रविवार, 1 सितंबर 2019

तुम्हारे बाद H

#ashtag_तुम्हारे_बाद
            उन दिनों मै हमारे कल वाले ख्यालो मे खोया रहता था  । आज भी कुछ एसा ही है पर वो आने वाला हुआ करता था और ये वो जो गुजर चुका ।  उस वाले कल मे मिलने की आरजू थी इस वाले मे तुम्हारी यादे । अब जब भी उस गुजरे हुए कल की याद आती है तब याद आता है कि वो कल नही था असल मे तुम ही थी जो मेरे जेहन मे आसन लगाये बैठी है और पता नही कब तलक रहोगी । मै तुम्हे हटाना भी नही चाहुन्गा वहा से । जिंदगी के कुछ पल  होते है जिन्हें इंसान अंतिम सांस तक नही भूलता । बेहतरीन पलो को आजीवन संजोये रखता है । एक कभी न खर्च होने वाली पूंजी की तरह । उस पूंजी को एक बडा तबका अचल सम्पति भी कहता है । पर सम्पति नही कह सकते क्युकि यह दुनिया छोड़ने के बाद विरासत बन जाती है जिसके हिस्से भी होते है । परंतु हमारी यादे हमारे साथ ही खत्म हो जाती है ।
         कल ही की तो बात है कलम और तकिये मे ठन गयी थी ।  तकिया झेंपते हुये बोला " तुम उसके साथ मत रहो करो । जब से तुम साथ आयी हो उसने मेरा सहारा लेना छोड़ दिया है जैसे कि पहले वह मुझे कसकर पकडता था और कुछ ही पलो मे उसकी आँखें मुझे गीला कर देती थी । " पर मुझे लगता है कि तकिये को आँखो से मोहब्बत हो गयी । मतलब सब इश्क मे है । तभी कलम झल्लाती हुई बोली " तुमने सहारे के नाम पे बहुत आन्सू गिरवाये है उन आँखो से । अब जब वह लिखता है तो घिसती तो मै हू पर उसकी आंखों से दर्द का दरिया नही बहता । मै तुम्हारे पास कभी नही आने दुन्गी उसे । मै उसे तुम्हारी तरह दुखी नही देख सकती । "

तुम्हारे बाद G

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                                      कॉफ़ी का चौथा कप भी बिना धोये टेबल के नीचे सरका दिया (कप का तल डूबा रहे इतनी कॉफ़ी कप मे छोड़ने की आदत है) और सिगरेट के न जाने कितने कश लगा चुका हू इस बात से वाकिफ़ होते हुये भी कि यह कितनी नुकसानदेय है । जब अपनी सारी उम्मीदे और जीने की मुराद छोड़ देते है तो कोई फ़र्क नही पड़ता कि क्या गलत है और क्या सही,  एसा महसूस होता है । बाहर अधूरा चाँद है पर रात पूरी चाँदनी और आँखो को नींद की वाट तक नही ।               
                                      तुम्हारे नाक पे चिउँटी काटने की आदत कितने लोगो को बता चुका हू । उस दिन तुमने बॉल फ़ेक कर मारी थी मुझे और पीछे गमला टूट गया था , याद है ! आजकल वह  छत पर पड़ा है । टूटा गमला । टूटी हुई हर चीज एेसे ही मौसम की मार झेलती हुई बेजान सी पड़ी रहती है । हर बसंत बिना शिकायत के सह लेती है और हर बसंत टूटी हुई हर चीज मे जान डालने की असफ़ल कोशिश करता है । बिखरे हुये को समेट कर जान डाल भी दो तो भी वह पहले जैसा नही रह जाता । कम से कम जुड़ने वाली जगह पर सलवट तो रहेगी ही। जैसे टूटे धागे मे जोड़ने के बाद की गाँठ । जैसे रफ़ू किये कपड़े पर उभरते पतले धागे का गुच्छा । जैसे तुम्हारे लौट आने के बाद भी दिल मे उन बेतरतीव बातो की इक टीस  या जैसे तुम्हारी एक इंच लम्बी मुस्कान को दो भागो मे बाँट देने वाला वो क्षणिकभर  पल ।

तुम्हारे बाद F

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           " सौ दर्द है,  सौ राह्ते, सब मिला दिलनशी... इक  तू ही नही....! " आज भी ये ही पसंदिदा गाना है जो मै अक्सर तुम्हे गाकर सुनाता था और तुम बस चुप रह्ती थी इक लम्बी खामोशी लिये । मानो इसके बोल का हर शब्द दिल पे लग रहा हो । हर संगीत प्रेमी का कोई ना कोई फ़ेवरेट गाना,  गायक होता है जैसे कि तुम्हारा " नुसरत फ़तेह अली खान साब और उनका वो "मेरे बाद किसको सताओगे " ।

               तुमसे कुछ कहना था आज सोचा यहा लिख देता हू, शायद तुम तक पहुच ही जायेन्गी एक दिन तो मेरी सभी बाते जो मै पहले कभी नही कह पाया या साथ रहते कहना जरुरी नही समझा । जैसे कि मै उन आदतो का शिकार नही हू जिनके लिये मैने कई वर्षो पहले तुमसे प्रोमिस किया था कि, मै आज भी ब्लैक टी नही पीता , सुबह देर तक नही सोता ,  शाम का खाना रोज घर पर ही बनाकर खाता हू जैसी छोटी छोटी पर बहुत सी आदते जो तुमने सुधारी अब भी सुधरी हुई है ।  हा एक बात है जो मुझमे बदल गयी है पहले जब मै किसी बात पर बात नही करना चाहता था तो बात को नया मोड़ देकर ध्यान बंटा देता था या कहो कि बात करने से कतराता था । पर अब मै हर बात पर खुलकर चर्चा करता हू इग्नोर नही करता । सिर्फ़ उन बातो के अलावा जो दर्द नही देती है । तेरी याद दिलाने वाली हर बात, हर दृश्य,  हर जगह,  हर वो  आदमी जिसकी याद आते ही तुम मेरी आँखो के सामने आ जाती हो उन सबके बारे मे मै जरूर बात करता हू । कितना भोलापन था ना तेरी बातो मे । मासूम और भोली सूरत के साथ दिल के भोलेपन का शानदार कोम्बिनेशन ।

                वक्त के साथ सब कुछ कितना बदल जाता है । तुम जिन्दगी के उस मोड को पार कर चुकी हो और मै हू कि बार बार मोड़ के इस पार ही मुड़कर वापस आ जाता हू या यू कहू कि मै जाना ही नही चाहता इस खूबसूरत मोड़ के बाद ।  दरअसल यह मुझे खूबसूरत ही लग रहा है इसीलिए उस तरफ़ नही जाना चाहता । क्युकी यहा तुमसे जुड़ी हर चीज के साथ मै जी सकता हू ।

                बीते हुये कल को तुम्हारी यादो के साथ कुछेक दिन या कुछेक वर्ष  या शायद सारी उमर या बस अभी थोडा सा और जीना चाहता हूँ । इंसान उन पलो को ताउम्र संजोए रखता है जिनमे उसने महसूस किया हो कि मानो जीवन जिया है जिसके लिये असल मे वह जन्मा है ।

तुम्हारे बाद E

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                                          यदी किसी की कद्र तुम जरुरत से ज्यादा करोगे तो उसके पास तुम्हारी भावनाओ का कत्ल कर दिया जाता है । तुम्हारी कद्र की महत्वपूर्णता उसके पास खत्म हो जाती है । शायद आसानी से मिलने वाली चीजो और अच्छे दिल के इंसान इन दोनो का ही वक्त कम ही है या है ही नही । मैने उससे कुछ भी तो नही कहा था फ़िर क्यू उसे फ़र्क नही पड़ता । कभी कुछ कहा ही नही,  कुछ कहा होता तो शायद पड़ता । उससे पिछली मुलाकात हर बार की तरह शानदार नही रही थी । इस बार उसका रुखेपन वाला चेहरा देखा था मैने उस झूठी मुस्कान के पीछे । क्या लोग एक ही चेहरे को बहुत दिनो तक देखने से या एक ही तरह के इंसान से बहुत समय तक जुड़े रहने से बोर हो जाते है । इसलिये वो नये चेहरे नये लोग तलाशने के लिये पुराने बदल देना चाहते है । हर इंसान को उसके जीवन मे अनेको प्रकार के इंसान मिलते है  जितने भी उसे अच्छे लगते है  सबसे जुड़ना चाहता हैं इसी के उलट कुछ एसे भी होते है जिनको मिलते तो बहुत लोग है परंतु सारे जीवन मे  गिने चुने, कुछेक , शायद आंकड़ा दहाई भी नही छू पाये,  जुड़ पाते है  या यू कहें कि जीवन मे ज्यादा उथल पुथल पसंद नही एसे लोगो को । हर रोज  किसी से बात बेबात पे बहस करना ।   दरअसल दूसरी तरह के लोग सनकी होते  हैं  ।  इस प्रकार के लोग हमेशा अकेला रहना चाहते है.

                                              मैने उसको कहा भी था कि कुछ मैने कह दिया हो तो मै उसके लिये माफ़ी मागता हू  पर उसने इसे बड़ी खूबसूरती के साथ दरकिनार कर दिया जिसकी मुझे  उससे तो कतई उम्मीद नही थी । मानो जैसे क्या फ़र्क पड़ता है । मेरे व्यक्तिगत जीवन मे मैने क्षमा शब्द बहुत कम उपयोग किया है। कभी दिल से लगा हो कि कहना चाहिये तब ही कहा है और किसी के मुंह से सुना है तो नजरन्दाज नही किया क्युकी यह शब्द कुछेक ही लोगो की जुबा से निकलता है जो शायद  दिल के  साफ़ होते है पर फ़िर भी मुझे इन्सान की परख करना नही आता । कभी महत्वपूर्ण ही नही समझा । शायद इसीलिये उसने कह दिया कि वह एसे लोगो की कदर नही करती जो कठोर दिल के हो । अब उसे कौन समझाये कि इस कठोर दिल के सोफ़्ट कोर्नर मे वो ही रहती है ।

तुम्हारे बाद D

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                                                       खिड़की वापस लगा दी और पर्दा भी ताकि कोई मेरा अकेलापन ना देख सके । ये लम्बा अशोक का पेड़ भी । बारिश रुकी नही है पर धीमी पड़ चुकी है मै कॉफ़ी बनाने किचन मे चला आया ।  हल्की बारिश होती तो बाहर जाता पीने , पास मे ही एक कॉफ़ी कैफ़े है पर ये औसत से थोड़ी ज्यादा है ।  तुम्हारे बिना अब छोटी छोटी चीजो  में खुशी ढूँढना आदत सी हो गयी है जैसे मद्रास में शाम की इस ठंडी हवा का अलग ही अहसास है । जैसे बचपन मे बारिश मे भीगने के बहाने ढूँढते थे जैसे कि बनिये की दुकान से फ़लाँ सामान लाना है बगैरा । अब लगता है कि भीग गये तो ठंड लग जायेगी , बीमार हो जाएंगे या कपड़े खराब हो जाएंगे जैसे बेमतलबी से बहाने जिनके पीछे जिन्दगी है । एक खुशनुमा जिन्दगी । जो तुम्हारे साथ थी बिल्कुल वैसी ही खुशनुमा जिन्दगी । जहा बस हम होते है और हमारा बचपना जो शायद अब नही रहा । इंसान के पूरे जीवन मे सिर्फ़ बचपन ही आनंदमय होता है बाकी उम्र जिम्मेदारीयो से भरी,  डर से भरी एसी ही कई सारी चीजो के बीच से गुजरती है । हमेशा की तरह कॉफ़ी टेबल पर रखी और एक गिलास पानी पिया जो की मेरी आदत है । पिताजी कहते है चाय या कॉफ़ी से पहले एक गिलास पानी पियो तो वो नुकसान नही करती । अब इसमे सच्चाई कितनी है पता नही .

तुम्हारे बाद C

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                                            आज फ़िर वो ही पसंदीदा गाना मेरा पीछा छोडने का नाम नहीं ले रहा है जबकि मुझे भली भाँति समझ है उस गुजरे वक्त की जो कभी मेरा हुआ करता  था  पर आज  वो  ही  मेरा नही है । समय का सारा घेराव मै  अच्छे से  समझता हूँ ।  मेरा दिल भी । परंतु    हम सब इंसान है जीव है और जीवो मे भावनाए होना प्राकृतिक है । समझ कोई आढे नही आती या कम आती है । इन गीली आँखो से वर्षो से आजीवन के लिये संजोये सपने बिखरते हुये जब चाहे वह निकलते है जैसे टूटकर भी मेरे नहीं होना चाहते ।

                                               कभी कभी सोचता हूं क्या वो भी उतनी ही सांसे लेती होगी जितनी की मै ! क्या उसकी भी आँखो से बहने वाले खारे दरिया मे कभी ना खत्म होने वाला पानी होगा जितना मेरी मे है !  या थोडा सा कम या थोडा सा ज्यादा । या फ़िर जितना मै सोचता हू उतना वो नहीं सोचती ।   " आँखो पर बड़े बड़े काले घेरे हो गये है आपके " कई लोग कह चुके है पिछले कुछ दिनो मे  । पर मै तो पूरे सात से आठ घंटे सो रहा हूँ । शायद एसे ही पड़ रहे होंगे । उम्र का एक पड़ाव पूरा हो चुका है शायद इसलिये भी ।  मुझे फ़र्क नही पड़ता कोई कुछ भी कहे कुछ भी सोचे या कोई अपनी जिंदगी से ही क्यू ना निकाल दे भले । हा हू केयरलेस, नही  कर सकता मै । मै उतना अच्छा लड़का नही हू जितना कुछ लोग समझते हैं ।

तुम्हारे बाद B

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                        कुछ दिनो से लग रहा है कि अब ज्यादा वक्त नही बचा है । जो मै हू नही वो ही बनता जा रहा हू । पलभर के लिये  लगता है  कि बस  ये ही  पल आखिरी  है फ़िर  कुछ ही सैकंड बाद ख्याल आता है पलभर का ही तो खेल है इस जहां मे । सारी दुनिया पल पल जीती हुई वर्षो जी जाती है और नही तो आज की रात नही गुजरे । यही विधान है ।  पर मुझमे अब जीने  की  चाह भी नही  बची है ।  बचेगी भी कैसे । जब  हम अपने जीवन की सबसे प्यारी चीज के साथ नही जी सकते तो क्यू जीना चाहेंगे ।

                       रात का तीसरा पहर बीतने को है और मेरे अंदर अब कुछ बचा नही है, सब रीत गया हू मै,  गहराई तक । मुझे पता है कि ना मेरा कोई कल था और ना ही कोई कल होगा । मेरे पास है तो बस आज ।  जिसमे भी अभी के कुछ पल । एक वक्त होता है जब हमे हमारी जिम्मेदारीयो भरी जिंदगी नही दिखती । एसे विचार आते ही नही मन मे कि अभी कुछ करना भी है जीवन मे ।

बिकते पर्चे, सिसकते ख़्वाब

​बिक जाते हैं पर्चे यहाँ, ईमान बिक जाता है, मेहनत की स्याही पर, नोटों का साया मंडराता है। अमीर की तिजोरी से यहाँ मुस्तकबिल तय होता है, ग़रीब...