मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

आदिवासीयो का काला दिवस

#समारकेला_खरसावा_गोलीकान्ड

उस वक्त देश की रियासतो का एकीकरण चल रहा था . झारखंड मे समारकेला-खरसावा एक मात्र देशी रियासत थी जो जमशेदपुर शहर से सटी हुई थी इस रियासत मे आदिवासीयो की बहुलता थी.  वो अपने अलग राज्य के लिये आजादी से पहले से संघर्ष कर रहे थे. एकीकरण के समय उड़ीसा चाहता था कि यह उड़ीसा मे शामिल हो क्युकी झारखंड का शासक उडिया भाषी था.  परंतु आदिवासी या तो अलग राज्य चाहते थे या बिहार मे विलय पर अडे थे.  जो की उड़ीसा राज्य सरकार को बहुत ही नागवार गुजरा.

आदिवासीयो पर उड़ीसा मे शामिल होने के लिये लगातार दबाब बनाया जा रहा था पर वे किसी भी हालत मे उड़ीसा मे जाना नही चाहते थे.विरसा मुँडा और कई आदिवासी मुखियाओ के नेतृत्व मे सभी आदिवासीयो ने खरसावा के गुरूवार हाट मे एकत्रित होकर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को ताकत दिखाने का फ़ैसला लिया गया ताकी दोनो सरकारे गौर फ़रमाये और हमे बिहार मे शामिल किया जाये.
इस योजना की खबर राज्य सरकार को लग गयी और उसने 17 दिसंबर 1947 से ही गुरूवार की हाट पर नजर रखना चालू कर दिया इसके लिये उड़ीसा सरकार की 3 टुकड़ीया तैनात की गयी मानो कोई युद्ध तैयारी हो.

1 जनवरी 1948 गुरुवार को खरसावा की हटिया मे 40,000-50,000 आदिवासी एकत्रित हुये और फ़ैसला सिर्फ़ एक तरफ़ा था या तो अलग राज्य या बिहार मे विलय.  इस चलती हाट मे जहा पूरा विश्व नये साल के जश्न मे डूबा था और देश आजाद हिन्दुस्तान का पहला नया साल मना रहा था महज 133 दिन बाद . इन 50,000 निहत्थे आदिवासीयो पर पुलिस ने गोलियां बरसाना चालू कर दिया . कई राउंड मे #अंधाधुन्ध_गोलीबारी हुई. हजारो आदिवासी मारे गये थे जिनमे हाट मे आये बच्चे और औरते भी शामिल है. इस घटना को इतने गुप्त तरीके से अन्जाम दिया गया की पास के राज्यो को भी खबर नही लगी. किसी भी मीडिया को वहा फ़टकने भी नही दिया गया था ताकी बाहर तक बात नही पहुचे. लाशो को खरसावा के कुओ मे डाला गया और ट्रको मे भरकर बीहडो मे जानवरो को फ़ेक दिया गया था. तब से 1 जनवरी आदिवासी #काला_दिवस के रुप मे मनाते है और शहीदो को #श्रद्धांजलि देते है.
जलियावाला हत्याकांड किताबो मे पढ़ाया जाता रहा है पर इस नरसंहार कही भी इतिहास मे कोई उल्लेख नही है. सिवाय #पुरखो की जुबा के कही सुनने को नही मिलता .

उन आदिवासीयो को आज तक उनका #हक नही मिला जो कि सिर्फ़ #जल_जंगल_और_जमीन है.  उनको दुनिया से कोई मतलब नही उनको बस उनकी जगह उनसे छीनी नही जाये पर वहा सरकार विकास के नाम पर जंगलो का सफ़ाया कर रही है.  जहा आदिवासीयो को जरुरत है वहा पर एक सड़क भी आज तक नही बनाई गयी. जब झारखंड अलग राज्य बना उम्मीद थी कि अब कुछ होगा पर आज भी वो ही 1948 के  हालातो  मे लोग जीवन जीते है

#काला_दिवस

गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

नयी दोस्त ii

वैसे तो तेरे off line होने के बाद भी घंटो तेरी ID देखता हू!
मगर आज तो हद हो गयी जब निगाहे तेरी DP से हट नही रही थी !
कोई flirt करता है तो जहर के घूट सा पी जाता हू !
एसा नही है जलता हू पर तुझे खोने से डरता हू !


तू मेरी frnd list मे भी नही है पर तेरी post ढूँढता रहता हू !
सख्ती बहुत दिखाता हू पर दरअसल मे बहुत नरम हु!
कभी गौर किया है तेरे एक msg का एक sec मे reply देता हू ?
सोचता हू ignore कर दू पर अपने आप तुझ तक आता हू !

एसे तो हज़ारो frnds मेरे भी है पर वो बात नही !
जो सिर्फ़ तुझमे है वो किसी और मे हो भी कैसे सकती है !
तेरी मासूमियत पर दिल हारकर बैठे है तू न
ही जानती !
प्यार बहुत करता हू कहने से डरता हू तू नही जानती !

कही तू बुरा मान गयी तो खुद को माफ़ नही कर पाउन्गा मै !
तेरे आने से महसूस होता है वो प्यार कहा से लाउन्गा मै !

एक बार भी नही देखा है तुम्हे अभी तक जानती हो तुम !
पर पता नही क्यू अपनापन सा लगता है जानती हो तुम?
तेरे नाम से मोहब्बत हुई है आज तक बस इतना सा वजूद है!
पर चुप रहता हू ये दिल तुझ जैसे दोस्त खोने से डरता है !

मै नही जानता कभी बात भी करोगी या नही !
पर इतना समझ ले इश्क काफ़ी हदो तक जायेगा !
तू जानती है जितनी भी मोहब्बत की कहानिया है ?
चेहरा देखे बिना चढ़ी इश्क की खुमारिया है

कुछ एसा ही हमारा इश्क होगा देख लेना !
तू हा कर दे मै हर वक्त साये की तरह साथ दूँगा देख लेना !
समझ कुछ भी जो दिल मे था लिख दिया !
एक एक शब्द मे प्यार महसूस होगा देख लेना !

बुधवार, 26 दिसंबर 2018

इंतजार है तेरा...

आज थोडा तन्हा हू पर इंतजार है तेरा
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा
आज तू नही आयेगी जानता हू....
आज तू नही आयेगी जानता हू...
                .... फ़िर भी इंतजार है तेरा
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा

सहेली से बतिया रही हू बहाना अच्छा है
पर हर बात पे लगता है मेरा यार सच्चा है
हा... एक बात जान लो बरखुरदार...
हा... एक बात जान लो बरखुरदार...
खलता है यू बेपरवाही से पेश आना तेरा
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा
आज थोड़ा तन्हा हू पर इंतजार है तेरा

कुछ किस्से हमारे प्यार के भी सुन लो
प्यार हुआ है तो जरा ख्वाव भी बुन लो
दर्द की गुंजाईश तो नही रखते....
दर्द की गुन्जाईश तो नही रखते....
बड़े गुरुरदार हो तुम और ये कमबख्त दिल तेरा
फ़िर भी ........
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा
आज थोडा तन्हा हू पर इंतजार है तेरा. 

नयी दोस्त i

एक  दिन एसे ही Hiiii  भेज दिया था ,उधर से reply आ गया
उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

पता भी नही female ID मे female है या male
पर नाम से attrect हुआ तो बात करने का मन किया
बहरहाल उसके बार बार reply से excited हुआ
फ़िर रोज GM GE का सिलसिला सा हो गया
ये उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

बातो का माजरा कुछ यहा तक पहुंचा
बाबा पगलू ओये होये कहर ढा रहे थे
वैसे तो सख्त हू पर फ़र्क तो पड़ता है
प्यार है जनाब पत्थर भी पिघलता है

कल की बात है online थोड़ा लेट आयी
मन थोडा उदास हुआ पर सभलना पड़ता है
लड़कियों के आगे थोडा सख्त तो होना पड़ता है
बार बार msg करती रह्ती या कुछ और था पता नही
मुझे भी उम्मीद नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

गजव तो तब हुआ जब love react आने लगा
हर बात पर बाबा -बाबा,  पगलू -पगलू  होने लगा
लगता है उसको भी दिलचस्पी थी जो मै समझा नही
मेरे हर msg से उसकी मुस्कान बढ़ने लगी थी
ये उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

खैर कोई बात नही मै दिल पर नही लेता
लड़कियों के लाखो दिवाने होते है सो ध्यान नही देता
पर फ़िर भी कुछ तो है जो वो भी intrest दिखाती है
इसकी भी उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी 

रविवार, 23 दिसंबर 2018

कटकड की थाई

#कटकड_की_थांई

               कटकड गाव की आबादी करीब 10000 है! चारो तरफ़ 12 गावो को छूता है ...  जो की एक बड़े गावो की गिनती मे आता है...  हमारे गाव के आसपास 10-12 किमी मे बड़े गावो मे गिने जाने वाले कटकड... खंडीप...  पीलौदा... झारेडा मुख्य गाव है शायद एक - दो मै भूल भी रहा हू ! इन सभी बड़े गावो मे मैने एकता कम ही देखी है!  एसा कम ही हुआ है जब पूरा गाव ...एक कार्यक्रम मे ...एक जाजम पर बैठा हो ! जाहिर सी बात है जितने लोग उतने विचार अब सबके विचार एक जैसे तो नही हो सकते इसलिये ये सब होता रहा है और बहुत बार एसा भी हो चुका है जब ये सब गाव बड़े - छोटे एक साथ मिलकर खड़े हुये है और मिशाल कायम की है!
           हमारे गावो के संगठन मे कुल 28 गाव गिने जाते है जिनमे 24 जगरवाडो के और 4 गाव मच्या गोत्र के है ! इन सबमे कटकड को बडा माना जाता रहा है इसीलिये इस अट्ठाईसा को जब भी एकत्रित करना हो तो कटकड मे किया जाता है और इसी वजह से कटकड को इनका high court  कहा जाता है! किसी भी मसले को सुलझाना हो जो सिर्फ़ समन्धित गाव से नियन्त्रित होना मुश्किल हो तब ये पूरे 28 गाव एक साथ कटकड गाव मे बैठक करते है और मसला सुलझाया जाता रहा है!  फ़ैसला पन्च पटेल करते रहे है! जिनको जो सही लगता है करते रहे है और बाकी सब लोग उनके इस फ़ैसले को मानते रहे है!
      कटकड मे एक #थांई है जो बड़ी प्रसिद्ध रही है मीणा समाज मे... अपने अलौकिक फ़ैसलो के कारण!  #कटकड_की_थांई पर सिर्फ़ एक मुद्दे के लिये #पंचायत होती है वाकी के लिये #बड़_के_पेड़ के नीचे या सरकारी विद्यालय मे या सामुदायिक भवन पर जो की विद्यालय के सामने है... और वो मुद्दा है #हत्या ! घटना के बाद एक रात भी हत्यारे को गाव मे नही रुकने देते! #जगरवाडो का खून गर्म होता है! गुस्सा मे बहुतो को हत्या का पाप चढ़ा है! इसके बारे मे अहम बात बताता हू जो आजकल के युवाओ को शायद पता भी नही होगा हमे भी ये बाते विरासत मे मिलती है #थांई पर जब तक #फ़ैसला नही होता तब तक ...ना तो कोई पानी पीता है... ना चाय... ना बीड़ी हुक्का ... ये सब तो है ही और...  जब तक फ़ैसला नही होता तब तक वहा से कोई खडा भी नही होता ...चाहे दूसरा दिन निकल आये ...और एसा पहले कई बार हो चुका है रात होने पर थाई पर गैस /लालटेनो से उजाला किया गया... रात को 2-3 बजे तक पंचायत चल रही है!
           आज भी वही #नियम है आज भी उतनी ही शिद्दत से फ़ैसले होते रहे है ! परंतु अब लोगो मे वो भावना ही नही रही समाज की एकता के प्रति जो पहले होती थी!  आजकल सब इतने पढ लिख गये है की #विरासत मे जो चीजे मिलती रही है जिनका कोई तौल नही है उनको अपनाने से साफ़ #इंकार करते है! समाज को आगे बढ़ना चाहिये पर इतना भी नही की खुद की #संस्कृति भूल जाये!  #समाजकन्टक हर जगह जिन्हौने यह काम बखूबी किया है!  युवाओ को समाज के ही #विरुद्ध खडा किया है!इस देश के #मूलनिवासीयो मे हमारी गिनती है जो बाहर से आयी प्रजातियो के चक्कर मे हमारी अपनी प्रजाति के #चिन्ह मिटा रहे है!

एक बात और...
बुजुर्गो के माथे की एक एक लकीर पर हजार हजार अनुभव होते है उनके पास बैठने भर से मन आनंदित हो जाता है उनकी जिन्दगी के किस्सों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है ! शायद इतना कि हम हमारे सम्पूर्ण जीवन मे नही सीख पाये!

R Rinku Meena

शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

पिता

#पिता

                   जब हमारी गाव मे पढाई पूरी हो जाती है तो अपने सपनो को उडान देने के लिए हम जयपुर या दिल्ली जैसे शहरो मे पढाई जारी करना चाहते है खासकर के हम मीणाओ के लडके लड़कियां. किसी ने कोई सपना देखा होता है किसी ने कोई सपना देखा होता है वास्तविकता मे वो सपने हमने सिर्फ देखे होते है उनको पूरा कराने का असली जुनून तो पिता की आँखों मे होता है .  वो सपना पूरा करने का लक्ष्य तो पिता ने निश्चित किया होता है हमसे ज्यादा. और एक मध्यम वर्गीय या गरीब परिवार मीणाओ के है ज्यादातर. सभी मीणाओ के घर मे कस्टम कलेक्टर आईपीएस नही है . है भी तो वो भी ऐसी ही स्थिति से गुजरे है . बात ये है कि जब हम पढाई जारी करते है शहर मे तो कमरा कॉलेज और कोचिंग की फीस पिता देता है और हमको ये पता नही होता कि उसने कहा से रुपयो की व्यवस्था की है . हमारा पिता ये नही चाहता कि हमको इन सब का पता चले क्यूकी वो सोचते है कि ये बात हमको मायने नही रखती , हमे सिर्फ पढाई ही मायने रखनी चाहिये. कोचिंग नही छूटती कभी मैथ की तो कभी इंग्लिश की ...तो कभी रीजनिंग की तो कभी साइंस की .....कभी रेल्वे के लिए तो कभी बैंक के लिए ..तो कभी एस एस सी के लिए. सबका कोर्स अलग अलग . कुछ लडके हर कम्पीटिशन की परीक्षा के लिए हर बार कोचिंग करते है . फीस 6000 से 25000/30000 पर हमको पता नही है पैसा कहा से आ रहा है . हमने तो बस पापा को बोला था . पापा कमरा का किराया देना है पापा मैथ की कोचिंग की फीस देनी है पापा खर्चा को पैसे खत्म होगे पापा पापा पापा...Always. और पापा के शब्द...बेटे कितने चाहिए. बेटा कहेगा 10000 बस. पापा कहेगा परसों डला दुंगा तो चलेगा . बेटा कहेगा पापा कल कोचिंग मे बैठने नही देगा टीचर. ठीक है बेटा दोपहर तक डला दुंगा.  दोपहर को फिस जमा हो जायेगी बेटे की अब बिना टेंशन के पढाई जारी रख सकेगा.
            कुछ वर्षो बाद जब बेटा कलेक्टर/कस्टम/जेइन/फईन/मास्टर/गैंगमेन/चपरासी कुछ भी बन जायेगा. पिता को लगेगा मेरा तो जीवन सफल हो गया . गाव मे मूंछो में ताव देकर घूमता है अब पिता क्यूकी उसको बेटे से जो उम्मीद थी पूरी कर दी .
              इन मूंछो के ताव को देखकर एक दिन जब बोहरा घर आता है कि ला अब तो गढ तोड दिया तेरे छोरे ने भाई म्हारा भी हिसाब कर लें . तब पिता कहता है कि हा भाई आओ कर लेते है बहुत शुक्रिया जो तुमने मेरा साथ दिया . हिसाब मे पता चलता है कर्जा 4 लाख/5 लाख/ 6 लाख /8 लाख जुडता है . बेटे को कहा जाता है कि बेटा पैसा देना है दूसरे का और बेटा के शब्द होते है - कौनसा पैसा . मैने तो अकेले खर्च नही किये पूरे. मै तो बस कुछेक लाख एडजस्ट कर सकता हूं खींच के .बाकी आप देख लो  . ये शब्द सुनकर बाप दिल बै़ठ जाता है . वो नि:शब्द हो जाता है .
                    अब उस कलेक्टर साब को क्या पता कि जो पैसे उसे भेजे जाते थे वो घर मे पेड से नही तोडे जाते थे. खेती मे इतना भी नही होता कि खाद बीज का खर्च चल सके . उसकी बीमार मां को जिन्दा भी तो आजकल की अंग्रेज़ी दवाईयो ने रखा है जो कितनी महंगी होती है उसे पता नही. उस बेटे को ये भी पता नही कि उसके छोटे भाई बहन को भी तो पढाया जा रहा है जिनका खर्च देने के लिए सडक पर कोई दान पेटी नही है . शायद उस बेटे को ये भी पता नही होगा कि 1 लाख रूपये का 3 साल मे 2 लाख हो जाता है जो कि 2 रूपिया प्रति सैकडा है तो वरना कुछ तो इससे भी ज्यादा मे बोहरगित करते है . और उसे शहर मे शानदार वक्त बिताते 5-8 साल हो जाते है . वो भूल जाता है वो महंगे महंगे कपडे वो शानदार एक हाथ लम्बा मोबाईल. परिवार की हर जरूरत पूरी की थी जितना कमा सकता था उससे घर का खर्च चला लेता था.  और क्या बताऊँ अब यार सब कुछ तो कह दिया.....

दुनिया मे पिता से बढा सलाहाकार; मार्गदर्शक; साथी; हर्षवर्धन करने वाला कोई नही होता ।
जिनके सर पर पिता का साया है वो भाग्यशाली है जिनके पर नही है उनको कामयाब व्यक्ति बनकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते है.

एक बात सीखी है जिंदगी मे ...कुछ भी करूगा पर ऐसा कुछ नही करूंगा जिससे पिता के दिल को ठेस पहुंचे. और गर्व है अब तक तो ऐसा नहीं किया.

और मै सिर्फ आज याद नही कर रहा रोज पिता को याद करता हूं . आज तो #असलियत लिखी है कुछ लोगो की .

उनको समर्पित है जिनके घर मे मूंसे ग्यारस कर रहे है और शहर मे R15 के पीछे भायेली बैठकर घूम री है ।

किस्मत

#किस्मत

एक लडका था जो 5-6वीं कक्षा तक गाव के ही एक प्राइवेट स्कूल मे पढा था.उसके बाद उसे सरकारी स्कूल मे दाखिला  दिलवा दिया. किरोडीमल जी के दोनो बेटे सरकारी स्कूल मे पढते थे अब. गोलू अपने बडे भाई दीपक के साथ स्कूल जाता था. गोलू पढाई मे बहुत अच्छा रहा है . किरोडीमल जी के विचार बडे ही सार्थक हुआ करते थे . उनका मानना था कि सरकारी स्कूल के टीचर ज्यादा अच्छे है वजाय प्राईवेट स्कूल के टीचरो से और सच भी है वो तो खुद नही पढाते है. गावो के सरकारी स्कूल के टीचर आराम ज्यादा करते है पढाते कम है. कुछ टीचर होते है जो अच्छे से अपनी ड्यूटी करते है

       खैर. इसी सरकारी स्कूल से राज्य की वरियता सूची मे नाम आया एक लडके का . कक्षा 12वीं के गोलू का. कला वर्ग मे राज्य मे प्रथम था 96.15 प्रतिशत के साथ. गोलू सामान्य किसान का बेटा था. तब सभी अखबार बालो ने झोपडी से निकला हीरा कहा था. पूरा गाव गर्व महसूस कर रहा था. किरोडीमल जी का सर फक्र से ऊंचा था कि बेटे ने आज एक अलग पहचान बनाई है. बाप का नाम रोशन कर दिया. समाज मे अलग ही इज्जत, पहचान बन चुकी थी उसकी. वो वक्त किरोडीमल जी के परिवार के जीवन का बेहतरीन वक्त था. उस वक्त गोलू ने सपना भी बडा देखा था कि आईएएस बनना है अब. पिता ने भी ठान लिया था कि जो सपना बेटे ने देखा है जान लगा दुंगा पूरा करने मे.
         गोलू ने राजस्थान यूनिवर्सिटी कालेज से ग्रजुएशन किया. जयपुर के मीणा हॉस्टल मे रहकर पढाई की. विषयो पर ऐसी पकड कि साथी God Gift कहते थे. उसका आईएएस बनने का जुनून कम नही हुआ .ग्रजुएशन की पहली साल से आईएएस की पढाई जारी कर दी.उसकी ग्रजुएशन खत्म होने के बाद वो दिल्ली चला गया और यूपीएससी का एक्जाम दिया .वह पहले एक्जाम मे सलेक्ट होकर इंटरव्यू तक पहूंच गया जो कि अपने आप मे बडी सफलता थी . उसका सपना था पहले ही एक्जाम मे फाइनल सलेक्ट होना. पर ये सपना उसका टूट गया था .उसे इंटरव्यू मे बाहर कर दिया गया.यही से उसके सपने मात खाते चले गये थे. पता नही क्यू लडका तो पढाई मे भी हीरा और दिल से भी हीरा था पर किस्मत ने उसकी उल्टी गिनतिया चालू कर दी थी . उसने फिर एक्जाम दिया सिलेक्शन नही हुआ.  3 यूपीएससी एक्जाम देने के बाद उसने पहला आरएएस का भी एक्जाम दिया और उसमे इंटरव्यू के लिए सलेक्ट हुआ. उसका 4 वीं बार आईएस का मेन्स दिया और दिल्ली से कमरा खाली करके गाव आ गया था. एक तो उसको ये आत्मविश्वास था की इस बार इंटरव्यू मे भी मुझे कोई नही रोक सकता. क्यूकी मेन्स का पेपर उसका बहुत अच्छे से हो गया था. दूसरा अब आरएएस का भी इंटरव्यू था जो उसे अब देना था कि आईएएस जॉब के बाद दे लूंगा. उसका जुनून गडबडा सा गया था. इतनी सारी असफ़लता और घर के हालात देखकर क्यूकी वो सिर्फ़ किसान का बेटा था किसी आईएएस या आईपीएस का बेटा नही जो पैसो की टेंशन नी होती. सब पैसा साहूकारों से आता था. सबको विश्वास था कि लडका एक दिन कलेक्टर बनेगा और पूरा हिसाब बराबर कर देगा. साहूकार सोचते थे कि दिन और रात तो हमारे आते है इसका तो जमाना आयेगा. इसलिए किरोडीमल जी को जितने चाहिये मिल जाये थे.
               दिसंबर 2014 की बात है उसका मेन्स का लास्ट एक्जाम रविवार को हो गया था।  सोमवार को वो कमरा खाली करके घर आ गया था. गाव मे मित्र 2-3 थे बस गिने चुने उन्ही के घर सारा दिन-रात निकल जाता था उसका.मंगलवार शाम को वह दोस्त के घर से दोनो अपने घर चले गये. टीवी देख रहे थे सब करीब 8 बजे शाम को. गोलू का मोबाईल डिस्चार्ज हो गया था. वो टीवी के प्लग मे ही मोबाईल का चार्जर लगाने लग गया. नही लगा चार्जर. थोडा दाब देकर लगाना चाहा तभी एक झटका लगा और जमीन पर धडाम से गिर पडा. सब घरबाले उठाने को भागे . जीप बुलाई डॉक्टर के पास ले के गये सिर्फ 3 किमी था डॉक्टर. पहुचते ही I'm sorry बोल दिया डॉक्टर साब ने.
          उस दिन समझ आया कि किस्मत बडी कुत्ती चीज है साली कभी भी पलट जाती है.

(यह मेरे गाव की सत्य घटना है.)

इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...