शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

किस्मत

#किस्मत

एक लडका था जो 5-6वीं कक्षा तक गाव के ही एक प्राइवेट स्कूल मे पढा था.उसके बाद उसे सरकारी स्कूल मे दाखिला  दिलवा दिया. किरोडीमल जी के दोनो बेटे सरकारी स्कूल मे पढते थे अब. गोलू अपने बडे भाई दीपक के साथ स्कूल जाता था. गोलू पढाई मे बहुत अच्छा रहा है . किरोडीमल जी के विचार बडे ही सार्थक हुआ करते थे . उनका मानना था कि सरकारी स्कूल के टीचर ज्यादा अच्छे है वजाय प्राईवेट स्कूल के टीचरो से और सच भी है वो तो खुद नही पढाते है. गावो के सरकारी स्कूल के टीचर आराम ज्यादा करते है पढाते कम है. कुछ टीचर होते है जो अच्छे से अपनी ड्यूटी करते है

       खैर. इसी सरकारी स्कूल से राज्य की वरियता सूची मे नाम आया एक लडके का . कक्षा 12वीं के गोलू का. कला वर्ग मे राज्य मे प्रथम था 96.15 प्रतिशत के साथ. गोलू सामान्य किसान का बेटा था. तब सभी अखबार बालो ने झोपडी से निकला हीरा कहा था. पूरा गाव गर्व महसूस कर रहा था. किरोडीमल जी का सर फक्र से ऊंचा था कि बेटे ने आज एक अलग पहचान बनाई है. बाप का नाम रोशन कर दिया. समाज मे अलग ही इज्जत, पहचान बन चुकी थी उसकी. वो वक्त किरोडीमल जी के परिवार के जीवन का बेहतरीन वक्त था. उस वक्त गोलू ने सपना भी बडा देखा था कि आईएएस बनना है अब. पिता ने भी ठान लिया था कि जो सपना बेटे ने देखा है जान लगा दुंगा पूरा करने मे.
         गोलू ने राजस्थान यूनिवर्सिटी कालेज से ग्रजुएशन किया. जयपुर के मीणा हॉस्टल मे रहकर पढाई की. विषयो पर ऐसी पकड कि साथी God Gift कहते थे. उसका आईएएस बनने का जुनून कम नही हुआ .ग्रजुएशन की पहली साल से आईएएस की पढाई जारी कर दी.उसकी ग्रजुएशन खत्म होने के बाद वो दिल्ली चला गया और यूपीएससी का एक्जाम दिया .वह पहले एक्जाम मे सलेक्ट होकर इंटरव्यू तक पहूंच गया जो कि अपने आप मे बडी सफलता थी . उसका सपना था पहले ही एक्जाम मे फाइनल सलेक्ट होना. पर ये सपना उसका टूट गया था .उसे इंटरव्यू मे बाहर कर दिया गया.यही से उसके सपने मात खाते चले गये थे. पता नही क्यू लडका तो पढाई मे भी हीरा और दिल से भी हीरा था पर किस्मत ने उसकी उल्टी गिनतिया चालू कर दी थी . उसने फिर एक्जाम दिया सिलेक्शन नही हुआ.  3 यूपीएससी एक्जाम देने के बाद उसने पहला आरएएस का भी एक्जाम दिया और उसमे इंटरव्यू के लिए सलेक्ट हुआ. उसका 4 वीं बार आईएस का मेन्स दिया और दिल्ली से कमरा खाली करके गाव आ गया था. एक तो उसको ये आत्मविश्वास था की इस बार इंटरव्यू मे भी मुझे कोई नही रोक सकता. क्यूकी मेन्स का पेपर उसका बहुत अच्छे से हो गया था. दूसरा अब आरएएस का भी इंटरव्यू था जो उसे अब देना था कि आईएएस जॉब के बाद दे लूंगा. उसका जुनून गडबडा सा गया था. इतनी सारी असफ़लता और घर के हालात देखकर क्यूकी वो सिर्फ़ किसान का बेटा था किसी आईएएस या आईपीएस का बेटा नही जो पैसो की टेंशन नी होती. सब पैसा साहूकारों से आता था. सबको विश्वास था कि लडका एक दिन कलेक्टर बनेगा और पूरा हिसाब बराबर कर देगा. साहूकार सोचते थे कि दिन और रात तो हमारे आते है इसका तो जमाना आयेगा. इसलिए किरोडीमल जी को जितने चाहिये मिल जाये थे.
               दिसंबर 2014 की बात है उसका मेन्स का लास्ट एक्जाम रविवार को हो गया था।  सोमवार को वो कमरा खाली करके घर आ गया था. गाव मे मित्र 2-3 थे बस गिने चुने उन्ही के घर सारा दिन-रात निकल जाता था उसका.मंगलवार शाम को वह दोस्त के घर से दोनो अपने घर चले गये. टीवी देख रहे थे सब करीब 8 बजे शाम को. गोलू का मोबाईल डिस्चार्ज हो गया था. वो टीवी के प्लग मे ही मोबाईल का चार्जर लगाने लग गया. नही लगा चार्जर. थोडा दाब देकर लगाना चाहा तभी एक झटका लगा और जमीन पर धडाम से गिर पडा. सब घरबाले उठाने को भागे . जीप बुलाई डॉक्टर के पास ले के गये सिर्फ 3 किमी था डॉक्टर. पहुचते ही I'm sorry बोल दिया डॉक्टर साब ने.
          उस दिन समझ आया कि किस्मत बडी कुत्ती चीज है साली कभी भी पलट जाती है.

(यह मेरे गाव की सत्य घटना है.)

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