रविवार, 23 दिसंबर 2018

कटकड की थाई

#कटकड_की_थांई

               कटकड गाव की आबादी करीब 10000 है! चारो तरफ़ 12 गावो को छूता है ...  जो की एक बड़े गावो की गिनती मे आता है...  हमारे गाव के आसपास 10-12 किमी मे बड़े गावो मे गिने जाने वाले कटकड... खंडीप...  पीलौदा... झारेडा मुख्य गाव है शायद एक - दो मै भूल भी रहा हू ! इन सभी बड़े गावो मे मैने एकता कम ही देखी है!  एसा कम ही हुआ है जब पूरा गाव ...एक कार्यक्रम मे ...एक जाजम पर बैठा हो ! जाहिर सी बात है जितने लोग उतने विचार अब सबके विचार एक जैसे तो नही हो सकते इसलिये ये सब होता रहा है और बहुत बार एसा भी हो चुका है जब ये सब गाव बड़े - छोटे एक साथ मिलकर खड़े हुये है और मिशाल कायम की है!
           हमारे गावो के संगठन मे कुल 28 गाव गिने जाते है जिनमे 24 जगरवाडो के और 4 गाव मच्या गोत्र के है ! इन सबमे कटकड को बडा माना जाता रहा है इसीलिये इस अट्ठाईसा को जब भी एकत्रित करना हो तो कटकड मे किया जाता है और इसी वजह से कटकड को इनका high court  कहा जाता है! किसी भी मसले को सुलझाना हो जो सिर्फ़ समन्धित गाव से नियन्त्रित होना मुश्किल हो तब ये पूरे 28 गाव एक साथ कटकड गाव मे बैठक करते है और मसला सुलझाया जाता रहा है!  फ़ैसला पन्च पटेल करते रहे है! जिनको जो सही लगता है करते रहे है और बाकी सब लोग उनके इस फ़ैसले को मानते रहे है!
      कटकड मे एक #थांई है जो बड़ी प्रसिद्ध रही है मीणा समाज मे... अपने अलौकिक फ़ैसलो के कारण!  #कटकड_की_थांई पर सिर्फ़ एक मुद्दे के लिये #पंचायत होती है वाकी के लिये #बड़_के_पेड़ के नीचे या सरकारी विद्यालय मे या सामुदायिक भवन पर जो की विद्यालय के सामने है... और वो मुद्दा है #हत्या ! घटना के बाद एक रात भी हत्यारे को गाव मे नही रुकने देते! #जगरवाडो का खून गर्म होता है! गुस्सा मे बहुतो को हत्या का पाप चढ़ा है! इसके बारे मे अहम बात बताता हू जो आजकल के युवाओ को शायद पता भी नही होगा हमे भी ये बाते विरासत मे मिलती है #थांई पर जब तक #फ़ैसला नही होता तब तक ...ना तो कोई पानी पीता है... ना चाय... ना बीड़ी हुक्का ... ये सब तो है ही और...  जब तक फ़ैसला नही होता तब तक वहा से कोई खडा भी नही होता ...चाहे दूसरा दिन निकल आये ...और एसा पहले कई बार हो चुका है रात होने पर थाई पर गैस /लालटेनो से उजाला किया गया... रात को 2-3 बजे तक पंचायत चल रही है!
           आज भी वही #नियम है आज भी उतनी ही शिद्दत से फ़ैसले होते रहे है ! परंतु अब लोगो मे वो भावना ही नही रही समाज की एकता के प्रति जो पहले होती थी!  आजकल सब इतने पढ लिख गये है की #विरासत मे जो चीजे मिलती रही है जिनका कोई तौल नही है उनको अपनाने से साफ़ #इंकार करते है! समाज को आगे बढ़ना चाहिये पर इतना भी नही की खुद की #संस्कृति भूल जाये!  #समाजकन्टक हर जगह जिन्हौने यह काम बखूबी किया है!  युवाओ को समाज के ही #विरुद्ध खडा किया है!इस देश के #मूलनिवासीयो मे हमारी गिनती है जो बाहर से आयी प्रजातियो के चक्कर मे हमारी अपनी प्रजाति के #चिन्ह मिटा रहे है!

एक बात और...
बुजुर्गो के माथे की एक एक लकीर पर हजार हजार अनुभव होते है उनके पास बैठने भर से मन आनंदित हो जाता है उनकी जिन्दगी के किस्सों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है ! शायद इतना कि हम हमारे सम्पूर्ण जीवन मे नही सीख पाये!

R Rinku Meena

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