ज़िंदगी में...
ज़िंदगी में हर साँस जुआ है...
जो पिछली साँस के बाद आती है।
हर सुबह जुआ है...
जो हर रात के बाद जन्म लेती है।
हर दूसरी धड़कन जुआ है...
जो पहली धड़कन के भरोसे चलती है।
हर क़दम जुआ है...
जिसका अंजाम किसी ने नहीं देखा।
मगर...
सबसे बड़ा जुआ उम्मीद है.....
क्योंकि इंसान साँसों से नहीं,
उम्मीदों से जीता है......।
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