बहुत याद आता है वो रातभर बाते करना
जब तुम सारे दिन की बाते शेेेेयर करती
सारा वक्त बस तेरी बाते सुनते निकल जाता
वो रातभर तेेेरा रूठना मेरा मनाना मेरा रूठना तेरा मनाना
जब तुम अक्सर कहती " कैसे रह पाउंंगी तुम बिन"
अब भी ऐसा लगता है मानों बस अभी कहा है
वो रातभर तेेेेरा शायरीया सुनाना और मेरा उनको सीरियस नही लेना
वो शाम को जल्दी खाना खाकर तेरे फोन का इन्तजार करना
जिस रात फोन नही आता नींद नही आती थी. तुझे भी पता है
वो रातभर हॉस्टल कि छत पर बाते करते इधर उधर घूूूूमना
ठण्डी रात मे भी बेपरवाह होकर बाते करना
वो तेरा मेरे नाम की डेयरी मिल्क खाना
वो तेरे हाथ पर मेेेरा नाम गुुुुदवाना .
बहुत याद आता है तेरा वो कातिलाना मुस्कुराना
और मेरा तेरी मुस्कान पर हर बार दिल हार जाना
2 टिप्पणियां:
भाई रुलाएगा क्या।
बहुत ही शानदार लिखा है।
धन्यवाद मित्र
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