गुरुवार, 11 जून 2020

मोर्निंग थॅाट

#मोर्निंग_थॅाट
आज थोडा जल्दी उठ गया था सुबह. कोई खास वजह नही थी बस सबको देखा देखी कि अब मै भी देर से नही सोया करूंगा. गुनगुने पानी कुल्ला करने के बाद दूध लेने गया तौ देखा कि आज कब्रिस्तान के सामने वाले नसीर चाचा ने चाय की दुकान फिर से खोल ली है तकरीबन दो महीने बाद. पर इस माहौल मे बाहर चाय पीना कौन चाहेगा. सलाम नमस्ते हुए और बगल की दुकान से दूध लेकर आ गया. ग्रीन टी लेमन टी भी अक्सर खुद बनाकर पी लेता हू पर दूध की अदरक वाली चाय का कोई तोड नही. गाव मे मां छ: बजे ही हर रोज बिस्तर पर ही लाकर दे देती थी "बेटा चाय पी ले" और मै "मां नीचे रख दो बाद मे पी लूंगा" कह देता. इतना सुनने के बाद मां का प्यार तानो मे बदल जाता कि दस बज गये अब भी पडा है इस ताने मे ज्यादा प्यार महसूस होता आया है हमेशा से ही. और खडे होकर चाय कप उठाने को होता कि देखता मां अब भी कप लिए खडी हुई है." ले, पी ले. रोज रोज बिस्तर पे ही पुजता है राजाओ की तरह. शादी के बाद अपनी बीबी से पुज लिया करना बिस्तर मे ही, मेरे पे तो नही पूजा जायेगा जायेगा तू." और मां के ताने आखिर मे थोडा लंबा होने के बाद बंद हो जाते. हाय राम इतना लंबा ताना. मन ही मन मुस्कुराती मां के ताने मारते समय गजब का अभिनय दिखाती है गुस्से वाले भाव का.
 मै चाय पत्ती पानी गर्म चुका था और अदरक कूट कर डाली जा रही है. गाव मे भैंस के दूध की चाय और शहर मे पोलीथीन रूप मे भैंस है. पता नही कहा से आता है कैसे बनता है कैसा असर करता है स्वास्थ्य पर. कुछ भी पता नही पर फिर भी पिये जा रहे है क्यूकी दूसरा रास्ता भी नही होता शहरो को. दो कप चाय छान चुका और एक कप वरूण को दिया कल परसो से साथ ही रहता है. साथ काम करने वाले अक्सर दोस्त होते है. "चाय बढिया बनाता है तू" वरूण तारीफ कर रहा था या इशारा था कि बेटा रोज तू ही बनाया कर पता नही. पर मै सोच रहा था इतनी जल्दी उठकर अब क्या करूं पांच बजे उठने वाले लग क्या करते होंगे. गाव मे मां घर का काम संभालती है पिताजी खेतों पर हो आते है. शहर मे आदमी क्या करें खासकर वह जिसे दस बजे ऑफिस निकलना हो. मैने सोचा कि रसोई मे कुछ बनाकर किसी व्यंजन को पवित्र किया जाये पर शरीर बहुत आलसी है नही कर पायेगा मन बहुत तेज है मेरा. सबका होता है. आदमी का शरीर ही उसका दुश्मन होता है.
खैर मैने अपना पसंदीदा काम किताबे पढना पसंद किया और "द गर्ल ऑन द ट्रेक" एक अंग्रेजी किताब को उठाया और पढना शुरू कर दिया. मै हर उपन्यास मे हर कहानी मे एक खुद का किरदार ढूंढता हूं और मुख्य किरदार से संबंध कम ही रखता हू. ज्यादातर सहायक किरदार मे जीना मुझे ज्यादा पसंद है. "द गर्ल ऑन द ट्रेक" पेज पर पेज आगे बढ रही है और मै फिर से खुद का किरदार ढूंढ रहा हूं.

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