रविवार, 29 अप्रैल 2018

कब्र मे दफन इश्क

जो तूने किया कोई गंवारा नही.
तूने भुला दिया कोई गंवारा नही
काश कब्रिस्तान तक साथ आ जाती
रूह तो तुझमे समाई है बदन भी दफन करवा जाती

आज दूसरी सुुुबह है मेरी कब्र के अन्दर
अब बदबू आने लगी है यहाां मुझे
मेरी जान अटकी है इन हड्डियों के ढांचे मे
आ जाती और रिहा कर देेेती मुझे

कब्र से तो चांंदनी भी नही दिखती जिसे निहारता
कोई अपना पराया भी नही जिसे दास्तां ए दर्द सुनाता
अब बदन मे बचा नही है कुछ भी सब गल गया
पर पता नही क्यू दिल अब भी नहीं गल पाया


शायद ये दिल मेेेरा नही है जो अभी तक बचा है
कोई तो है इसमे जो धक धक कर रहा है
पर क्या फर्कक  पडता है तुमको किसी बात का
तड़प  रहा है .पर दिल ही तो है गल रहा है



By दिल जयपुुुरी

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