कल और आज. (By दिल जयपुरी)
कल सुूकून मिलता था जिन्हे देखकर
आज उन्हे देखते ही सहम जाता हूं
कल अपना वजूद उनमे तलाशा था मैने
आज खु़द टूटे ख्वाबों का दरीया हो गया हू
कल बोले थे वो हमारे नाम से उनकी धडकने चलती है
आज खुद को सडक पर बिखरे सूखे पत्तो सा पाया हूूं
कल तक कदम कदम पर साथ थे तो हर मंजिल पास थी
आज अकेले चलता हूं तो रास्ते लम्बे हो जाते है
कल तुम साथ थी तो जिदगी आसान थी
आज उलझनें पीछा छोडने का नाम नहीं लेतीं.
कल सुूकून मिलता था जिन्हे देखकर
आज उन्हे देखते ही सहम जाता हूं
कल अपना वजूद उनमे तलाशा था मैने
आज खु़द टूटे ख्वाबों का दरीया हो गया हू
कल बोले थे वो हमारे नाम से उनकी धडकने चलती है
आज खुद को सडक पर बिखरे सूखे पत्तो सा पाया हूूं
कल तक कदम कदम पर साथ थे तो हर मंजिल पास थी
आज अकेले चलता हूं तो रास्ते लम्बे हो जाते है
कल तुम साथ थी तो जिदगी आसान थी
आज उलझनें पीछा छोडने का नाम नहीं लेतीं.
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