रविवार, 29 अप्रैल 2018

कब्र मे दफन इश्क

जो तूने किया कोई गंवारा नही.
तूने भुला दिया कोई गंवारा नही
काश कब्रिस्तान तक साथ आ जाती
रूह तो तुझमे समाई है बदन भी दफन करवा जाती

आज दूसरी सुुुबह है मेरी कब्र के अन्दर
अब बदबू आने लगी है यहाां मुझे
मेरी जान अटकी है इन हड्डियों के ढांचे मे
आ जाती और रिहा कर देेेती मुझे

कब्र से तो चांंदनी भी नही दिखती जिसे निहारता
कोई अपना पराया भी नही जिसे दास्तां ए दर्द सुनाता
अब बदन मे बचा नही है कुछ भी सब गल गया
पर पता नही क्यू दिल अब भी नहीं गल पाया


शायद ये दिल मेेेरा नही है जो अभी तक बचा है
कोई तो है इसमे जो धक धक कर रहा है
पर क्या फर्कक  पडता है तुमको किसी बात का
तड़प  रहा है .पर दिल ही तो है गल रहा है



By दिल जयपुुुरी

इश्क की खुमारी

जब तक संभलता इश्क़ परवान चढ चुका था
मै प्यार की गहराई मे डूब चुका था
फिर एक दिन समझ आया की कहा आ गया हू मै
मोहब्बत के समंदर मे समा गया हू मै

पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी समझने मे
अब बस कुछ कदम दूर था इश्क मुकम्ममल होने मे
फिर क़यामत ने ये क्या बाजी पलटाई
मेरे इ़श्क ने मुकम्मल होने पहले पटकनी खा

मजबूरियों से आगे जाना होता है इश्क मे हमेशा
अब ये बात उस पगली की समझ मे थोडी आयेगी
मै नही जाता इतने आगे जितना जा चुका था
गर पता होता दिलरुबा मजबूरियों के सहारे बेबफा हो जायेगी

कहती थी कैसे रह पाउंगी तुुम बिन. तुुुुझमे तो मेरी रूह का बास है
कभी दूर मत जाना पगले तेरी हर सांस से मेेेरी जिदगी की आस है
पता नही अब क्या  हो गया अचानक कि मै आम हो गया हूूं
जो कहती थी कभी कि बस एक तू ही तो खास है

खैर कोई बात नही जो रंग तूने दिखलाया है
मेरे इश्क की बढ़ती खुमारी को गिराया है
कभी देखता था मै तेरे मेरे सपने
सबको आइने की तरह तोडकर गिराया है

तू तो नही निभा पाई उम्रभर इस दोस्ताने को
फिर भी कैसे तू  रूसवा हो गई नही बताऊंगा जमाने को

अब तो बस  क्या रह गया है जिंदगी मे .
तेरी जिंदगी संभाल तू तेरी मजबूूूुरीयो के  साथ
मै तो अब कही दूूर चला   जाउंगा
कुछ तेरी बाते कुछ ना भूलने वाली यादो के साथ


जब तक संभलता इश्क़ परवान चढ चुका था
मै प्यार की गहराई मे डूब चुका था।  .


By दिल जयपुुुरी

बहुत याद आता है

बहुत याद आता है वो रातभर बाते करना

जब तुम सारे दिन की बाते शेेेेयर करती 
सारा वक्त बस तेरी बाते सुनते निकल जाता
वो रातभर तेेेरा रूठना मेरा मनाना मेरा रूठना तेरा मनाना 


जब तुम अक्सर कहती " कैसे रह पाउंंगी तुम बिन"
अब भी ऐसा लगता है मानों बस अभी कहा है
वो रातभर तेेेेरा शायरीया सुनाना और मेरा उनको सीरियस नही लेना

वो शाम को जल्दी खाना खाकर तेरे फोन का इन्तजार करना
जिस रात फोन नही आता नींद नही आती थी. तुझे भी पता है
वो रातभर हॉस्टल कि छत पर बाते करते इधर उधर घूूूूमना

ठण्डी रात मे भी बेपरवाह होकर बाते करना 
वो तेरा मेरे नाम की डेयरी मिल्क खाना
वो तेरे हाथ पर मेेेरा नाम गुुुुदवाना .

बहुत याद आता है तेरा वो कातिलाना मुस्कुराना 
और मेरा तेरी मुस्कान पर हर बार दिल हार जाना


कल और आज

                कल और आज.      (By दिल जयपुरी)


कल सुूकून मिलता था जिन्हे देखकर
आज उन्हे देखते ही सहम जाता हूं

कल अपना वजूद उनमे तलाशा था मैने
आज खु़द टूटे ख्वाबों का दरीया हो गया हू

कल बोले थे वो हमारे नाम से उनकी धडकने चलती है
आज खुद को सडक पर बिखरे सूखे पत्तो सा पाया हूूं

कल तक कदम कदम पर साथ थे तो हर मंजिल पास थी
आज अकेले चलता हूं तो रास्ते लम्बे हो जाते है

कल तुम साथ थी तो जिदगी आसान थी
आज उलझनें पीछा छोडने का नाम नहीं लेतीं.

मेरी बैचैनी

                         मेरी बैचैनी.     ( by दिल जयपुरी)


तुझे देखू तो दिल मे हलचल सी मच जाती है
तुझे ना देखूं तो दिल बैेचैन सा रहता है

तेरे जाने के बाद वीरान सी हो गई है जिंदगी
तेरे ना होने से कुछ अजीब सा महसूस होता है

तुम थी तो सारी दुनिया मेरे साथ थी
अब जब तुम नही हो तो खुद ही खुद के साथ नही

तेरी झुकती नजरो मे कोई जादू सा था जो मदहोश करता
अब तेरी एक झलक को दिल बैेचैन सा रहता है

हां मै नासमझ था जो तुमको समझ नही पाया
अब जब तुम नही हो तो सब समझ आ रहा है.


इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...