-खुद ही मे व्यस्त रहती हो ..?
-हा अब यही जीवन है...
- हा..पर क्यू...???
-पता नही...... !
....और हर बार की तरह फ़िर वो ही खामोशी जिसके बाद सवाल जबाब नही हो पाते. ना मन के बाहर ना ही मन के अंदर. चुप सा रह जाता है दिमाग भी दिल भी कि आगे क्या कहना है पता नही. पर सुन सके तो धीमी सांसो की आवाज भी दोनो तरफ़ सुकून दे रही होती है.
कहने सुनने को कुछ रह नही जाता जब इस तरह की सवाल जबाबी हो, पर यह आम नही लगती है इस छोटे से कन्वरसेशन मे अलग स्तर का अपनापन झलकता है. मोहब्बत मे यह होना लाजिमी है.
चौराहे पर चाय की दुकान के किनारे से कंडम ट्रैफ़िक पोलिस बूथ के बगल मे खडा खडा कई गोल्ड फ़्लैक फ़ूक चुका हू एक छः सौ एम एल की कोक के साथ. चाय जब काम नही करती है उस वक्त कोक और गोल्ड फ़्लैक का डैडली कोम्बिनेशन काम करता है. करीब डेढ़ घंटे से दीवार पे एक पैर लगाये गुजरती दुनिया को देख रहा हू सबको जल्दी है इतने समय मे एक भी एसा नही दिखा जिसने आराम से ओवरटेक किया हो. आंखे इस तरह ही लोगो को देखना परखना चाहती है कभी कभी. पूरी भावना और मान के साथ प्रेम करना सबके बस की बात नही है.
इंसान के अंदर एक और चीज होती है बदलाव ... जो कि जरुरी होता है पर मन का बदलना कहा तक सही है. परिस्थितिया बदलती है उसी के अनुसार इंसान का मन क्यू परिवर्तित हो जाता है हर किसी के लिये. बस यही उधेढबुन मन मे चल रही है. पर जबाब खुद के मन को दे नही पाया हू अभी तक. अक्सर यह होता ही है हम सबके साथ कि हमे हमारे ही सवालो के जबाब नही मिलते है और कुछ समय बाद उन सारे सवालो के संतुष्टी वाले जबाब हम खुद ही ढूँढ लेते है एसा भी होता है. मैने उससे कहा था कि एसा कुछ है नही कि मै बदल रहा हू बस समय कि मांग है कि थोडा थोडा हर जगह एडजस्ट करूं पर मुझसे पूरी तरह से या ठीक तरह से हो नही पा रहा है यह सब क्यूंकी मैने हमेशा खुद को हर तरह के समझौंतो से बाहर रखा है तो असल में मुझे पता नही है कि सवाल जबाब कैसे करते है खुद के साथ जिंदगी के इस वाले चेप्टर मे, पर जल्द ही सब ठीक कर लुंगा यह मेरा विश्वाव है खुद पर. तब तक मुझे मेरा बहुत ही शांत वाला स्वभाव जिन्दा रखना होगा. जो कि मेरे लिये बड़ी बात नही है.
शिकायत है नही कुछ बस यू ही मन मे कुछ भसड होती है तो थोडा बहुत फ़ालतू का लिखना ही सुकूनभरा एक हल है मेरे पास. फ़ालतू की उह पोह मे बबाल वाली मजाल नही कर पाता. क्यूकी मै भी इस जहा से भरपूर प्यार करता हू जिस तरह सब करते है. जिस तरह सब मुझे करते हैं मै भी सबको उतनी ही मुहोब्बत उतनी ही शिद्दत से करता हू. ये एवई वाली बात हो गयी आज तो अगली बार थोडा ढंग का लिखने की कोशिश रहेगी.
#दिल_जयपुरी #मोहब्बत #कोक_लवर😉
(Note:- लेखक किसी भी प्रकार के पेय पदार्थ तथा धूम्रपान का सेवन नही करता और ना ही सेवन करने के लिए प्रेरित करता है 😊😊)
-हा अब यही जीवन है...
- हा..पर क्यू...???
-पता नही...... !
....और हर बार की तरह फ़िर वो ही खामोशी जिसके बाद सवाल जबाब नही हो पाते. ना मन के बाहर ना ही मन के अंदर. चुप सा रह जाता है दिमाग भी दिल भी कि आगे क्या कहना है पता नही. पर सुन सके तो धीमी सांसो की आवाज भी दोनो तरफ़ सुकून दे रही होती है.
कहने सुनने को कुछ रह नही जाता जब इस तरह की सवाल जबाबी हो, पर यह आम नही लगती है इस छोटे से कन्वरसेशन मे अलग स्तर का अपनापन झलकता है. मोहब्बत मे यह होना लाजिमी है.
चौराहे पर चाय की दुकान के किनारे से कंडम ट्रैफ़िक पोलिस बूथ के बगल मे खडा खडा कई गोल्ड फ़्लैक फ़ूक चुका हू एक छः सौ एम एल की कोक के साथ. चाय जब काम नही करती है उस वक्त कोक और गोल्ड फ़्लैक का डैडली कोम्बिनेशन काम करता है. करीब डेढ़ घंटे से दीवार पे एक पैर लगाये गुजरती दुनिया को देख रहा हू सबको जल्दी है इतने समय मे एक भी एसा नही दिखा जिसने आराम से ओवरटेक किया हो. आंखे इस तरह ही लोगो को देखना परखना चाहती है कभी कभी. पूरी भावना और मान के साथ प्रेम करना सबके बस की बात नही है.
इंसान के अंदर एक और चीज होती है बदलाव ... जो कि जरुरी होता है पर मन का बदलना कहा तक सही है. परिस्थितिया बदलती है उसी के अनुसार इंसान का मन क्यू परिवर्तित हो जाता है हर किसी के लिये. बस यही उधेढबुन मन मे चल रही है. पर जबाब खुद के मन को दे नही पाया हू अभी तक. अक्सर यह होता ही है हम सबके साथ कि हमे हमारे ही सवालो के जबाब नही मिलते है और कुछ समय बाद उन सारे सवालो के संतुष्टी वाले जबाब हम खुद ही ढूँढ लेते है एसा भी होता है. मैने उससे कहा था कि एसा कुछ है नही कि मै बदल रहा हू बस समय कि मांग है कि थोडा थोडा हर जगह एडजस्ट करूं पर मुझसे पूरी तरह से या ठीक तरह से हो नही पा रहा है यह सब क्यूंकी मैने हमेशा खुद को हर तरह के समझौंतो से बाहर रखा है तो असल में मुझे पता नही है कि सवाल जबाब कैसे करते है खुद के साथ जिंदगी के इस वाले चेप्टर मे, पर जल्द ही सब ठीक कर लुंगा यह मेरा विश्वाव है खुद पर. तब तक मुझे मेरा बहुत ही शांत वाला स्वभाव जिन्दा रखना होगा. जो कि मेरे लिये बड़ी बात नही है.
शिकायत है नही कुछ बस यू ही मन मे कुछ भसड होती है तो थोडा बहुत फ़ालतू का लिखना ही सुकूनभरा एक हल है मेरे पास. फ़ालतू की उह पोह मे बबाल वाली मजाल नही कर पाता. क्यूकी मै भी इस जहा से भरपूर प्यार करता हू जिस तरह सब करते है. जिस तरह सब मुझे करते हैं मै भी सबको उतनी ही मुहोब्बत उतनी ही शिद्दत से करता हू. ये एवई वाली बात हो गयी आज तो अगली बार थोडा ढंग का लिखने की कोशिश रहेगी.
#दिल_जयपुरी #मोहब्बत #कोक_लवर😉
(Note:- लेखक किसी भी प्रकार के पेय पदार्थ तथा धूम्रपान का सेवन नही करता और ना ही सेवन करने के लिए प्रेरित करता है 😊😊)
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