कुछ शहर
अक्षर देते हैं भाषा को,
कुछ खोलते हैं
संसार के कई आवरण।
कुछ शहर
केवल प्रतिध्वनि बनकर
दोहराते हैं हमारा नाम।
परंतु इन सबसे इतर...
कुछ शहर
हृदय में उतरकर जीना सिखाते हैं।
जहाँ हम
मार्ग नहीं ढूँढते,
शहर स्वयं
हमारी परछाइयों को पढ़ता है।
जहाँ वीथिकाएँ
केवल गंतव्य तक नहीं ले जातीं,
कभी-कभी
स्वयं से साक्षात कराती हैं।
और सौंप देते हैं वे शहर,
समय की परिधि से परे—
अक्षुण्ण आत्मीयताओं के कुछ अनूठे संबंध।
और जब अंततः
हम बदलते हैं सरहद,
शहर पीछे छूट जाता है अतीत बनकर—
किंतु उसके दिए हुए रिश्ते,
जीवन भर हमारे भीतर स्पंदित होते रहते हैं
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