । उनको कर्जा कितना भी बैंक दे सकता है ।उनके पूरे उद्योग की कीमत से ज्यादा बैंक लोन दे देते है।
             देश मे किसी भी सरकारी निर्माण पर निर्धारित धन मे से  केबल 40-60 प्रतिशत खर्च ही होगा और बाकी रूपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ जाता है।

#किसान
            किसान को फसले बोने के लिए पैसा नही मिल पाता . जहा मिलता है वहां ब्याज की दरे कमर तोडती है। ब्याज कुछ दिन मे इतना बढ जाता है कि वह चुका नही पाता . बडी दयनीय स्थिति बन जाती है .
              किसानो के बच्चे सरकारी स्कूल मे पढकर आगे बढते है । उनके खून मे किसानी है। किसान अपने बच्चो को प्राइवेट विद्यालय मे नही पढा पाता । जब बेटा पढाई करने शहर जाता है तब किसान कर्जा मे डूबा होता है पर फिर भी अपने बेटे को पढाता है कर्जा लेकर । उम्मीद के साथ की नौकरी लगने के बाद बेटा चुका देगा ।पर जगह नही निकलती है जॉब कैसे लगे।
               बैंक किसानों को लोन खेत के कागज गिरवी रखने के बाद देता है अगर लॉन ही चुका पाया तो खेत को बैंक निलाम कर देता है
               देश का 60-70% किसान आज भी कच्चे मकान मे रहता है ।

               #भारत किसान प्रधान देश है। खेती पर निर्भर है। देश मे किसानो को कोई राहत नही है इस समय . तमिलनाडु के किसान सूखे की मार झेल रहे है सरकार की तरफ से कोई कदम नही उठाये गये। तमिल किसानो ने संसद पर महिनों धरना दिया किसानो ने ना कोई मिडिया ने दिखाया ना किसी सरकार ने ध्यान दिया। सैकडो किसान आत्म हत्या करते है हर साल उनका कोई कर्ज माफ नही जाता।  ये दयनीय स्थिति ही तो है किसान की। मध्यप्रदेश मे महाराष्ट्र मे कितने किसान आत्म हत्या कर लेते है फिर भी सरकार को नेताओ को कोई फर्क नही पडता है । जबकी सरकार यह भूल रही है कि जिस दिन किसान का अनाज शहर नही गया उस दिन देश भूखो मरने की नौबत आ जायेगी । गुजरात राजस्थान हरियाणा ने अगर 1 दिन दूध दिल्ली नही भेजा तो दिल्ली मे मां बच्चो को पाश्चुरिकृत दूध पिलायेगी. जिससे पेट ठीक से नही भरता बच्चे का विकास तो दूर की बात है ।

                     #किसानो का अगर कर्जा माफ किया जाये तो उनमे फसल पैदा करमे का जज्बा रैदा हो।  सूखे इलाको को पानी की व्यवस्था हो जाये तो देश को जरूरत से ज्यादा अनाज मसाले पैदा हो। किसान की फसल का उचित दाम लगाया जाये तो उसकी गरीबी दूर हो सके ताकि वह भी अपने बच्चो के सपने पूरे कर सके।
जो देश खेती पर निर्भर हो और उसी को ठीक से नही कर सकें तो देश कैसे विकास कर सकता है । कैसे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी किसान की और देश की । किसान का साथ देने की जरूरत है उसका हौसला अफजाई करने की जरूरत है इस देश की रीढ है किसान। मै खुद किसान का बेटा हूं तो किसान की दशा को बेहतर समझता हूं मै भी काम करता हूं खेतो मे । मैंने भी अनाज खेतो मे उगा कर मंडी मे पहुचाया है .जहां मुझे कभी भी मेरी फसल का उचित दाम नही मिला । .
#खैर मै तो किसान के साथ था, साथ हूं और आजीवन रहूंगा।
#जय_किसान

रविवार, 17 जून 2018

असलियत 1

#पिता

                   जब हमारी गाव मे पढाई पूरी हो जाती है तो अपने सपनो को उडान देने के लिए हम जयपुर या दिल्ली जैसे शहरो मे पढाई जारी करना चाहते है खासकर के हम मीणाओ के लडके लड़कियां. किसी ने कोई सपना देखा होता है किसी ने कोई सपना देखा होता है वास्तविकता मे वो सपने हमने सिर्फ देखे होते है उनको पूरा कराने का असली जुनून तो पिता की आँखों मे होता है .  वो सपना पूरा करने का लक्ष्य तो पिता ने निश्चित किया होता है हमसे ज्यादा. और एक मध्यम वर्गीय या गरीब परिवार मीणाओ के है ज्यादातर. सभी मीणाओ के घर मे कस्टम कलेक्टर आईपीएस नही है . है भी तो वो भी ऐसी ही स्थिति से गुजरे है . बात ये है कि जब हम पढाई जारी करते है शहर मे तो कमरा कॉलेज और कोचिंग की फीस पिता देता है और हमको ये पता नही होता कि उसने कहा से रुपयो की व्यवस्था की है . हमारा पिता ये नही चाहता कि हमको इन सब का पता चले क्यूकी वो सोचते है कि ये बात हमको मायने नही रखती , हमे सिर्फ पढाई ही मायने रखनी चाहिये. कोचिंग नही छूटती कभी मैथ की तो कभी इंग्लिश की ...तो कभी रीजनिंग की तो कभी साइंस की .....कभी रेल्वे के लिए तो कभी बैंक के लिए ..तो कभी एस एस सी के लिए. सबका कोर्स अलग अलग . कुछ लडके हर कम्पीटिशन की परीक्षा के लिए हर बार कोचिंग करते है . फीस 6000 से 25000/30000 पर हमको पता नही है पैसा कहा से आ रहा है . हमने तो बस पापा को बोला था . पापा कमरा का किराया देना है पापा मैथ की कोचिंग की फीस देनी है पापा खर्चा को पैसे खत्म होगे पापा पापा पापा...Always. और पापा के शब्द...बेटे कितने चाहिए. बेटा कहेगा 10000 बस. पापा कहेगा परसों डला दुंगा तो चलेगा . बेटा कहेगा पापा कल कोचिंग मे बैठने नही देगा टीचर. ठीक है बेटा दोपहर तक डला दुंगा.  दोपहर को फिस जमा हो जायेगी बेटे की अब बिना टेंशन के पढाई जारी रख सकेगा.
            कुछ वर्षो बाद जब बेटा कलेक्टर/कस्टम/जेइन/फईन/मास्टर/गैंगमेन/चपरासी कुछ भी बन जायेगा. पिता को लगेगा मेरा तो जीवन सफल हो गया . गाव मे मूंछो में ताव देकर घूमता है अब पिता क्यूकी उसको बेटे से जो उम्मीद थी पूरी कर दी .
              इन मूंछो के ताव को देखकर एक दिन जब बोहरा घर आता है कि ला अब तो गढ तोड दिया तेरे छोरे ने भाई म्हारा भी हिसाब कर लें . तब पिता कहता है कि हा भाई आओ कर लेते है बहुत शुक्रिया जो तुमने मेरा साथ दिया . हिसाब मे पता चलता है कर्जा 4 लाख/5 लाख/ 6 लाख /8 लाख जुडता है . बेटे को कहा जाता है कि बेटा पैसा देना है दूसरे का और बेटा के शब्द होते है - कौनसा पैसा . मैने तो अकेले खर्च नही किये पूरे. मै तो बस कुछेक लाख एडजस्ट कर सकता हूं खींच के .बाकी आप देख लो  . ये शब्द सुनकर बाप दिल बै़ठ जाता है . वो नि:शब्द हो जाता है .
                    अब उस कलेक्टर साब को क्या पता कि जो पैसे उसे भेजे जाते थे वो घर मे पेड से नही तोडे जाते थे. खेती मे इतना भी नही होता कि खाद बीज का खर्च चल सके . उसकी बीमार मां को जिन्दा भी तो आजकल की अंग्रेज़ी दवाईयो ने रखा है जो कितनी महंगी होती है उसे पता नही. उस बेटे को ये भी पता नही कि उसके छोटे भाई बहन को भी तो पढाया जा रहा है जिनका खर्च देने के लिए सडक पर कोई दान पेटी नही है . शायद उस बेटे को ये भी पता नही होगा कि 1 लाख रूपये का 3 साल मे 2 लाख हो जाता है जो कि 2 रूपिया प्रति सैकडा है तो वरना कुछ तो इससे भी ज्यादा मे बोहरगित करते है . और उसे शहर मे शानदार वक्त बिताते 5-8 साल हो जाते है . वो भूल जाता है वो महंगे महंगे कपडे वो शानदार एक हाथ लम्बा मोबाईल. परिवार की हर जरूरत पूरी की थी जितना कमा सकता था उससे घर का खर्च चला लेता था.  और क्या बताऊँ अब यार सब कुछ तो कह दिया.....

दुनिया मे पिता से बढा सलाहाकार; मार्गदर्शक; साथी; हर्षवर्धन करने वाला कोई नही होता ।
जिनके सर पर पिता का साया है वो भाग्यशाली है जिनके पर नही है उनको कामयाब व्यक्ति बनकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते है.

एक बात सीखी है जिंदगी मे ...कुछ भी करूगा पर ऐसा कुछ नही करूंगा जिससे पिता के दिल को ठेस पहुंचे. और गर्व है अब तक तो ऐसा नहीं किया.

और मै सिर्फ आज याद नही कर रहा रोज पिता को याद करता हूं . आज तो #असलियत लिखी है कुछ लोगो की .

उनको समर्पित है जिनके घर मे मूंसे ग्यारस कर रहे है और शहर मे R15 के पीछे भायेली बैठकर घूम री है ।

शुक्रवार, 11 मई 2018

कहा खो गये हम

यूं वफा-ए-इश्क करते करते इतने करीब हो गये हम
जाने अनजाने  मे अपनो से दूर हो गये हम
राह-ए-मोहब्बत की उम्मीद-ए-अजल तक
पता ही नही चला कब मशहूर हो गये हम

रविवार, 29 अप्रैल 2018

कब्र मे दफन इश्क

जो तूने किया कोई गंवारा नही.
तूने भुला दिया कोई गंवारा नही
काश कब्रिस्तान तक साथ आ जाती
रूह तो तुझमे समाई है बदन भी दफन करवा जाती

आज दूसरी सुुुबह है मेरी कब्र के अन्दर
अब बदबू आने लगी है यहाां मुझे
मेरी जान अटकी है इन हड्डियों के ढांचे मे
आ जाती और रिहा कर देेेती मुझे

कब्र से तो चांंदनी भी नही दिखती जिसे निहारता
कोई अपना पराया भी नही जिसे दास्तां ए दर्द सुनाता
अब बदन मे बचा नही है कुछ भी सब गल गया
पर पता नही क्यू दिल अब भी नहीं गल पाया


शायद ये दिल मेेेरा नही है जो अभी तक बचा है
कोई तो है इसमे जो धक धक कर रहा है
पर क्या फर्कक  पडता है तुमको किसी बात का
तड़प  रहा है .पर दिल ही तो है गल रहा है



By दिल जयपुुुरी

इश्क की खुमारी

जब तक संभलता इश्क़ परवान चढ चुका था
मै प्यार की गहराई मे डूब चुका था
फिर एक दिन समझ आया की कहा आ गया हू मै
मोहब्बत के समंदर मे समा गया हू मै

पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी समझने मे
अब बस कुछ कदम दूर था इश्क मुकम्ममल होने मे
फिर क़यामत ने ये क्या बाजी पलटाई
मेरे इ़श्क ने मुकम्मल होने पहले पटकनी खा

मजबूरियों से आगे जाना होता है इश्क मे हमेशा
अब ये बात उस पगली की समझ मे थोडी आयेगी
मै नही जाता इतने आगे जितना जा चुका था
गर पता होता दिलरुबा मजबूरियों के सहारे बेबफा हो जायेगी

कहती थी कैसे रह पाउंगी तुुम बिन. तुुुुझमे तो मेरी रूह का बास है
कभी दूर मत जाना पगले तेरी हर सांस से मेेेरी जिदगी की आस है
पता नही अब क्या  हो गया अचानक कि मै आम हो गया हूूं
जो कहती थी कभी कि बस एक तू ही तो खास है

खैर कोई बात नही जो रंग तूने दिखलाया है
मेरे इश्क की बढ़ती खुमारी को गिराया है
कभी देखता था मै तेरे मेरे सपने
सबको आइने की तरह तोडकर गिराया है

तू तो नही निभा पाई उम्रभर इस दोस्ताने को
फिर भी कैसे तू  रूसवा हो गई नही बताऊंगा जमाने को

अब तो बस  क्या रह गया है जिंदगी मे .
तेरी जिंदगी संभाल तू तेरी मजबूूूुरीयो के  साथ
मै तो अब कही दूूर चला   जाउंगा
कुछ तेरी बाते कुछ ना भूलने वाली यादो के साथ


जब तक संभलता इश्क़ परवान चढ चुका था
मै प्यार की गहराई मे डूब चुका था।  .


By दिल जयपुुुरी

एक परदेशी की डायरी: शहर

​कुछ शहर अक्षर देते हैं भाषा को, कुछ खोलते हैं संसार के कई आवरण। ​कुछ शहर केवल प्रतिध्वनि बनकर दोहराते हैं हमारा नाम। ​परंतु इन सबसे इतर... ...