रविवार, 29 अप्रैल 2018

इश्क की खुमारी

जब तक संभलता इश्क़ परवान चढ चुका था
मै प्यार की गहराई मे डूब चुका था
फिर एक दिन समझ आया की कहा आ गया हू मै
मोहब्बत के समंदर मे समा गया हू मै

पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी समझने मे
अब बस कुछ कदम दूर था इश्क मुकम्ममल होने मे
फिर क़यामत ने ये क्या बाजी पलटाई
मेरे इ़श्क ने मुकम्मल होने पहले पटकनी खा

मजबूरियों से आगे जाना होता है इश्क मे हमेशा
अब ये बात उस पगली की समझ मे थोडी आयेगी
मै नही जाता इतने आगे जितना जा चुका था
गर पता होता दिलरुबा मजबूरियों के सहारे बेबफा हो जायेगी

कहती थी कैसे रह पाउंगी तुुम बिन. तुुुुझमे तो मेरी रूह का बास है
कभी दूर मत जाना पगले तेरी हर सांस से मेेेरी जिदगी की आस है
पता नही अब क्या  हो गया अचानक कि मै आम हो गया हूूं
जो कहती थी कभी कि बस एक तू ही तो खास है

खैर कोई बात नही जो रंग तूने दिखलाया है
मेरे इश्क की बढ़ती खुमारी को गिराया है
कभी देखता था मै तेरे मेरे सपने
सबको आइने की तरह तोडकर गिराया है

तू तो नही निभा पाई उम्रभर इस दोस्ताने को
फिर भी कैसे तू  रूसवा हो गई नही बताऊंगा जमाने को

अब तो बस  क्या रह गया है जिंदगी मे .
तेरी जिंदगी संभाल तू तेरी मजबूूूुरीयो के  साथ
मै तो अब कही दूूर चला   जाउंगा
कुछ तेरी बाते कुछ ना भूलने वाली यादो के साथ


जब तक संभलता इश्क़ परवान चढ चुका था
मै प्यार की गहराई मे डूब चुका था।  .


By दिल जयपुुुरी

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