मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019

देहात से

#देहात_से

पहले लोग बैलगाड़ी से चलते थे जैसे आजकल उनकी जगह ट्रैक्टर ने ले ली. मैडी गाव की तरफ़ से गाव आते टाइम देर शाम को कुतुकपुर के बाबा भौर्या ने कटकड की नदी की ढलान पर बैलगाड़ी उतारी ही थी कि एक नौजवान लिफ़्ट मांग बैठा. थोडा अधेरा हो गया पर मौसम साफ़ था बिल्कुल. ढलान के दोनो तरफ़ मैडी और कटकड दोनो गावो की ओर बड़े बड़े बीहड़ जैसे टीले है. कटकड की चढाई एकदम से सीधी पड़ती है.
"बाबा नदी पार करा दे थोडा अधेरा हो गया कटकड के अड्डा पर उतर जाउन्गा". 
"ए भैया आजा बैठ जा ". बाबा भौर्या ने कहकर बुला लिया.
वह नौजवान बैलगाड़ी मे बैठ गया पीछे की तरफ़ पैर लटका कर. उसको बैठते ही बैलो ने बिदकना चालू कर दिया हल्का हल्का परंतु नदी मे बैलो का बिदकना रोज की बात थी कारण आगे पता चल जायेगा. इसलिये बाबा ने तनिक भी ध्यान इस बात पर नही दिया . अब कटकड की चढाई चालू हुई तो बैल परेशान होने लग गये पर जैसे तैसे आधी चढाई पूरी कर ली और अब बैलो की गर्दन के नीचे वाला पट्टा उपर जाकर उनकी गर्दन पर भिचाव देने लग गया अर्थात गाड़ी उलणडने लग गयी.
 बाबा ने बिना देखे आवाज लगायी कि "भाया थोडा आगे आजा गाड़ी उलड रही है तू ज्यादा पीछे बैठा है". पर नो रेस्पोन्स .
उसने फ़िर आवाज लगायी "भैया आगे आजा नेक गाडो उलड रोय " फ़िर नो रेस्पोन्स.
छोकड का पेड़ , जो कि आधी चढाई से थोडा उपर है, आते आते बैल ज्यादा बिदकने लग गये और उनका गला उस पट्टे से भिचा जा रहा था बिल्कुल. तब बाबा ने पीछे मुड़कर उसको फ़िर से कहना चाहा कि "मेरे पास आगे आजा बैल परेशान हो जाएंगे " पर उसके मुह से इसके बजाय अनायास ही निकला " तेरी जीजीय.... म्हारे साडे अथ कर राखि है कतई बैल हाफ़ ने लगगे " बाबा ने बैल वाले चामटे से पीछे बैठे नौजवान को
 के मारा जिसके पैर पीछे नदी तक घसीडते हुये आ रहे थे. और सफ़ेद झक्क कपड़ो मे चुपचाप बैठा था.
" बाबा हफ़ा तो तेरे कू भी देतो पर संग रखवालो चल रोय तेरो " वह बोला.
वह भूत था. उनको वरदान होता है कि वो बैलगाड़ी के मांदडे   (पहिये के एक्सल) से आगे नही बढ़ सकते है.  बैलो की तरफ़ आगे. जानवर को रात मे भूत आसानी से दिख जाते है इसीलिये नदी मे  बैलो का बिदकना आम बात है . बड़े बूढे लोग भूतो से नही डरते है. और नदी मे नसीर बाबा का मंदिर है जिसकी वजह से भूत तो रोज दिखते रहते है पर नुकसान नही कर पाते ये.
एसा बहुतो ही बार हुआ है कटकड की नदी पर..

#दिल_जयपुरी

देहात से

#देहात_से

"अरी कितने के कितने दिये है दिये "
" दस के बीस है अम्मा " कुम्हारिन बोली.
" अरे हम्बे, जे माटी को भी सोना बना नाही दिये हो तुम जो इतना महंगा बेच रही हो . दस के तीस दो तो दे दो  बीस रुपैया के "
" ये  लो पूरे साठ है  "
" तुमने तो पहले से भरके रखे है इनमे टूटे दिये होंगे तो?  मै खुद छाँट कर लुन्गी. सब के सब एसे ही है.  कोई जला हुआ , कोई टूटा हुआ और सिराही कितने की दी है? "
" पांच की दो "
" बीस रुपैया के  दिये लिये है दो सिराही तो एसे ही दे देती,  कहा ले जायेगी इतना पैसा "
" अम्मा तुमको दिये है बीस मे साठ वरन हम  दस के बीस से ज्यादा किसी को नाही देते,  लेना है तो लो नही तो आगे बढ़ो " कुम्हारिन ने इस बार सख्ती दिखा दी.
" अरे!  तुम तो बिफ़र गयी. दिये बेच रही हो या जबरदस्ती वाला धंधा कर रही हो. एक तो इनमे एक भी दिया ठीक नही है उपर से एक सिराही तक ना ज्यादा दे रही और अब एसे बात कर रही हो जैसे नही खरीदे तो मार ही डालोगी. देख लो साठ दिये है पूरे गिन लो और ये लो तुम्हारे बीस रुपये. "

अम्मा ने साठ दिये थैले मे दिखा कर कुम्हारिन को पैसे देते हुये कहा जो उसने खुद चुन चुन कर लिये है दिये के ढेर से. सिराही साथ मे मुफ़्त देने से मना कर दिया तो पारा सर चढ़ गया अम्मा का. कुम्हारिन मुफ़्त मे क्यू देगी भई आखिर कितनी मेहनत लगती है मिट्टी के दिये बनाने मे. महीनो पहले से तैयारी शुरु कर दी जाती है तब जाके बनकर तैयार होते है और कल शाम को ही मंदिर के ठीक सामने वाली जगह रोकी जो अलग , खिलोने वाले से झगडा करना पड़ गया क्यूकी उसने दो दिन पहले ये जगह अपनी दुकान के लिये फ़िक्स कर दी थी पर कल शाम पहले कुम्हारिन ने आ लगायी दुकान. शहरी औरते दिनभर पैसा उड़ा सकती है पर दो दो रुपये पर गरीब आदमी से बहस करने की आदत है . जाने तो इनके कुछेक रुपयो से उनके अमीरी आ गयी तो ये खुद को माफ़ नही कर पायेंगी .

पहले ठीक था गाव मे ही गाव वाले लेने आ जाते थे कुम्हारो के घर ही... दिया,  सिराही, भोलुआ सब कुछ वो भी नये अनाज से . परंतु अब गावो मे लाइट और मोमबत्ती ने जगह ले ली... और शहरी, शहरी अब दियो को मोडर्न दीपक की नजर से देखते है ना कि परम्परा रीति रिवाज की नजर से.

#दिल_जयपुरी

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

अहसास

चाय को सुडक कर एक सेकंड मुह मे रोककर  फ़िर निगलने पर असली स्वाद आता है उसका.

किसी चीज  को  टक टकी लगाये कोई दस सेकंड बिना सोचे/observe/ मतलब के सिर्फ़ देखनेभर के पल का अहसास .

सड़क पर खाली बोटले उठाते उस छ साल के बच्चे से नजरे मिलाने से दिल मे उठने वाली अजीब सी अकारण आत्मगिलानी.

कितना कुछ है जीवन मे जो हमारे होने
का अहसास कराता है

शनिवार, 21 सितंबर 2019

बाहर अधूरा चाँद है

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

ये आँखो का रुंधन और
ठंड हवा की बेरुखी

रेगिस्तान से जीवन मे
वक्त का कालग्रह

अधूरा इतराता चाँद
और मेरे मन का रीत जाना

रामू काका की आवाज और
भूरी(बिल्ली)  का दिवार फ़ांद जाना

उसका मुस्कुराना याद आना
 मेरा फ़िर से दिल हार जाना

बालो मे महकती मेहन्दी
 किसी गुमनाम शहर की निशानी

बाहर अधूरा चाँद है
और रात पूरी चाँदनी

कैसा होता अगर तुम होती

कैसा होता अगर तुम होती

सुबह की चाय मे मिठास ज्यादा होती?
दिन के सूरज मे तपन ज्यादा होती?
डाइनिंग टेबल पर एक प्लेट ज्यादा होती?
वो तुलसी का पेड़ मां की पसंद का है ,
इस आंगन मे एक फ़ूल मेरी पसंद का होता
कैसा होता अगर तुम होती

ये दिल घुटा घुटा सा ना रहता
ये नैन भरे भरे से ना रहते
ये हाथ बंधे बंधे से ना रहते
यू जीने की ललक खत्म ना होती
कैसा होता अगर तुम होती.

यू खुद पे इल्जाम ना लगा रहा होता
यू अपनो के बीच पराया सा ना रहता
यू बापू से हर बात पे नजरे ना चुरा रहा होता
मै तुझसे आंख मिला रहा होता
तुम मुझसे आंख मिला रही होती
कैसा होता अगर तुम होती.

तुमसे पहली मुलाकत

#तुमसे_पहली_मुलाकात

सीने से जब पहली बार तुमने लगाया, मैंने महसूस किया कि जिंदगी की सबसे महफूज़ जगह मिल गयी है।

अब सासें थम जाना चाहती है। क्युकी जिस सहूलियत की ज़रूरत थी पूरी हो चुकी।

मैं वहां हू जहां से कोई लौटना नहीं चाहता।
जिस जगह हर कोई जीवन भर रहना चाहता है।
सुकून वालीं जगह।
दिल का शांत हो जाना, मन का पूरा हो जाना, पीठ पर हथेली का सहारे जैसा सहारा, मेरे कान से होकर मेरे दिल की धड़कनों से मिलकर धड़क की रफ़्तार बढ़ा रहीं तेरी धड़कनो की आवाज़।

वो पहली दफा तेरे आंचल से लगकर मेरा सिसकना, क्युकी मै भावुक हो गया था, फ़िर मेरे  सिसकने पर तेरा मुझको सम्हालना। मन इतनी शांति मे था कि बस इस क्षण मौत भी आये तो खुशी खुशी स्वीकार कर लू।
बेफ़िक्र दुनिया से, बेफिक्री के कुछ पल साथ जीने का एहसास।
इससे ज्यादा किसी दिलेर को इश्क मे क्या चाहिये।

मेरा तुझे देखना तेरी गर्म सांसे मेरी गर्म सांसो से मिलना।
कितना कुछ था हम दोनों को एक दूसरे मे मिलने के लिये।

An Incomplete Love

- हैलो, विनय। मै कब से फोन कर रही हूं उठा क्यूँ नहीं रहे ? सुजाता ने थोड़ी सी कड़क आवाज मे कहा।
-पापा के पास था बाबा कैसे उठाता। अभी उठाया ना। बोलो क्या बात है? विनय बोला।

-मुझे तुमसे मिलना है।
-ठीक है कल तुम्हारे कॉलेज के बाद मिलते हैं।

-नहीं अभी मिलना है।
-कबीर सिंह देख ली क्या ? अभी दोपहर के तीन बजे है कैसे आऊंगा धूप मे। ओफ़िस से आए घंटा भर नहीं हुआ पापा घर पे ही है पूछेंगे कहा जा रहे हो।

-तो तुमने अभी तक घर बताया नहीं हमारे बारे मे। मैं कितने दिन से कह रही हू तुमसे कि बता दो। बाद मे क्या कहीं और शादी कर देंगे मेरी तब बतायेंगा। मैंने अपने पापा से बात कर ली है वो मान गये। तुम भी जल्दी कर लो इस दिसम्बर मे मुझे शादी करनी है तुमसे i can't wait ।
-तुम इतनी  सेंटी क्यू हो जाती हो अभी तुम्हारा ग्रेजुएशन भी नहीं हुआ पूरा...।

-  क्या एक पढ़ा लिखा आदमी काफ़ी नही है तुमको घर मे?  बाकी पढ़ने से कौन रोक रहा है मुझे।  पढ़ती रहूंगी शादी के बाद भी। और तुम पहले मिलने आओ मैं जवाहर सर्किल पर wait कर रही हूं तुम्हारा।  एक प्रोब्लम हो गयी है प्लीज।
- क्या हुआ ? विनय ने चौंकते हुये पूछा ।

- आओ उसके बाद बताती हू।
       कहते हुये सुजाता थोड़ी इमोशनल हो गयी ।
- पापा मै अंकुश के घर जा रहा हू थोडा काम है, आता हू थोड़ी देर मे।

        विनय प्रोब्लम की सुनते ही बिना एक पल गंवाये  सुजाता से मिलने को तैयार हो गया। एक झूठा बहाना बना दिया उसके बेस्ट फ़्रेन्ड के नाम। उसे भी फ़ोन करके बोल दिया कि पापा पूछे तो बोल देना यही है।
        पिछले तीन चार साल से दोनो साथ साथ है। इसी बीच विनय की जोब लगी और दोनो ही शादी से फ़्री होना चाहते है सुजाता अभी पढ़ना चाहती है पर एक दूसरे की खुशी मे खुश हैं।

-कहा आ पहुचे ?  सुजाता ने फ़िर से कॉल किया ।
- निकल गया बस दस मिनट। उड़ के नही आ रहा यार।  विनय ने जबाब दिया।

         ये दिन सुजाता कि जिन्दगी मे बड़ी प्रोब्लम लेके आयेगा या फ़िर खुशी। सब कुछ विनय की हा या ना पर निर्भर था।  क्यूकी सुजाता प्रेग्नेन्ट है। उसे विनय से बात करनी है कि हम अभी कोर्ट मैरीज कर सकते है मै घरबालो को मना लून्गी बाद मे रीती रिवाज से शादी कर लेंगे। उसे पता है कि विनय कभी ना नही करेगा ये बहुत impotant है अभी के लिये। यदी विनय ने मना कर दिया हालांकि वह नही करेगा she sure but one percent उसने मना कर दिया... ? तो abortion only एक option रह जायेगा उसके पास।  जो उसके लिये असहनीय है।  हो सकता है जी भी ना पाये। पर उसे विनय के बारे मे पूरा पता है वो मना नही करेगा चाहे उसे घर पर लडाई ही क्यू ना करनी पड़े।

तभी अचानक से उसका मोबाईल बजा। विनय का कॉल था। उसने नोटिस किया कि घंटाभर हो गया और वो पता नही किन ख्यालो मे खो गयी ।

- This Is सुजाता?  उधर से आवाज आयी पर विनय की नही।
- yes.  पर आप....?  विनय..??
- जी मै रामनगरिया hospital से बोल रहा हू इनका नन्दपुरी बाईपास के पास एक्सीडेन्ट हो गया है और इनके मोबाईल मे आपका लास्ट कॉल था. प्लीज थोडा जल्दी आ जाईये कुछ formalities पूरी करनी है. कुछ कहना मुश्किल है सर पूरी तरह फ़ट चुका है बाकी शरीर पर कोई खरोच नही है. हैलो...  हैलो  ... जी आप सुन रही है...??

सुजाता वही गिर पड़ी. ...

विनय जल्दि मे बिना हैलमेट आ गया था और बदकिस्मती से वक्त ने भी यही वक्त चुना।  क्यूकी सुजाता ने लास्ट टाईम कब कहा था कि वो प्रोब्लम मे है उसे याद नही और आज उसने कहा है That means there is some serious matter. and Indeed It was Now Very serious....!

#दिल_जयपुरी

बिकते पर्चे, सिसकते ख़्वाब

​बिक जाते हैं पर्चे यहाँ, ईमान बिक जाता है, मेहनत की स्याही पर, नोटों का साया मंडराता है। अमीर की तिजोरी से यहाँ मुस्तकबिल तय होता है, ग़रीब...