रविवार, 30 अगस्त 2026

एक परदेशी की डायरी: शहर


​कुछ शहर

अक्षर देते हैं भाषा को,

कुछ खोलते हैं

संसार के कई आवरण।

​कुछ शहर

केवल प्रतिध्वनि बनकर

दोहराते हैं हमारा नाम।

​परंतु इन सबसे इतर...

कुछ शहर

हृदय में उतरकर जीना सिखाते हैं।

​जहाँ हम

मार्ग नहीं ढूँढते,

शहर स्वयं

हमारी परछाइयों को पढ़ता है।

​जहाँ वीथिकाएँ

केवल गंतव्य तक नहीं ले जातीं,

कभी-कभी

स्वयं से साक्षात कराती हैं।

​और सौंप देते हैं वे शहर,

समय की परिधि से परे—

अक्षुण्ण आत्मीयताओं के कुछ अनूठे संबंध।

​और जब अंततः

हम बदलते हैं सरहद,

शहर पीछे छूट जाता है अतीत बनकर—

किंतु उसके दिए हुए रिश्ते,

जीवन भर हमारे भीतर स्पंदित होते रहते हैं

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एक परदेशी की डायरी: शहर

​कुछ शहर अक्षर देते हैं भाषा को, कुछ खोलते हैं संसार के कई आवरण। ​कुछ शहर केवल प्रतिध्वनि बनकर दोहराते हैं हमारा नाम। ​परंतु इन सबसे इतर... ...