रविवार, 1 सितंबर 2019

तुम्हारे बाद F

#ashtag_तुम्हारे_बाद
           " सौ दर्द है,  सौ राह्ते, सब मिला दिलनशी... इक  तू ही नही....! " आज भी ये ही पसंदिदा गाना है जो मै अक्सर तुम्हे गाकर सुनाता था और तुम बस चुप रह्ती थी इक लम्बी खामोशी लिये । मानो इसके बोल का हर शब्द दिल पे लग रहा हो । हर संगीत प्रेमी का कोई ना कोई फ़ेवरेट गाना,  गायक होता है जैसे कि तुम्हारा " नुसरत फ़तेह अली खान साब और उनका वो "मेरे बाद किसको सताओगे " ।

               तुमसे कुछ कहना था आज सोचा यहा लिख देता हू, शायद तुम तक पहुच ही जायेन्गी एक दिन तो मेरी सभी बाते जो मै पहले कभी नही कह पाया या साथ रहते कहना जरुरी नही समझा । जैसे कि मै उन आदतो का शिकार नही हू जिनके लिये मैने कई वर्षो पहले तुमसे प्रोमिस किया था कि, मै आज भी ब्लैक टी नही पीता , सुबह देर तक नही सोता ,  शाम का खाना रोज घर पर ही बनाकर खाता हू जैसी छोटी छोटी पर बहुत सी आदते जो तुमने सुधारी अब भी सुधरी हुई है ।  हा एक बात है जो मुझमे बदल गयी है पहले जब मै किसी बात पर बात नही करना चाहता था तो बात को नया मोड़ देकर ध्यान बंटा देता था या कहो कि बात करने से कतराता था । पर अब मै हर बात पर खुलकर चर्चा करता हू इग्नोर नही करता । सिर्फ़ उन बातो के अलावा जो दर्द नही देती है । तेरी याद दिलाने वाली हर बात, हर दृश्य,  हर जगह,  हर वो  आदमी जिसकी याद आते ही तुम मेरी आँखो के सामने आ जाती हो उन सबके बारे मे मै जरूर बात करता हू । कितना भोलापन था ना तेरी बातो मे । मासूम और भोली सूरत के साथ दिल के भोलेपन का शानदार कोम्बिनेशन ।

                वक्त के साथ सब कुछ कितना बदल जाता है । तुम जिन्दगी के उस मोड को पार कर चुकी हो और मै हू कि बार बार मोड़ के इस पार ही मुड़कर वापस आ जाता हू या यू कहू कि मै जाना ही नही चाहता इस खूबसूरत मोड़ के बाद ।  दरअसल यह मुझे खूबसूरत ही लग रहा है इसीलिए उस तरफ़ नही जाना चाहता । क्युकी यहा तुमसे जुड़ी हर चीज के साथ मै जी सकता हू ।

                बीते हुये कल को तुम्हारी यादो के साथ कुछेक दिन या कुछेक वर्ष  या शायद सारी उमर या बस अभी थोडा सा और जीना चाहता हूँ । इंसान उन पलो को ताउम्र संजोए रखता है जिनमे उसने महसूस किया हो कि मानो जीवन जिया है जिसके लिये असल मे वह जन्मा है ।

तुम्हारे बाद E

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                                          यदी किसी की कद्र तुम जरुरत से ज्यादा करोगे तो उसके पास तुम्हारी भावनाओ का कत्ल कर दिया जाता है । तुम्हारी कद्र की महत्वपूर्णता उसके पास खत्म हो जाती है । शायद आसानी से मिलने वाली चीजो और अच्छे दिल के इंसान इन दोनो का ही वक्त कम ही है या है ही नही । मैने उससे कुछ भी तो नही कहा था फ़िर क्यू उसे फ़र्क नही पड़ता । कभी कुछ कहा ही नही,  कुछ कहा होता तो शायद पड़ता । उससे पिछली मुलाकात हर बार की तरह शानदार नही रही थी । इस बार उसका रुखेपन वाला चेहरा देखा था मैने उस झूठी मुस्कान के पीछे । क्या लोग एक ही चेहरे को बहुत दिनो तक देखने से या एक ही तरह के इंसान से बहुत समय तक जुड़े रहने से बोर हो जाते है । इसलिये वो नये चेहरे नये लोग तलाशने के लिये पुराने बदल देना चाहते है । हर इंसान को उसके जीवन मे अनेको प्रकार के इंसान मिलते है  जितने भी उसे अच्छे लगते है  सबसे जुड़ना चाहता हैं इसी के उलट कुछ एसे भी होते है जिनको मिलते तो बहुत लोग है परंतु सारे जीवन मे  गिने चुने, कुछेक , शायद आंकड़ा दहाई भी नही छू पाये,  जुड़ पाते है  या यू कहें कि जीवन मे ज्यादा उथल पुथल पसंद नही एसे लोगो को । हर रोज  किसी से बात बेबात पे बहस करना ।   दरअसल दूसरी तरह के लोग सनकी होते  हैं  ।  इस प्रकार के लोग हमेशा अकेला रहना चाहते है.

                                              मैने उसको कहा भी था कि कुछ मैने कह दिया हो तो मै उसके लिये माफ़ी मागता हू  पर उसने इसे बड़ी खूबसूरती के साथ दरकिनार कर दिया जिसकी मुझे  उससे तो कतई उम्मीद नही थी । मानो जैसे क्या फ़र्क पड़ता है । मेरे व्यक्तिगत जीवन मे मैने क्षमा शब्द बहुत कम उपयोग किया है। कभी दिल से लगा हो कि कहना चाहिये तब ही कहा है और किसी के मुंह से सुना है तो नजरन्दाज नही किया क्युकी यह शब्द कुछेक ही लोगो की जुबा से निकलता है जो शायद  दिल के  साफ़ होते है पर फ़िर भी मुझे इन्सान की परख करना नही आता । कभी महत्वपूर्ण ही नही समझा । शायद इसीलिये उसने कह दिया कि वह एसे लोगो की कदर नही करती जो कठोर दिल के हो । अब उसे कौन समझाये कि इस कठोर दिल के सोफ़्ट कोर्नर मे वो ही रहती है ।

तुम्हारे बाद D

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                                                       खिड़की वापस लगा दी और पर्दा भी ताकि कोई मेरा अकेलापन ना देख सके । ये लम्बा अशोक का पेड़ भी । बारिश रुकी नही है पर धीमी पड़ चुकी है मै कॉफ़ी बनाने किचन मे चला आया ।  हल्की बारिश होती तो बाहर जाता पीने , पास मे ही एक कॉफ़ी कैफ़े है पर ये औसत से थोड़ी ज्यादा है ।  तुम्हारे बिना अब छोटी छोटी चीजो  में खुशी ढूँढना आदत सी हो गयी है जैसे मद्रास में शाम की इस ठंडी हवा का अलग ही अहसास है । जैसे बचपन मे बारिश मे भीगने के बहाने ढूँढते थे जैसे कि बनिये की दुकान से फ़लाँ सामान लाना है बगैरा । अब लगता है कि भीग गये तो ठंड लग जायेगी , बीमार हो जाएंगे या कपड़े खराब हो जाएंगे जैसे बेमतलबी से बहाने जिनके पीछे जिन्दगी है । एक खुशनुमा जिन्दगी । जो तुम्हारे साथ थी बिल्कुल वैसी ही खुशनुमा जिन्दगी । जहा बस हम होते है और हमारा बचपना जो शायद अब नही रहा । इंसान के पूरे जीवन मे सिर्फ़ बचपन ही आनंदमय होता है बाकी उम्र जिम्मेदारीयो से भरी,  डर से भरी एसी ही कई सारी चीजो के बीच से गुजरती है । हमेशा की तरह कॉफ़ी टेबल पर रखी और एक गिलास पानी पिया जो की मेरी आदत है । पिताजी कहते है चाय या कॉफ़ी से पहले एक गिलास पानी पियो तो वो नुकसान नही करती । अब इसमे सच्चाई कितनी है पता नही .

तुम्हारे बाद C

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                                            आज फ़िर वो ही पसंदीदा गाना मेरा पीछा छोडने का नाम नहीं ले रहा है जबकि मुझे भली भाँति समझ है उस गुजरे वक्त की जो कभी मेरा हुआ करता  था  पर आज  वो  ही  मेरा नही है । समय का सारा घेराव मै  अच्छे से  समझता हूँ ।  मेरा दिल भी । परंतु    हम सब इंसान है जीव है और जीवो मे भावनाए होना प्राकृतिक है । समझ कोई आढे नही आती या कम आती है । इन गीली आँखो से वर्षो से आजीवन के लिये संजोये सपने बिखरते हुये जब चाहे वह निकलते है जैसे टूटकर भी मेरे नहीं होना चाहते ।

                                               कभी कभी सोचता हूं क्या वो भी उतनी ही सांसे लेती होगी जितनी की मै ! क्या उसकी भी आँखो से बहने वाले खारे दरिया मे कभी ना खत्म होने वाला पानी होगा जितना मेरी मे है !  या थोडा सा कम या थोडा सा ज्यादा । या फ़िर जितना मै सोचता हू उतना वो नहीं सोचती ।   " आँखो पर बड़े बड़े काले घेरे हो गये है आपके " कई लोग कह चुके है पिछले कुछ दिनो मे  । पर मै तो पूरे सात से आठ घंटे सो रहा हूँ । शायद एसे ही पड़ रहे होंगे । उम्र का एक पड़ाव पूरा हो चुका है शायद इसलिये भी ।  मुझे फ़र्क नही पड़ता कोई कुछ भी कहे कुछ भी सोचे या कोई अपनी जिंदगी से ही क्यू ना निकाल दे भले । हा हू केयरलेस, नही  कर सकता मै । मै उतना अच्छा लड़का नही हू जितना कुछ लोग समझते हैं ।

तुम्हारे बाद B

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                        कुछ दिनो से लग रहा है कि अब ज्यादा वक्त नही बचा है । जो मै हू नही वो ही बनता जा रहा हू । पलभर के लिये  लगता है  कि बस  ये ही  पल आखिरी  है फ़िर  कुछ ही सैकंड बाद ख्याल आता है पलभर का ही तो खेल है इस जहां मे । सारी दुनिया पल पल जीती हुई वर्षो जी जाती है और नही तो आज की रात नही गुजरे । यही विधान है ।  पर मुझमे अब जीने  की  चाह भी नही  बची है ।  बचेगी भी कैसे । जब  हम अपने जीवन की सबसे प्यारी चीज के साथ नही जी सकते तो क्यू जीना चाहेंगे ।

                       रात का तीसरा पहर बीतने को है और मेरे अंदर अब कुछ बचा नही है, सब रीत गया हू मै,  गहराई तक । मुझे पता है कि ना मेरा कोई कल था और ना ही कोई कल होगा । मेरे पास है तो बस आज ।  जिसमे भी अभी के कुछ पल । एक वक्त होता है जब हमे हमारी जिम्मेदारीयो भरी जिंदगी नही दिखती । एसे विचार आते ही नही मन मे कि अभी कुछ करना भी है जीवन मे ।

तुम्हारे बाद A

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                        मै हमेशा से ही उसके पास रहना चाहता था ।  मेरा दिल कभी उसे छोड़कर जाने को राजी नही हुआ और ना ही कभी मेरे हाथो ने उसके हाथो को छोड़ना चाहा । नींद मे भी अपने होंठों को उसका नाम बुदबुदाते अक्सर पकड़ा है मैने । उसका नाम कई दफ़ा पुकार लेने की रिश्वत मांगी है मुझसे इन अंधेरी रातो ने नींद भेजने के बहाने ।
                      हर वो सुबह जो इस जहां मे खुदा की ईबादत से शुरू होती है , मेरे लिये उसका जिक्र किये बिना कभी नही हुई । आज भी हर शाम मुझसे शिकायत करती है कि शायद मै अभी तक खुद के लिये नही जी पाया हू । वास्तव मे..??...  पता नहीं!
                       मेरे कमरे के दरीचे से झाँकता ये अशोक का लम्बा पेड़ मेरी पल पल की बेचैनी का गवाह रहा है । इसने मुझे दिन मे उसका नाम चिल्लाते देखा है तो रात को बालकनी मे भटकते भी,  उसकी यादो की वजह से औझल नींद के कारण । पर इसने मेरे हालात समझे है सो चुप रहता है या इसे तरस आता है मेरी हालत पर । पता नहीं क्या है ।

शुक्रवार, 17 मई 2019

मद्रास डायरी 5

मद्रास डायरी 5

ये पांचवा दिन था. आज वो दिखाई नहीं दे रही . मेरी नजरे बस उसी पर टिकना चाह रही थी पर उसकी नामौजूदगी मे टिक नही पा रही थी.  कोच मे कभी इस तरफ़ तो कभी उस तरफ़ देखें जा रहा था बेकार में. धूप भी ठीक से नही खुली आज शायद बारिश आयेगी दोपहर तक. घने काले बादलो से लग रहा था कि मौसम ज्यादा ही खराब होने वाला है .   मन अशांत सा है. अनकहे से कई अरमान दिल मे थे और न जाने कब से जो सब आज उसके साथ शेयर करने वाला था. सब तरफ़ निगाह फ़ेरने के बाद कन्फ़र्म हो गया था कि आज वो नही आयी है.  मेरे डेली रुटीन मे आज उसकी कमी थी . पर उसकी कई साथी आयी है सिर्फ़ वो ही नही एसा क्यू.  मन मे ख्याल आ रहा था शायद खराब मौसम की वजह से नही है पर दूसरा ख्याल कहता तो फ़िर ये सब कैसे आ गयी वैसे भी  मौसम इतना भी खराब नही है.  कही सौ ख्वाव देखे थे सब का कोई अता पता नही . तभी उसकी एक साथी ने आवाज लगायी... 
क्या आप ही रिन्कू हो ??
हा!  पर...!!!
वो अब नही आयेगी. 
पर क्यू? 
उसने दूसरी कम्पनी जोईन कर ली बैंगलोर मे आज से.  शैटरडे को निकल गयी थी वही शिफ़्ट हो गयी है वो अब. 
तो आपको कैसे पता हमारे बारे मे ??
उसने मुझे बता रखा था पहले दिन से ही. 
कल कोल किया था तो बोल रही थी अगर आप मिलो तो एक बार बता दू.

इस छोटे से कन्वरसेशन मे सब खत्म हो गया था. लग रहा था बडा ख्वाव अधूरा रह गया. मन बैचैन पहले से ही था अब तो मानो टूट सा गया.  कुछेक पल की बातो से इतना लगाव. दरअसल लगाव तो पहले ही था बात अब हुई थी. उसकी हर बात रह रह के याद आ रही थी.  उसके पास होने जैसा महसूस तो नहीं हो रहा था पर कुछ तो था जो थोडा लग रहा था कि यही आस पास ही है.

आपका नम्बर दे सकते हो?  उसकी सहेली ने अचानक से कहा. 
आपको??
नही!  वो मांग रही थी. आपसे बात करना चाहती है. शाम को बात करूंगी तब दे दुन्गी. 
ओह. !
हा. उसका घर यही है. पर वहा पैकेज अच्छा मिलने के कारण चली गयी है.  " उसने कहा

 मेरे अंदर की उदासीनता लम्बी मुस्कान मे बदल गयी थी. इतनी सी देर मे पता नही क्या क्या सोच लिया था. किसी को दिल से चाहते है तो वो जरुर मिलता है ये बात शायद सच निकली. हल्की बारिश के साथ मौसम खुशनुमा हो रहा था.  मै उतर कर office आ गया था.

बिकते पर्चे, सिसकते ख़्वाब

​बिक जाते हैं पर्चे यहाँ, ईमान बिक जाता है, मेहनत की स्याही पर, नोटों का साया मंडराता है। अमीर की तिजोरी से यहाँ मुस्तकबिल तय होता है, ग़रीब...