बुधवार, 26 दिसंबर 2018

इंतजार है तेरा...

आज थोडा तन्हा हू पर इंतजार है तेरा
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा
आज तू नही आयेगी जानता हू....
आज तू नही आयेगी जानता हू...
                .... फ़िर भी इंतजार है तेरा
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा

सहेली से बतिया रही हू बहाना अच्छा है
पर हर बात पे लगता है मेरा यार सच्चा है
हा... एक बात जान लो बरखुरदार...
हा... एक बात जान लो बरखुरदार...
खलता है यू बेपरवाही से पेश आना तेरा
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा
आज थोड़ा तन्हा हू पर इंतजार है तेरा

कुछ किस्से हमारे प्यार के भी सुन लो
प्यार हुआ है तो जरा ख्वाव भी बुन लो
दर्द की गुंजाईश तो नही रखते....
दर्द की गुन्जाईश तो नही रखते....
बड़े गुरुरदार हो तुम और ये कमबख्त दिल तेरा
फ़िर भी ........
तू पहला प्यार था पहला प्यार है मेरा
आज थोडा तन्हा हू पर इंतजार है तेरा. 

नयी दोस्त i

एक  दिन एसे ही Hiiii  भेज दिया था ,उधर से reply आ गया
उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

पता भी नही female ID मे female है या male
पर नाम से attrect हुआ तो बात करने का मन किया
बहरहाल उसके बार बार reply से excited हुआ
फ़िर रोज GM GE का सिलसिला सा हो गया
ये उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

बातो का माजरा कुछ यहा तक पहुंचा
बाबा पगलू ओये होये कहर ढा रहे थे
वैसे तो सख्त हू पर फ़र्क तो पड़ता है
प्यार है जनाब पत्थर भी पिघलता है

कल की बात है online थोड़ा लेट आयी
मन थोडा उदास हुआ पर सभलना पड़ता है
लड़कियों के आगे थोडा सख्त तो होना पड़ता है
बार बार msg करती रह्ती या कुछ और था पता नही
मुझे भी उम्मीद नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

गजव तो तब हुआ जब love react आने लगा
हर बात पर बाबा -बाबा,  पगलू -पगलू  होने लगा
लगता है उसको भी दिलचस्पी थी जो मै समझा नही
मेरे हर msg से उसकी मुस्कान बढ़ने लगी थी
ये उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी

खैर कोई बात नही मै दिल पर नही लेता
लड़कियों के लाखो दिवाने होते है सो ध्यान नही देता
पर फ़िर भी कुछ तो है जो वो भी intrest दिखाती है
इसकी भी उम्मीद तो नही थी पर नाम से मोहब्बत थी 

रविवार, 23 दिसंबर 2018

कटकड की थाई

#कटकड_की_थांई

               कटकड गाव की आबादी करीब 10000 है! चारो तरफ़ 12 गावो को छूता है ...  जो की एक बड़े गावो की गिनती मे आता है...  हमारे गाव के आसपास 10-12 किमी मे बड़े गावो मे गिने जाने वाले कटकड... खंडीप...  पीलौदा... झारेडा मुख्य गाव है शायद एक - दो मै भूल भी रहा हू ! इन सभी बड़े गावो मे मैने एकता कम ही देखी है!  एसा कम ही हुआ है जब पूरा गाव ...एक कार्यक्रम मे ...एक जाजम पर बैठा हो ! जाहिर सी बात है जितने लोग उतने विचार अब सबके विचार एक जैसे तो नही हो सकते इसलिये ये सब होता रहा है और बहुत बार एसा भी हो चुका है जब ये सब गाव बड़े - छोटे एक साथ मिलकर खड़े हुये है और मिशाल कायम की है!
           हमारे गावो के संगठन मे कुल 28 गाव गिने जाते है जिनमे 24 जगरवाडो के और 4 गाव मच्या गोत्र के है ! इन सबमे कटकड को बडा माना जाता रहा है इसीलिये इस अट्ठाईसा को जब भी एकत्रित करना हो तो कटकड मे किया जाता है और इसी वजह से कटकड को इनका high court  कहा जाता है! किसी भी मसले को सुलझाना हो जो सिर्फ़ समन्धित गाव से नियन्त्रित होना मुश्किल हो तब ये पूरे 28 गाव एक साथ कटकड गाव मे बैठक करते है और मसला सुलझाया जाता रहा है!  फ़ैसला पन्च पटेल करते रहे है! जिनको जो सही लगता है करते रहे है और बाकी सब लोग उनके इस फ़ैसले को मानते रहे है!
      कटकड मे एक #थांई है जो बड़ी प्रसिद्ध रही है मीणा समाज मे... अपने अलौकिक फ़ैसलो के कारण!  #कटकड_की_थांई पर सिर्फ़ एक मुद्दे के लिये #पंचायत होती है वाकी के लिये #बड़_के_पेड़ के नीचे या सरकारी विद्यालय मे या सामुदायिक भवन पर जो की विद्यालय के सामने है... और वो मुद्दा है #हत्या ! घटना के बाद एक रात भी हत्यारे को गाव मे नही रुकने देते! #जगरवाडो का खून गर्म होता है! गुस्सा मे बहुतो को हत्या का पाप चढ़ा है! इसके बारे मे अहम बात बताता हू जो आजकल के युवाओ को शायद पता भी नही होगा हमे भी ये बाते विरासत मे मिलती है #थांई पर जब तक #फ़ैसला नही होता तब तक ...ना तो कोई पानी पीता है... ना चाय... ना बीड़ी हुक्का ... ये सब तो है ही और...  जब तक फ़ैसला नही होता तब तक वहा से कोई खडा भी नही होता ...चाहे दूसरा दिन निकल आये ...और एसा पहले कई बार हो चुका है रात होने पर थाई पर गैस /लालटेनो से उजाला किया गया... रात को 2-3 बजे तक पंचायत चल रही है!
           आज भी वही #नियम है आज भी उतनी ही शिद्दत से फ़ैसले होते रहे है ! परंतु अब लोगो मे वो भावना ही नही रही समाज की एकता के प्रति जो पहले होती थी!  आजकल सब इतने पढ लिख गये है की #विरासत मे जो चीजे मिलती रही है जिनका कोई तौल नही है उनको अपनाने से साफ़ #इंकार करते है! समाज को आगे बढ़ना चाहिये पर इतना भी नही की खुद की #संस्कृति भूल जाये!  #समाजकन्टक हर जगह जिन्हौने यह काम बखूबी किया है!  युवाओ को समाज के ही #विरुद्ध खडा किया है!इस देश के #मूलनिवासीयो मे हमारी गिनती है जो बाहर से आयी प्रजातियो के चक्कर मे हमारी अपनी प्रजाति के #चिन्ह मिटा रहे है!

एक बात और...
बुजुर्गो के माथे की एक एक लकीर पर हजार हजार अनुभव होते है उनके पास बैठने भर से मन आनंदित हो जाता है उनकी जिन्दगी के किस्सों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है ! शायद इतना कि हम हमारे सम्पूर्ण जीवन मे नही सीख पाये!

R Rinku Meena

शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

पिता

#पिता

                   जब हमारी गाव मे पढाई पूरी हो जाती है तो अपने सपनो को उडान देने के लिए हम जयपुर या दिल्ली जैसे शहरो मे पढाई जारी करना चाहते है खासकर के हम मीणाओ के लडके लड़कियां. किसी ने कोई सपना देखा होता है किसी ने कोई सपना देखा होता है वास्तविकता मे वो सपने हमने सिर्फ देखे होते है उनको पूरा कराने का असली जुनून तो पिता की आँखों मे होता है .  वो सपना पूरा करने का लक्ष्य तो पिता ने निश्चित किया होता है हमसे ज्यादा. और एक मध्यम वर्गीय या गरीब परिवार मीणाओ के है ज्यादातर. सभी मीणाओ के घर मे कस्टम कलेक्टर आईपीएस नही है . है भी तो वो भी ऐसी ही स्थिति से गुजरे है . बात ये है कि जब हम पढाई जारी करते है शहर मे तो कमरा कॉलेज और कोचिंग की फीस पिता देता है और हमको ये पता नही होता कि उसने कहा से रुपयो की व्यवस्था की है . हमारा पिता ये नही चाहता कि हमको इन सब का पता चले क्यूकी वो सोचते है कि ये बात हमको मायने नही रखती , हमे सिर्फ पढाई ही मायने रखनी चाहिये. कोचिंग नही छूटती कभी मैथ की तो कभी इंग्लिश की ...तो कभी रीजनिंग की तो कभी साइंस की .....कभी रेल्वे के लिए तो कभी बैंक के लिए ..तो कभी एस एस सी के लिए. सबका कोर्स अलग अलग . कुछ लडके हर कम्पीटिशन की परीक्षा के लिए हर बार कोचिंग करते है . फीस 6000 से 25000/30000 पर हमको पता नही है पैसा कहा से आ रहा है . हमने तो बस पापा को बोला था . पापा कमरा का किराया देना है पापा मैथ की कोचिंग की फीस देनी है पापा खर्चा को पैसे खत्म होगे पापा पापा पापा...Always. और पापा के शब्द...बेटे कितने चाहिए. बेटा कहेगा 10000 बस. पापा कहेगा परसों डला दुंगा तो चलेगा . बेटा कहेगा पापा कल कोचिंग मे बैठने नही देगा टीचर. ठीक है बेटा दोपहर तक डला दुंगा.  दोपहर को फिस जमा हो जायेगी बेटे की अब बिना टेंशन के पढाई जारी रख सकेगा.
            कुछ वर्षो बाद जब बेटा कलेक्टर/कस्टम/जेइन/फईन/मास्टर/गैंगमेन/चपरासी कुछ भी बन जायेगा. पिता को लगेगा मेरा तो जीवन सफल हो गया . गाव मे मूंछो में ताव देकर घूमता है अब पिता क्यूकी उसको बेटे से जो उम्मीद थी पूरी कर दी .
              इन मूंछो के ताव को देखकर एक दिन जब बोहरा घर आता है कि ला अब तो गढ तोड दिया तेरे छोरे ने भाई म्हारा भी हिसाब कर लें . तब पिता कहता है कि हा भाई आओ कर लेते है बहुत शुक्रिया जो तुमने मेरा साथ दिया . हिसाब मे पता चलता है कर्जा 4 लाख/5 लाख/ 6 लाख /8 लाख जुडता है . बेटे को कहा जाता है कि बेटा पैसा देना है दूसरे का और बेटा के शब्द होते है - कौनसा पैसा . मैने तो अकेले खर्च नही किये पूरे. मै तो बस कुछेक लाख एडजस्ट कर सकता हूं खींच के .बाकी आप देख लो  . ये शब्द सुनकर बाप दिल बै़ठ जाता है . वो नि:शब्द हो जाता है .
                    अब उस कलेक्टर साब को क्या पता कि जो पैसे उसे भेजे जाते थे वो घर मे पेड से नही तोडे जाते थे. खेती मे इतना भी नही होता कि खाद बीज का खर्च चल सके . उसकी बीमार मां को जिन्दा भी तो आजकल की अंग्रेज़ी दवाईयो ने रखा है जो कितनी महंगी होती है उसे पता नही. उस बेटे को ये भी पता नही कि उसके छोटे भाई बहन को भी तो पढाया जा रहा है जिनका खर्च देने के लिए सडक पर कोई दान पेटी नही है . शायद उस बेटे को ये भी पता नही होगा कि 1 लाख रूपये का 3 साल मे 2 लाख हो जाता है जो कि 2 रूपिया प्रति सैकडा है तो वरना कुछ तो इससे भी ज्यादा मे बोहरगित करते है . और उसे शहर मे शानदार वक्त बिताते 5-8 साल हो जाते है . वो भूल जाता है वो महंगे महंगे कपडे वो शानदार एक हाथ लम्बा मोबाईल. परिवार की हर जरूरत पूरी की थी जितना कमा सकता था उससे घर का खर्च चला लेता था.  और क्या बताऊँ अब यार सब कुछ तो कह दिया.....

दुनिया मे पिता से बढा सलाहाकार; मार्गदर्शक; साथी; हर्षवर्धन करने वाला कोई नही होता ।
जिनके सर पर पिता का साया है वो भाग्यशाली है जिनके पर नही है उनको कामयाब व्यक्ति बनकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते है.

एक बात सीखी है जिंदगी मे ...कुछ भी करूगा पर ऐसा कुछ नही करूंगा जिससे पिता के दिल को ठेस पहुंचे. और गर्व है अब तक तो ऐसा नहीं किया.

और मै सिर्फ आज याद नही कर रहा रोज पिता को याद करता हूं . आज तो #असलियत लिखी है कुछ लोगो की .

उनको समर्पित है जिनके घर मे मूंसे ग्यारस कर रहे है और शहर मे R15 के पीछे भायेली बैठकर घूम री है ।

किस्मत

#किस्मत

एक लडका था जो 5-6वीं कक्षा तक गाव के ही एक प्राइवेट स्कूल मे पढा था.उसके बाद उसे सरकारी स्कूल मे दाखिला  दिलवा दिया. किरोडीमल जी के दोनो बेटे सरकारी स्कूल मे पढते थे अब. गोलू अपने बडे भाई दीपक के साथ स्कूल जाता था. गोलू पढाई मे बहुत अच्छा रहा है . किरोडीमल जी के विचार बडे ही सार्थक हुआ करते थे . उनका मानना था कि सरकारी स्कूल के टीचर ज्यादा अच्छे है वजाय प्राईवेट स्कूल के टीचरो से और सच भी है वो तो खुद नही पढाते है. गावो के सरकारी स्कूल के टीचर आराम ज्यादा करते है पढाते कम है. कुछ टीचर होते है जो अच्छे से अपनी ड्यूटी करते है

       खैर. इसी सरकारी स्कूल से राज्य की वरियता सूची मे नाम आया एक लडके का . कक्षा 12वीं के गोलू का. कला वर्ग मे राज्य मे प्रथम था 96.15 प्रतिशत के साथ. गोलू सामान्य किसान का बेटा था. तब सभी अखबार बालो ने झोपडी से निकला हीरा कहा था. पूरा गाव गर्व महसूस कर रहा था. किरोडीमल जी का सर फक्र से ऊंचा था कि बेटे ने आज एक अलग पहचान बनाई है. बाप का नाम रोशन कर दिया. समाज मे अलग ही इज्जत, पहचान बन चुकी थी उसकी. वो वक्त किरोडीमल जी के परिवार के जीवन का बेहतरीन वक्त था. उस वक्त गोलू ने सपना भी बडा देखा था कि आईएएस बनना है अब. पिता ने भी ठान लिया था कि जो सपना बेटे ने देखा है जान लगा दुंगा पूरा करने मे.
         गोलू ने राजस्थान यूनिवर्सिटी कालेज से ग्रजुएशन किया. जयपुर के मीणा हॉस्टल मे रहकर पढाई की. विषयो पर ऐसी पकड कि साथी God Gift कहते थे. उसका आईएएस बनने का जुनून कम नही हुआ .ग्रजुएशन की पहली साल से आईएएस की पढाई जारी कर दी.उसकी ग्रजुएशन खत्म होने के बाद वो दिल्ली चला गया और यूपीएससी का एक्जाम दिया .वह पहले एक्जाम मे सलेक्ट होकर इंटरव्यू तक पहूंच गया जो कि अपने आप मे बडी सफलता थी . उसका सपना था पहले ही एक्जाम मे फाइनल सलेक्ट होना. पर ये सपना उसका टूट गया था .उसे इंटरव्यू मे बाहर कर दिया गया.यही से उसके सपने मात खाते चले गये थे. पता नही क्यू लडका तो पढाई मे भी हीरा और दिल से भी हीरा था पर किस्मत ने उसकी उल्टी गिनतिया चालू कर दी थी . उसने फिर एक्जाम दिया सिलेक्शन नही हुआ.  3 यूपीएससी एक्जाम देने के बाद उसने पहला आरएएस का भी एक्जाम दिया और उसमे इंटरव्यू के लिए सलेक्ट हुआ. उसका 4 वीं बार आईएस का मेन्स दिया और दिल्ली से कमरा खाली करके गाव आ गया था. एक तो उसको ये आत्मविश्वास था की इस बार इंटरव्यू मे भी मुझे कोई नही रोक सकता. क्यूकी मेन्स का पेपर उसका बहुत अच्छे से हो गया था. दूसरा अब आरएएस का भी इंटरव्यू था जो उसे अब देना था कि आईएएस जॉब के बाद दे लूंगा. उसका जुनून गडबडा सा गया था. इतनी सारी असफ़लता और घर के हालात देखकर क्यूकी वो सिर्फ़ किसान का बेटा था किसी आईएएस या आईपीएस का बेटा नही जो पैसो की टेंशन नी होती. सब पैसा साहूकारों से आता था. सबको विश्वास था कि लडका एक दिन कलेक्टर बनेगा और पूरा हिसाब बराबर कर देगा. साहूकार सोचते थे कि दिन और रात तो हमारे आते है इसका तो जमाना आयेगा. इसलिए किरोडीमल जी को जितने चाहिये मिल जाये थे.
               दिसंबर 2014 की बात है उसका मेन्स का लास्ट एक्जाम रविवार को हो गया था।  सोमवार को वो कमरा खाली करके घर आ गया था. गाव मे मित्र 2-3 थे बस गिने चुने उन्ही के घर सारा दिन-रात निकल जाता था उसका.मंगलवार शाम को वह दोस्त के घर से दोनो अपने घर चले गये. टीवी देख रहे थे सब करीब 8 बजे शाम को. गोलू का मोबाईल डिस्चार्ज हो गया था. वो टीवी के प्लग मे ही मोबाईल का चार्जर लगाने लग गया. नही लगा चार्जर. थोडा दाब देकर लगाना चाहा तभी एक झटका लगा और जमीन पर धडाम से गिर पडा. सब घरबाले उठाने को भागे . जीप बुलाई डॉक्टर के पास ले के गये सिर्फ 3 किमी था डॉक्टर. पहुचते ही I'm sorry बोल दिया डॉक्टर साब ने.
          उस दिन समझ आया कि किस्मत बडी कुत्ती चीज है साली कभी भी पलट जाती है.

(यह मेरे गाव की सत्य घटना है.)

सोमवार, 18 जून 2018

जय किसान

#देश
             देश मे सैकडो बडे बड़े मन्दिर है जिनमे रूपयो की गिनती के लिए मशीने लगी है . कुछ मन्दिर तो ऐसे है जिनमे दान मे आया रूपया गिनने के लिए सरकार सरकारी कर्मचारियो को नियुक्त करती है । हर वर्ष अरबो खरबो का दान मन्दिरों मे आसानी से आ जाता है।  हर बडे मन्दिर पर सरकार का ताला भी है दान के टेण्डर मे से 30-70 प्रतिशत सरकार को जाता है बाकी का टेण्डर बाला ब्राहमण ले जाता है अपना कोठा भरने।
           एक नेता को किसी भी सरकारी कर्मचारी से अधिक वेतन मिलता है सुविधायें मिलयी है। नेताओ के बच्चे विदेशो मे रहकर पढाई कर रहे होंगे ।
            बैंक उद्योगपतियो को लोन इसलिए दे देता है क्यूकी वो बडे उद्यमी है । उनको कर्जा कितना भी बैंक दे सकता है ।उनके पूरे उद्योग की कीमत से ज्यादा बैंक लोन दे देते है।
             देश मे किसी भी सरकारी निर्माण पर निर्धारित धन मे से  केबल 40-60 प्रतिशत खर्च ही होगा और बाकी रूपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ जाता है।

#किसान
            किसान को फसले बोने के लिए पैसा नही मिल पाता . जहा मिलता है वहां ब्याज की दरे कमर तोडती है। ब्याज कुछ दिन मे इतना बढ जाता है कि वह चुका नही पाता . बडी दयनीय स्थिति बन जाती है .
              किसानो के बच्चे सरकारी स्कूल मे पढकर आगे बढते है । उनके खून मे किसानी है। किसान अपने बच्चो को प्राइवेट विद्यालय मे नही पढा पाता । जब बेटा पढाई करने शहर जाता है तब किसान कर्जा मे डूबा होता है पर फिर भी अपने बेटे को पढाता है कर्जा लेकर । उम्मीद के साथ की नौकरी लगने के बाद बेटा चुका देगा ।पर जगह नही निकलती है जॉब कैसे लगे।
               बैंक किसानों को लोन खेत के कागज गिरवी रखने के बाद देता है अगर लॉन ही चुका पाया तो खेत को बैंक निलाम कर देता है
               देश का 60-70% किसान आज भी कच्चे मकान मे रहता है ।

               #भारत किसान प्रधान देश है। खेती पर निर्भर है। देश मे किसानो को कोई राहत नही है इस समय . तमिलनाडु के किसान सूखे की मार झेल रहे है सरकार की तरफ से कोई कदम नही उठाये गये। तमिल किसानो ने संसद पर महिनों धरना दिया किसानो ने ना कोई मिडिया ने दिखाया ना किसी सरकार ने ध्यान दिया। सैकडो किसान आत्म हत्या करते है हर साल उनका कोई कर्ज माफ नही जाता।  ये दयनीय स्थिति ही तो है किसान की। मध्यप्रदेश मे महाराष्ट्र मे कितने किसान आत्म हत्या कर लेते है फिर भी सरकार को नेताओ को कोई फर्क नही पडता है । जबकी सरकार यह भूल रही है कि जिस दिन किसान का अनाज शहर नही गया उस दिन देश भूखो मरने की नौबत आ जायेगी । गुजरात राजस्थान हरियाणा ने अगर 1 दिन दूध दिल्ली नही भेजा तो दिल्ली मे मां बच्चो को पाश्चुरिकृत दूध पिलायेगी. जिससे पेट ठीक से नही भरता बच्चे का विकास तो दूर की बात है ।

                     #किसानो का अगर कर्जा माफ किया जाये तो उनमे फसल पैदा करमे का जज्बा रैदा हो।  सूखे इलाको को पानी की व्यवस्था हो जाये तो देश को जरूरत से ज्यादा अनाज मसाले पैदा हो। किसान की फसल का उचित दाम लगाया जाये तो उसकी गरीबी दूर हो सके ताकि वह भी अपने बच्चो के सपने पूरे कर सके।
जो देश खेती पर निर्भर हो और उसी को ठीक से नही कर सकें तो देश कैसे विकास कर सकता है । कैसे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी किसान की और देश की । किसान का साथ देने की जरूरत है उसका हौसला अफजाई करने की जरूरत है इस देश की रीढ है किसान। मै खुद किसान का बेटा हूं तो किसान की दशा को बेहतर समझता हूं मै भी काम करता हूं खेतो मे । मैंने भी अनाज खेतो मे उगा कर मंडी मे पहुचाया है .जहां मुझे कभी भी मेरी फसल का उचित दाम नही मिला । .
#खैर मै तो किसान के साथ था, साथ हूं और आजीवन रहूंगा।
#जय_किसान

रविवार, 17 जून 2018

असलियत 1

#पिता

                   जब हमारी गाव मे पढाई पूरी हो जाती है तो अपने सपनो को उडान देने के लिए हम जयपुर या दिल्ली जैसे शहरो मे पढाई जारी करना चाहते है खासकर के हम मीणाओ के लडके लड़कियां. किसी ने कोई सपना देखा होता है किसी ने कोई सपना देखा होता है वास्तविकता मे वो सपने हमने सिर्फ देखे होते है उनको पूरा कराने का असली जुनून तो पिता की आँखों मे होता है .  वो सपना पूरा करने का लक्ष्य तो पिता ने निश्चित किया होता है हमसे ज्यादा. और एक मध्यम वर्गीय या गरीब परिवार मीणाओ के है ज्यादातर. सभी मीणाओ के घर मे कस्टम कलेक्टर आईपीएस नही है . है भी तो वो भी ऐसी ही स्थिति से गुजरे है . बात ये है कि जब हम पढाई जारी करते है शहर मे तो कमरा कॉलेज और कोचिंग की फीस पिता देता है और हमको ये पता नही होता कि उसने कहा से रुपयो की व्यवस्था की है . हमारा पिता ये नही चाहता कि हमको इन सब का पता चले क्यूकी वो सोचते है कि ये बात हमको मायने नही रखती , हमे सिर्फ पढाई ही मायने रखनी चाहिये. कोचिंग नही छूटती कभी मैथ की तो कभी इंग्लिश की ...तो कभी रीजनिंग की तो कभी साइंस की .....कभी रेल्वे के लिए तो कभी बैंक के लिए ..तो कभी एस एस सी के लिए. सबका कोर्स अलग अलग . कुछ लडके हर कम्पीटिशन की परीक्षा के लिए हर बार कोचिंग करते है . फीस 6000 से 25000/30000 पर हमको पता नही है पैसा कहा से आ रहा है . हमने तो बस पापा को बोला था . पापा कमरा का किराया देना है पापा मैथ की कोचिंग की फीस देनी है पापा खर्चा को पैसे खत्म होगे पापा पापा पापा...Always. और पापा के शब्द...बेटे कितने चाहिए. बेटा कहेगा 10000 बस. पापा कहेगा परसों डला दुंगा तो चलेगा . बेटा कहेगा पापा कल कोचिंग मे बैठने नही देगा टीचर. ठीक है बेटा दोपहर तक डला दुंगा.  दोपहर को फिस जमा हो जायेगी बेटे की अब बिना टेंशन के पढाई जारी रख सकेगा.
            कुछ वर्षो बाद जब बेटा कलेक्टर/कस्टम/जेइन/फईन/मास्टर/गैंगमेन/चपरासी कुछ भी बन जायेगा. पिता को लगेगा मेरा तो जीवन सफल हो गया . गाव मे मूंछो में ताव देकर घूमता है अब पिता क्यूकी उसको बेटे से जो उम्मीद थी पूरी कर दी .
              इन मूंछो के ताव को देखकर एक दिन जब बोहरा घर आता है कि ला अब तो गढ तोड दिया तेरे छोरे ने भाई म्हारा भी हिसाब कर लें . तब पिता कहता है कि हा भाई आओ कर लेते है बहुत शुक्रिया जो तुमने मेरा साथ दिया . हिसाब मे पता चलता है कर्जा 4 लाख/5 लाख/ 6 लाख /8 लाख जुडता है . बेटे को कहा जाता है कि बेटा पैसा देना है दूसरे का और बेटा के शब्द होते है - कौनसा पैसा . मैने तो अकेले खर्च नही किये पूरे. मै तो बस कुछेक लाख एडजस्ट कर सकता हूं खींच के .बाकी आप देख लो  . ये शब्द सुनकर बाप दिल बै़ठ जाता है . वो नि:शब्द हो जाता है .
                    अब उस कलेक्टर साब को क्या पता कि जो पैसे उसे भेजे जाते थे वो घर मे पेड से नही तोडे जाते थे. खेती मे इतना भी नही होता कि खाद बीज का खर्च चल सके . उसकी बीमार मां को जिन्दा भी तो आजकल की अंग्रेज़ी दवाईयो ने रखा है जो कितनी महंगी होती है उसे पता नही. उस बेटे को ये भी पता नही कि उसके छोटे भाई बहन को भी तो पढाया जा रहा है जिनका खर्च देने के लिए सडक पर कोई दान पेटी नही है . शायद उस बेटे को ये भी पता नही होगा कि 1 लाख रूपये का 3 साल मे 2 लाख हो जाता है जो कि 2 रूपिया प्रति सैकडा है तो वरना कुछ तो इससे भी ज्यादा मे बोहरगित करते है . और उसे शहर मे शानदार वक्त बिताते 5-8 साल हो जाते है . वो भूल जाता है वो महंगे महंगे कपडे वो शानदार एक हाथ लम्बा मोबाईल. परिवार की हर जरूरत पूरी की थी जितना कमा सकता था उससे घर का खर्च चला लेता था.  और क्या बताऊँ अब यार सब कुछ तो कह दिया.....

दुनिया मे पिता से बढा सलाहाकार; मार्गदर्शक; साथी; हर्षवर्धन करने वाला कोई नही होता ।
जिनके सर पर पिता का साया है वो भाग्यशाली है जिनके पर नही है उनको कामयाब व्यक्ति बनकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते है.

एक बात सीखी है जिंदगी मे ...कुछ भी करूगा पर ऐसा कुछ नही करूंगा जिससे पिता के दिल को ठेस पहुंचे. और गर्व है अब तक तो ऐसा नहीं किया.

और मै सिर्फ आज याद नही कर रहा रोज पिता को याद करता हूं . आज तो #असलियत लिखी है कुछ लोगो की .

उनको समर्पित है जिनके घर मे मूंसे ग्यारस कर रहे है और शहर मे R15 के पीछे भायेली बैठकर घूम री है ।

इंतजार और बेरुखी

दशकभर का इंतजार और फिर उसका खत आया,  एक अरसे बाद आवाज सुनी और मैं सन्नाटे सा कंपाया।  फिर वाणीरस बरसा और मैं जैसे धोरों पर बादल इठलाया,  नाउ...